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TBM ‘नर्मदा’ ने खोदनी शुरू की पहली भूमिगत सुरंग:इंदौर मेट्रो का अंडरग्राउंड मिशन शुरू!

एयरपोर्ट स्टेशन से टीबीएम ‘नर्मदा’ ने शुरू की सुरंग की खुदाई; 20 मीटर गहराई तक जाएगी मशीन, हर 1.4 मीटर खुदाई में निकलेगी 48.6 घनमीटर मिट्टी, लोकोमोटिव और तीन ट्रॉलियों से होगी निकासी
TBM ‘नर्मदा’ ने खोदनी शुरू की पहली भूमिगत सुरंग:इंदौर मेट्रो का अंडरग्राउंड मिशन शुरू!
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इंदौर। शहर में भूमिगत मेट्रो के निर्माण की दिशा में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। एयरपोर्ट स्टेशन से पहली बार टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ‘नर्मदा’ ने जमीन के नीचे उतरकर सुरंग की खुदाई शुरू कर दी। इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और हाइड्रोलिक सिस्टम की जांच पूरी होने के बाद शाम करीब सात बजे मशीन को चालू किया गया। अब यह मशीन धीरे-धीरे जमीन के अंदर आगे बढ़ते हुए भूमिगत मेट्रो टनल तैयार करेगी।करीब 102 मीटर लंबी टीबीएम ‘नर्मदा’ के कटिंग व्हील का व्यास 6.65 मीटर है। मशीन को करीब 20 मीटर गहराई तक ले जाकर सुरंग तैयार की जाएगी। खुदाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी को बाहर निकालने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

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शुरुआत में कन्वेयर से बाहर आएगी मिट्टी

टीबीएम के शुरुआती संचालन के दौरान खुदाई से निकलने वाली मिट्टी को कन्वेयर सिस्टम के जरिए बाहर लाया जाएगा। इसके बाद जब मशीन करीब 20 मीटर अंदर पहुंच जाएगी, तब टनल के भीतर लोकोमोटिव इंजन उतारा जाएगा।लोकोमोटिव के पीछे तीन ट्रॉलियां लगाई जाएंगी। टीबीएम से निकलने वाली मिट्टी इन ट्रॉलियों में भरी जाएगी और लोकोमोटिव के माध्यम से उसे टनल से बाहर लाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार करीब दो से तीन दिन बाद लोकोमोटिव का इस्तेमाल शुरू होने की संभावना है।

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1.4 मीटर खुदाई में 48.6 घनमीटर मिट्टी

टीबीएम के आगे बढ़ने के साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी बाहर निकलेगी। करीब 1.4 मीटर खुदाई पूरी होने पर लगभग 48.6 घनमीटर मिट्टी निकलने का अनुमान है। इस मिट्टी को ट्रॉलियों में भरकर बाहर लाया जाएगा।टीबीएम के पीछे करीब पांच से सात दिन बाद अस्थायी रेलवे ट्रैक बिछाने का काम शुरू किया जाएगा। इन पटरियों पर लोकोमोटिव इंजन और मिट्टी से भरी ट्रॉलियां टनल के अंदर आवाजाही करेंगी। इससे खुदाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी को लगातार बाहर निकालने में मदद मिलेगी।

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गहराई बढ़ने के साथ हाइड्रोलिक सिस्टम भी नीचे जाएगा

टीबीएम को आगे बढ़ाने और उसे आवश्यक दिशा में घुमाने में हाइड्रोलिक प्रेशर मशीन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। फिलहाल यह मशीन जमीन के ऊपर रखी गई है। जैसे-जैसे टीबीएम जमीन के अंदर अधिक गहराई तक जाएगी, हाइड्रोलिक सिस्टम को भी उसके साथ नीचे उतारा जाएगा।मशीन के आगे बढ़ने के साथ ही टनल की दीवारों को मजबूत बनाने का काम भी चलता रहेगा। इसके लिए प्री-कास्ट कंक्रीट रिंग्स लगाई जाएंगी। ये रिंग्स टनल की संरचना को मजबूती देने के साथ-साथ उसके अंदरूनी हिस्से को निर्धारित आकार देने में मदद करेंगी।

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ईपीबी तकनीक से होगी खुदाई

टीबीएम ‘नर्मदा’ अर्थ प्रेशर बैलेंस शील्ड (ईपीबी) मिक्स शील्ड तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक का इस्तेमाल जमीन के भीतर नियंत्रित तरीके से सुरंग बनाने के लिए किया जाता है।मशीन में सुरक्षा के लिहाज से कई व्यवस्थाएं की गई हैं। इसमें गैस मॉनिटरिंग सिस्टम, वन-सेकंड इमरजेंसी स्टॉप और 24 घंटे सातों दिन कंट्रोल रूम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं।टीबीएम ने 25 अप्रैल को थाईलैंड में फैक्ट्री एक्सेप्टेंस टेस्ट पूरा किया था। इसके बाद मशीन को इंदौर लाया गया। यहां इसे असेंबल करने के बाद एयरपोर्ट स्टेशन से लॉन्च किया गया और अब इसने भूमिगत टनल की खुदाई शुरू कर दी है।

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आसपास की इमारतों पर भी रखी जाएगी नजर

भूमिगत खुदाई के दौरान आसपास के मकानों और जमीन की सुरक्षा को लेकर भी विशेष निगरानी व्यवस्था की गई है। इसके लिए इंस्ट्रूमेंटेशन स्कीम लागू की गई है।इसके तहत जमीन और आसपास की इमारतों में लगाए गए सेंसर मामूली से मामूली बदलाव को भी रिकॉर्ड करेंगे। खुदाई के दौरान यदि जमीन या किसी भवन में असामान्य हलचल सामने आती है तो उसकी जानकारी समय रहते मिल सकेगी और जरूरत के अनुसार तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।

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सुरक्षा और गुणवत्ता पर विशेष जोर

मेट्रो के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने अधिकारियों और तकनीकी टीम को भूमिगत निर्माण के दौरान सुरक्षा, गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...

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