Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

मेट्रो टनल के ऊपर बसे घर, नीचे दौड़ेगी ट्रेन! रहवासी बोले- पहले सुरक्षा की गारंटी दो

खजराना-एमजी रोड अंडरग्राउंड मेट्रो को लेकर तिलकनगर, साईनाथ कॉलोनी समेत आसपास के रहवासी चिंतित; मकानों की सुरक्षा और बोरवेल को लेकर लिखित गारंटी की मांग.
मेट्रो टनल के ऊपर बसे घर, नीचे दौड़ेगी ट्रेन! रहवासी बोले- पहले सुरक्षा की गारंटी दो
Ai Generated

संबंधित खबर: पेड़ों पर फिर हाईकोर्ट की ढाल! NGT की अनुमति पेश नहीं कर सका मेट्रो,लाखों परिंदों का आशियाना है मौजूद

इंदौर। खजराना से एमजी रोड के बीच प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन को लेकर आसपास की कॉलोनियों के रहवासियों की चिंता बढ़ गई है। क्षेत्र में करीब 5 हजार मकानों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन प्रारंभिक सर्वे में 170 मीटर के हिस्से में करीब 300 मकान ही चिन्हित हुए हैं। इसके साथ ही करीब 300 बोरवेल और अन्य भूमिगत जलस्रोतों पर भी असर पड़ने की आशंका है। हालांकि अंतिम संख्या सर्वे रिपोर्ट पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। खजराना से एमजी रोड को जोड़ने वाली मेट्रो परियोजना के कुछ हिस्से को एलिवेटेड की जगह अंडरग्राउंड करने का निर्णय लिया गया है। इसी हिस्से को लेकर तिलकनगर, साईनाथ कॉलोनी और आसपास की अन्य कॉलोनियों के रहवासियों ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनकी सबसे बड़ी चिंता पुराने मकानों की सुरक्षा को लेकर है।

संबंधित खबर: इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो की ‘भूमिगत’ तैयारी तेज! एयरपोर्ट से अगले हफ्ते TBM उतरेगी, 9 से 28 मीटर गहराई में बनेगी सुरंग

टनल खुदाई से मकानों में दरार का डर

रहवासियों का कहना है कि टनल निर्माण और भूमिगत खुदाई के दौरान यदि पुराने मकानों में दरारें आती हैं या किसी तरह का नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। उनका कहना है कि निर्माण शुरू होने से पहले प्रत्येक मकान की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जाए, ताकि बाद में नुकसान को लेकर विवाद न हो।

 संबंधित खबर: इंदौर मेट्रो अब रेडिसन तक दौड़ेगी, कल CM दिखाएंगे हरी झंडी; ₹20 से ₹80 तक हो सकता है किराया?

एक मकान-एक बोरवेल मानें तो 300 जलस्रोत

सर्वे में केवल मकानों की जानकारी ही नहीं, बल्कि बोरवेल और अन्य भूमिगत जलस्रोतों का भी रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है। यदि औसतन एक मकान में एक बोरवेल माना जाए तो प्रारंभिक तौर पर करीब 300 बोरवेल प्रभावित होने की संभावना बनती है। हालांकि वास्तविक संख्या सर्वे पूरा होने के बाद ही सामने आएगी। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि निर्माण के दौरान किसी जलस्रोत पर असर पड़ता है तो उसे दोबारा चालू कराने की जिम्मेदारी परियोजना की होगी।

संबंधित खबर: PU Special : गड्ढों में फंसा भोपाल-मेट्रो पिलर खड़े हुए तो सड़कें सिकुड़ गईं, जाम, धूल, जलभराव से जिंदगी हुई बेहाल

नुकसान हुआ तो भरपाई का भरोसा

मेट्रो अधिकारियों ने रहवासियों को आश्वस्त किया है कि निर्माण के दौरान किसी मकान को नुकसान पहुंचता है तो उसका आकलन कर नियमानुसार भरपाई की जाएगी। इसी तरह किसी के जलस्रोत में बाधा आने पर उसे भी पूर्व स्थिति में लाने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि रहवासी केवल मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। वे लिखित सुरक्षा गारंटी के साथ निर्माण से पहले मकानों और अन्य संपत्तियों की मौजूदा स्थिति का रिकॉर्ड तैयार कराने की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में नुकसान होने पर जिम्मेदारी तय करने में परेशानी न आए।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

Latest Posts