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इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो की ‘भूमिगत’ तैयारी तेज! एयरपोर्ट से अगले हफ्ते TBM उतरेगी, 9 से 28 मीटर गहराई में बनेगी सुरंग

नागरिकों के विरोध और आशंकाओं के बीच एयरपोर्ट से अंडरग्राउंड मेट्रो का काम शुरू करने की तैयारी, 9 से 28 मीटर गहराई में TBM से बनेगी सुरंग; 30 मीटर दायरे के भवनों पर सेंसर से रहेगी नजर
इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो की ‘भूमिगत’ तैयारी तेज! एयरपोर्ट से अगले हफ्ते TBM उतरेगी, 9 से 28 मीटर गहराई में बनेगी सुरंग
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इंदौर। इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो रूट के निर्माण को लेकर चल रहा विरोध अब प्रशासन और मेट्रो अधिकारियों के सामने बड़ी चुनौती बन गया है। नागरिकों की ओर से मकानों और बोरिंग को नुकसान की आशंका जताए जाने के बीच मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने स्पष्ट किया है कि सुरंग निर्माण पूरी तरह वैज्ञानिक तकनीक और निर्धारित सुरक्षा मानकों के तहत किया जाएगा। संभावित तौर पर अगले सप्ताह एयरपोर्ट की तरफ से अंडरग्राउंड रूट का काम शुरू हो जाएगा।इसके लिए थाईलैंड से लाई गई टनल बोरिंग मशीन (TBM) को असेंबल कर सॉफ्ट लॉन्चिंग की तैयारी पूरी कर ली गई है। मशीन जमीन की सतह से करीब 9 से 28 मीटर नीचे सुरंग बनाएगी। TBM के आसपास करीब 30 मीटर के दायरे में आने वाले भवनों और जमीन की स्थिति पर सेंसर के जरिए लगातार नजर रखी जाएगी। किसी भी मामूली बदलाव का संकेत मिलने पर विशेषज्ञ तत्काल आवश्यक कदम उठा सकेंगे।

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विरोध के बीच मेट्रो की समझाइश

अंडरग्राउंड रूट को लेकर शुरुआत में एयरपोर्ट क्षेत्र के नागरिकों ने विरोध किया था और मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा। इसके बाद खजराना से बंगाली चौराहा, पलासिया और आगे प्रस्तावित भूमिगत रूट को लेकर भी रहवासियों ने चिंता जताई। तिलक नगर, गोयल नगर सहित आसपास की कॉलोनियों के लोगों को आशंका है कि सुरंग निर्माण से उनके मकानों और बोरिंग पर असर पड़ सकता है।विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी नागरिकों से चर्चा कर उनकी चिंताओं का समाधान करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने मेट्रो अधिकारियों को लोगों के सवालों का जवाब देने और उनकी आशंकाएं दूर करने के निर्देश दिए हैं।

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5.8 मीटर व्यास की सुरंग, अंदर लगेंगी RCC रिंग्स

मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के मुताबिक इंदौर में पहली बार टनल बोरिंग मशीन के जरिए भूमिगत मेट्रो सुरंग बनाई जाएगी। इसके लिए मिक्स्ड फेस शील्ड TBM तकनीक का इस्तेमाल होगा। करीब 5.8 मीटर व्यास वाली सुरंग जमीन के नीचे 9 से 28 मीटर की गहराई में बनाई जाएगी।TBM जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, उसी के साथ सुरंग के भीतर प्रीकास्ट RCC रिंग्स लगाई जाएंगी। इससे सुरंग की संरचनात्मक मजबूती और स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भूमिगत मेट्रो निर्माण के दौरान सतह पर गतिविधियों को न्यूनतम प्रभावित रखना प्राथमिकता होगी।

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निर्माण से पहले भवनों का होगा सर्वे

मेट्रो निर्माण क्षेत्र के आसपास करीब 30 मीटर के दायरे में आने वाले भवनों का स्थिति सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसके अलावा जमीन और आसपास की संरचनाओं पर लगातार नजर रखने के लिए इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम तैयार किया गया है।सेंसर के जरिए जमीन या भवनों में होने वाले बेहद मामूली बदलाव की भी जानकारी विशेषज्ञों तक पहुंचेगी। इससे निर्माण के दौरान आमजन की सुरक्षा, भवनों की संरचनात्मक स्थिति और जमीन की स्थिरता पर लगातार निगरानी रखी जा सकेगी।

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दिल्ली से बेंगलुरु तक अपनाई जा चुकी तकनीक

अधिकारियों का कहना है कि TBM तकनीक दुनिया में भूमिगत मेट्रो निर्माण की तेज और प्रभावी तकनीकों में शामिल है। दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और लखनऊ जैसे शहरों में घनी आबादी के बीच भूमिगत मेट्रो सुरंगों का निर्माण इसी तरह की तकनीकों से किया गया है।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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