दीये के साथ बच्चे देंगे दयालुता और ईमानदारी का संदेश, भोपाल की पाठशाला में खास होगी दिवाली

भोपाल। दिवाली पर घरों में दीये जलाकर खुशियां मनाई जाती हैं, लेकिन भोपाल की राजीव नगर बस्ती में इस बार बच्चे रोशनी के साथ अच्छे संस्कारों का संदेश भी देंगे। फ्लाई फाउंडेशन की ओर से संचालित निःशुल्क पाठशाला में बच्चों के लिए खास दीपोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसमें मिठाई, नाश्ता, रंगोली और फुलझड़ियों के साथ कई गतिविधियां होंगी। खास बात यह है कि हर बच्चा अपने घर से एक दीया लेकर आएगा और उसके साथ दयालुता, ईमानदारी, शिक्षा या स्वच्छता से जुड़ा संदेश देगा।
5 बच्चों से शुरू हुई पाठशाला, अब 22 बच्चे ले रहे शिक्षा
फ्लाई फाउंडेशन की संस्थापक दिव्या यादव ने बताया कि संस्था की शुरुआत वर्ष 2020 में लॉकडाउन के दौरान कोविड मरीजों की मदद के उद्देश्य से हुई थी। इसके बाद वर्ष 2021 में संस्था ने बच्चों की शिक्षा पर काम शुरू किया। शुरुआत में बस्ती के सिर्फ पांच बच्चों के साथ निःशुल्क पाठशाला शुरू की गई थी। आज यहां आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के करीब 22 बच्चे शाम के समय पढ़ने आते हैं।
दिव्या के अनुसार, बच्चों की संख्या समय-समय पर घटती-बढ़ती रहती है। पाठशाला में बच्चों को पढ़ाई के साथ व्यक्तित्व विकास, संवाद कौशल, मिल-जुलकर काम करने और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दी जाती है। बच्चों की मेहनत के अच्छे परिणाम भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में पाठशाला की एक छात्रा ने 10वीं कक्षा में 90 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।
बेकार सामग्री से बच्चे बनाएंगे सजावट का सामान
इस बार पाठशाला की सजावट भी खास होगी। बच्चे अनुपयोगी सामग्री से खुद सजावटी वस्तुएं तैयार कर रहे हैं। इन्हीं से पाठशाला को सजाया जाएगा। दिव्या बताती हैं कि हर साल बच्चों के साथ त्योहार कुछ अलग अंदाज में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के परिवार आर्थिक परेशानियों और घरेलू हिंसा जैसी कई चुनौतियों का सामना करते हैं। ऐसे में त्योहारों के जरिए बच्चों को एक साथ जोड़ने, समूह में काम करने और दूसरों के प्रति संवेदनशील बनने का मौका दिया जाता है।
'हमें आर्थिक मदद के साथ लोगों का समय भी चाहिए'
दिव्या यादव का कहना है कि बच्चों की मदद के लिए सिर्फ आर्थिक सहयोग ही नहीं, बल्कि लोगों का समय और साथ भी जरूरी है। जब लोग बच्चों के बीच आकर उनसे बातचीत करते हैं, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने बहुत कम उम्र में अपनी मां को खो दिया था। सड़क पर इन बच्चों को देखकर उन्हें महसूस हुआ कि इन्हें पढ़ाई के साथ सही मार्गदर्शन और सहयोग की जरूरत है।
इसी सोच से निःशुल्क पाठशाला शुरू करने का विचार आया। दिव्या कहती हैं कि इन वर्षों में बच्चों ने अपनी मेहनत और उपलब्धियों से उन्हें कई बार गर्व महसूस कराया है। इस दिवाली भी उनकी कोशिश है कि बच्चे सिर्फ त्योहार न मनाएं, बल्कि अपने जीवन में अच्छे संस्कारों और सकारात्मक बदलाव का संकल्प भी लें।




















