254 गांव, 1017 वर्ग किमी क्षेत्र और 15 मंजिल... ऐसा होगा 2047 का नया भोपाल

भोपाल के मास्टर प्लान-2047 में 254 गांव और 1017 वर्ग किमी क्षेत्र शामिल होंगे। मेट्रो कॉरिडोर के आसपास 15 मंजिल तक निर्माण, चार नए व्यावसायिक केंद्र और सड़कों की चौड़ाई के अनुसार कारोबार के नियम प्रस्तावित हैं। अब चुनौती झीलों, कैचमेंट, हरियाली और प्राकृतिक नालों को बचाते हुए शहर का व्यवस्थित और सस्टेनेबल विकास सुनिश्चित करने की है।
254 गांव, 1017 वर्ग किमी क्षेत्र और 15 मंजिल... ऐसा होगा 2047 का नया भोपाल
भोपाल के मास्टर प्लान-2047 में 254 गांव और 1017 वर्ग किमी क्षेत्र शामिल होंगे।

भोपाल में अब घर के नीचे दुकान और मोहल्ले की सड़क पर बाजार वाला दौर बदलने की तैयारी है। 2047 का नया मास्टर प्लान शहर के फैलाव के साथ यह भी तय करेगा कि कहां घर होंगे, कहां कारोबार और किस सड़क पर कितना निर्माण। करीब 1017 वर्ग किमी क्षेत्र और 254 गांवों को समेटने वाले इस प्लान में मेट्रो के आसपास 15 मंजिल तक इमारतें, चार नए व्यावसायिक केंद्र और सड़क की चौड़ाई के हिसाब से व्यावसायिक गतिविधियों के नियम प्रस्तावित हैं। यानी अगले 20 साल का भोपाल सिर्फ नक्शे पर नहीं, सड़क से लेकर आसमान तक नए सिरे से आकार लेगा। लेकिन इस बार चुनौती सिर्फ शहर को फैलाने की नहीं, बल्कि यह तय करने की भी है कि बढ़ता भोपाल अपनी झीलों, हरियाली, प्राकृतिक नालों और खुले इलाकों को बचाते हुए कितना बेहतर और व्यवस्थित शहर बन पाता है।

18 मीटर से छोटी सड़क पर कारोबार नहीं

मास्टर प्लान-2047 में सड़कों की चौड़ाई को व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रस्ताव है। 18 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर कारोबार की अनुमति नहीं होगी, जबकि 18 से 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर शर्तों के साथ मिश्रित भू-उपयोग की अनुमति दी जा सकती है। इसका सीधा असर उन इलाकों पर पड़ेगा, जहां घरों के बीच दुकान, कार्यालय, कोचिंग, क्लीनिक, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। यानी आगे सिर्फ जमीन का उपयोग नहीं, सड़क की क्षमता भी कारोबार तय करेगी।

मेट्रो के आसपास ऊंचाई बढ़ेगी, बोझ भी

मेट्रो कॉरिडोर के आसपास 15 मंजिल तक भवनों का प्रस्ताव है। मकसद सार्वजनिक परिवहन के आसपास आबादी और गतिविधियों को केंद्रित करना है, ताकि निजी वाहनों का दबाव घटे। लेकिन ऊंची इमारतों के साथ पानी, सीवर, बिजली, पार्किंग, अग्निशमन और सड़क क्षमता भी बढ़ानी होगी। सिर्फ मंजिल बढ़ाने से यातायात और पार्किंग की समस्या बढ़ सकती है।

चार नए व्यावसायिक केंद्र, पुराने शहर का दबाव घटेगा

मास्टर प्लान में चार नए व्यावसायिक केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे पुराने और भीड़भाड़ वाले बाजारों का दबाव कम किया जा सकता है। इन केंद्रों के लिए सार्वजनिक परिवहन, चौड़ी सड़कें, पार्किंग और पैदल सुविधाएं पहले विकसित करना जरूरी होगा।

254 गांवों का भविष्य नक्शे से तय होगा

254 गांवों को नियोजन क्षेत्र में शामिल करने का प्रस्ताव है। इससे अनियोजित कॉलोनियों और बेतरतीब निर्माण पर रोक का मौका मिलेगा। लेकिन गांवों के लिए सड़क, जल निकासी, पेयजल, सीवर, परिवहन, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं और खुले स्थान पहले तय करने होंगे। वरना आज का गांव कल अव्यवस्थित शहर बन सकता है।

खेती की जमीन पर विकास, लेकिन सावधानी जरूरी

कृषि क्षेत्र में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और गोदाम जैसी गतिविधियों को प्रक्रिया के तहत अनुमति देने का प्रस्ताव है। इससे बाहरी क्षेत्रों में सुविधाएं पहुंच सकती हैं, लेकिन कृषि भूमि के तेजी से गैर-कृषि उपयोग का खतरा भी रहेगा। इसलिए स्पष्ट सीमा, पर्यावरणीय जांच और जल निकासी जरूरी होगी।

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जोनल प्लान के बिना अधूरा रहेगा मास्टर प्लान

मास्टर प्लान शहर की बड़ी तस्वीर देता है, जबकि जोनल प्लान इलाके की बारीक योजना तय करता है। सड़क, बाजार, आवासीय क्षेत्र, पार्क, स्कूल, अस्पताल, पार्किंग और सार्वजनिक सुविधाएं। अधिनियम की धारा 20 के तहत जोनल प्लान की जिम्मेदारी स्थानीय निकाय की है। भोपाल में स्थानीय निकाय के पास पर्याप्त अमला नहीं होने से सलाहकारों के जरिए इन्हें तैयार कराने की व्यवस्था बताई गई है। इसलिए 2047 की सफलता नए नक्शे के साथ समयबद्ध जोनल प्लान और उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

आबादी, रोजगार और निवेश पर हो फोकस

भावी आबादी, रोजगार और निवेश के अनुरूप पर्याप्त विकास योग्य भूमि उपलब्ध हो तथा मिश्रित भू-उपयोग और व्यावहारिक एफएआर का प्रावधान हो। दूसरा, झीलों, पहाड़ियों, जंगलों और जलग्रहण क्षेत्रों का वैज्ञानिक संरक्षण किया जाए। तीसरा, मास्टर प्लान के साथ जोनल प्लान, आधारभूत ढांचा, वित्तीय व्यवस्था और समयबद्ध क्रियान्वयन कार्यक्रम भी घोषित हो। केवल भू-उपयोग का नक्शा शहर की जरूरत पूरी नहीं करता।

सस्टेनेबल विकास ही 2047 के भोपाल की असली जरूरत

मास्टर प्लान-2047 में शहर का विस्तार हो, लेकिन सस्टेनेबल विकास की शर्त के साथ। झील, कैचमेंट, प्राकृतिक नाले और हरित क्षेत्र सुरक्षित रखे बिना भोपाल का विकास अधूरा रहेगा। मेट्रो के आसपास ऊंची इमारतों के साथ पानी, सीवर, सड़क और पार्किंग की क्षमता बढ़ाना जरूरी है। मास्टर प्लान ऐसा हो, जिसमें विकास की सीमा प्रकृति तय करे और सुविधाएं विकास की गति तय करें। तभी 2047 का भोपाल बड़ा ही नहीं, सुरक्षित और रहने लायक भी बनेगा।

झील, कैचमेंट और नालों को पहले जगह

भोपाल की पहचान झीलों, पहाड़ियों, हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक जल निकासी तंत्र से है। इसलिए 2047 में विकास की सीमा तय करते समय बड़ी-छोटी झीलें, तालाब, कैचमेंट, प्राकृतिक नाले, हरित क्षेत्र और जलभराव वाले इलाके केंद्र में होने चाहिए। जहां प्राकृतिक पानी बहता है, वहां निर्माण से पहले संरक्षण और जल निकासी को प्राथमिकता देनी होगी।

अब सवाल एक ही-भोपाल सिर्फ बड़ा होगा या बेहतर भी?

पिछले तीन दशकों का सबक साफ है। नक्शा बनना पर्याप्त नहीं। समय पर जोनल प्लान, सख्त भू-उपयोग नियंत्रण, सड़क के हिसाब से निर्माण, पार्किंग, जल निकासी, झील-कैचमेंट संरक्षण और सार्वजनिक परिवहन जमीन पर उतारना होगा। 2047 का भोपाल ऊंची इमारतों और नई कॉलोनियों से नहीं, बल्कि नियोजित, सुरक्षित, हरित और रहने लायक शहर से पहचाना जाना चाहिए।

नितिन सक्सेना, एक्टीविस्ट

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...Read More

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