टीआई दिलीप पुरी हत्याकांड का इंदौर कनेक्शन! आरोपी को लेकर वकील के दफ्तर पहुंची पुलिस, फर्जी दस्तावेजों की तलाश

इंदौर। देवास जिले के खातेगांव थाना प्रभारी (टीआई) दिलीप पुरी हत्याकांड की जांच अब इंदौर तक पहुंच गई है। मामले की पड़ताल कर रही खातेगांव पुलिस की एक टीम गिरफ्तार आरोपी को साथ लेकर इंदौर के कलेक्टर ऑफिस परिसर स्थित एक वकील के दफ्तर पहुंची। यहां पुलिस ने करीब दो घंटे तक छानबीन की। बताया जा रहा है कि हत्याकांड से जुड़े कुछ फर्जी दस्तावेज इसी कार्यालय में तैयार किए गए थे। पुलिस ने जांच के दौरान नोटरी रजिस्टर सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। इस कार्रवाई के बाद मामले में दस्तावेजों की भूमिका और शराब तस्करी के नेटवर्क से जुड़े लोगों की गतिविधियों को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस अब जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि उनकी वास्तविकता और हत्याकांड से उनके संबंधों का पता लगाया जा सके।
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चेकिंग के दौरान शराब से भरे वाहन ने टीआई को कुचला था
दरअसल, खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि शराब से भरा एक वाहन क्षेत्र से गुजरने वाला है। सूचना के आधार पर टीआई पुरी अपनी टीम के साथ वाहन की चेकिंग और उसे पकड़ने के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान शराब से भरे वाहन के चालक ने उन्हें कुचल दिया। गंभीर हादसे में टीआई दिलीप पुरी की मौत हो गई थी।इस घटना के बाद पुलिस ने शराब तस्करी में शामिल लोगों की तलाश शुरू की। जांच में सामने आया कि यह मामला केवल एक वाहन में अवैध शराब ले जाने तक सीमित नहीं था, बल्कि हरदा से इंदौर होते हुए गुजरात तक शराब की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय था।
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अब तक 13 आरोपी गिरफ्तार, कई अहम नाम सामने आए
टीआई हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस अब तक कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें वाहन चालक गजेंद्र रावत भी शामिल है, जिसे पुलिस ने अलीराजपुर से गिरफ्तार किया था।मामले में एक अन्य आरोपी धीरज ने देवास के बीएनपी थाने की पुलिस कस्टडी से भागने का प्रयास किया था। इस दौरान पुलिस ने उसका शॉर्ट एनकाउंटर किया था। इसके अलावा राहुल जायसवाल, विजय और केरम सिंह सहित अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है।पुलिस की जांच में शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर लगातार जानकारी जुटाई जा रही है।
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आरोपी के खुलासे के बाद वकील के दफ्तर पहुंची पुलिस
सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में से एक ने पूछताछ के दौरान बताया था कि इंदौर के कलेक्टर ऑफिस परिसर स्थित एक वकील के दफ्तर में कुछ दस्तावेज तैयार किए गए थे। इन दस्तावेजों के फर्जी होने की आशंका के बाद खातेगांव पुलिस ने उनकी जांच करने का फैसला लिया।इसके बाद एक महिला पुलिस अधिकारी अन्य पुलिसकर्मियों के साथ इंदौर पहुंची। स्थानीय पुलिस की मदद से टीम संबंधित वकील के दफ्तर गई और वहां करीब दो घंटे तक दस्तावेजों की पड़ताल की।पुलिस ने इस दौरान नोटरी रजिस्टर सहित कई रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई में करीब 12 घंटे की जांच प्रक्रिया शामिल रही।
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दस्तावेज असली या नकली, जांच के बाद खुलेगा राज
फिलहाल पुलिस की जांच का मुख्य केंद्र वकील के दफ्तर में तैयार किए गए दस्तावेज हैं। इनकी प्रमाणिकता की जांच की जाएगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि दस्तावेज किसके कहने पर तैयार किए गए थे और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होना था।जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि जब्त दस्तावेज वास्तव में फर्जी हैं या नहीं और टीआई दिलीप पुरी हत्याकांड में उनकी क्या भूमिका रही है। पुलिस इन रिकॉर्ड के आधार पर शराब तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।




















