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सीहोर में रिहाइशी इलाके के कबाड़खाने में लगी भीषण आग, दो महीने में दूसरी घटना से रहवासियों में गुस्सा

सीहोर के कोतवाली चौराहे के पास कबाड़खाने में दूसरी बार आग लगी। लपटें मकान की छत तक पहुंचीं। रहवासियों ने प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया।
सीहोर में रिहाइशी इलाके के कबाड़खाने में लगी भीषण आग, दो महीने में दूसरी घटना से रहवासियों में गुस्सा

सीहोर। शहर के सबसे प्रमुख कोतवाली चौराहे पर रिहाइशी इलाके में संचालित कबाड़खाना एक बार फिर आगजनी की घटना के बाद चर्चा में आ गया। रविवार दोपहर करीब दो बजे कबाड़खाने में अचानक भीषण आग भड़क उठी। कबाड़ में मौजूद प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील सामग्री के कारण आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया। लपटें पास स्थित खाली मकान की छत तक पहुंच गईं।

दमकल की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। दो माह के भीतर दूसरी बार हुई घटना से क्षेत्र के रहवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों ने पुलिस और नगर पालिका प्रशासन पर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है।

दोपहर दो बजे अचानक भड़की आग

रविवार दोपहर करीब दो बजे कोतवाली चौराहे के पास मुख्य मार्ग से लगे कबाड़खाने में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। कबाड़ में प्लास्टिक सहित ज्वलनशील सामग्री होने के कारण लपटें तेजी से ऊपर उठने लगीं।

आसपास स्थित मकानों तक आग की तपिश महसूस होने लगी। आग की लपटें पास के खाली रिहाइशी मकान की छत तक पहुंच गईं। घटना के बाद आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर दमकल वाहन मौके पर पहुंचे और आग को फैलने से रोकने के लिए मशक्कत शुरू की।

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दो माह पहले भी तीन वाहन हुए थे खाक

स्थानीय रहवासियों के अनुसार इसी कबाड़खाने में करीब दो माह पहले भी भीषण आग लगी थी। उस घटना में मौके पर खड़े तीन वाहन पूरी तरह जलकर खाक हो गए थे। उस समय भी आग की लपटों से आसपास के मकानों और दुकानों को खतरा पैदा हो गया था।

बार-बार आग लगने की घटनाओं से लोगों की चिंता बढ़ गई है। रहवासियों का कहना है कि पिछली घटना के बाद भी कबाड़खाने को हटाने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से लिखित शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

किराए का लालच, लोगों की जान जोखिम में

मोहल्ले के लोगों ने मकान मालिक पर अधिक किराए के लालच में आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में ज्वलनशील सामग्री का भंडारण किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।

जिस मकान में आग की लपटें पहुंचीं, वहां पहले किराएदार रहते थे, लेकिन सुरक्षा की चिंता के चलते उन्होंने मकान खाली कर दिया। रहवासियों का दावा है कि कबाड़खाने के कारण आसपास के परिवारों में लगातार डर बना रहता है। जहरीले धुएं और आगजनी की आशंका के चलते लोग घर और दुकानें छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।

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दस मिनट की देरी से हो जाता ज्यादा नुकसान

स्थानीय लोगों के मुताबिक आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि दमकल की टीम समय पर नहीं पहुंचती तो बड़ा नुकसान हो सकता था। रहवासियों का कहना है कि दमकल वाहन पहुंचने में दस मिनट की भी देरी होती तो आसपास की कई दुकानें और मकान आग की चपेट में आ सकते थे। समय रहते आग पर नियंत्रण होने से बड़ा हादसा टल गया।

थाने के नजदीक कारोबार होने पर सवाल

रहवासियों ने सवाल उठाया कि शहर के प्रमुख चौराहे और कोतवाली के नजदीक रिहाइशी क्षेत्र में इस तरह कबाड़ का कारोबार कैसे संचालित हो रहा है। लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत और आगजनी के बाद भी जिम्मेदार विभागों ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कबाड़खाना हटाकर जिम्मेदारों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

सुनील शर्मा, सीहोर जिला ब्यूरो, पीपुल्स समाचार ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक भास्कर, पत...

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