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PU Special :भोपाल में मेट्रो पिलर की खामियों पर पर्दा, सेंटरिंग खुलते ही दिखे सरियों पर बोरे डाले

भोपाल के बैरसिया रोड काजीकैंप में रिलायंस पेट्रोल पंप के पास ऑरेंज लाइन के एक मेट्रो पिलर में सेंटरिंग हटने के बाद गड्ढे में सरियों का जाल दिखाई दिया। इसे प्लास्टर से ढककर बोरे लपेट दिए गए।
भोपाल में मेट्रो पिलर की खामियों पर पर्दा, सेंटरिंग खुलते ही दिखे सरियों पर बोरे डाले
भाेपाल। मेट्रो पिलर पर सरिए दिखने पर इस तरह ढक दिया गया है।

शाहिद खान, भोपाल। मेट्रो का पिलर सिर्फ कॉन्क्रीट का खंभा नहीं, बल्कि पूरे कॉरिडोर का भार उठाने वाली संरचना है। ऐसे इसमें छोटी से छोटी खामी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन बैरसिया रोड काजीकैंप में रिलायंस पेट्रोलपंप के पास ऑरेंज लाइन के मेट्रो पिलर पर दिख रहे सरियों के जाल को अनदेखा कर दिया गया। दरअसल जब पिलर ढालने के बाद सेंटरिंग खोली गई तो उसके एक हिस्से में गड्ढा था जिसमें सरिए का जाल नजर आ रहा था। जिसे आनन-फानन में प्लास्टर कर बंद कर दिया गया और बोरे लपेट दिए गए। हालांकि तब तक यह सोशल मीडिया पर सुर्खियां बन चुका था।

एक्सपर्ट व्यू 

1. सरिया दिखा तो अब क्या होना चाहिए

सिविल इंजीनियर ताबिश सिद्दीकी बताते हैं कि ऐसे पिलर पर सीधे प्लास्टर करना समाधान नहीं है। पहले यह पता लगना चाहिए कि कान्क्रीट कितनी गहराई तक कमजोर है और सरिया कितना खुला है। पिलर की सतह की जांच, कान्क्रीट की मजबूती और जरूरत के अनुसार गैर-विनाशकारी परीक्षण (पिलर को बिना तोड़े) कराए जाने चाहिए। इसके बाद विशेषज्ञ तय करें कि सतही मरम्मत पर्याप्त है या खराब कंक्रीट हटाकर विशेष उपचार करना होगा। मरम्मत के बाद दोबारा गुणवत्ता जांच और उसका रिकॉर्ड भी जरूरी है।

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2. आज की खामी, कल की परेशानी

पीडब्ल्यूडी के रिटायर इंजीनियर सलिल मेहता ने बताया कि सरिया पर्याप्त कान्क्रीट कवर में नहीं रहा तो नमी के संपर्क में आने से समय के साथ जंग लग सकती है। जंग से सरिये का फैलाव कान्क्रीट में दरार और टूट-फूट पैदा कर सकता है। इससे संरचना की टिकाऊ क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पिलर असुरक्षित है, लेकिन सरिया दिखाई देना सामान्य स्थिति भी नहीं है। इसका वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी होता है।

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कोई कमी सामने आती है तो उसे ठीक कराया जाता है

मेट्रो निर्माण के लिए निर्धारित मानकों और तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है। निर्माण कार्य थ्री-लेयर सेफ्टी और गुणवत्ता जांच के तहत होता है। पिलर की ढलाई से पहले सरियों की स्थिति, कवर, सेंटिंग, कान्क्रीट और अन्य तकनीकी मानकों की अलग-अलग स्तर पर जांच की जाती है। सभी स्तरों पर सब कुछ निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाने के बाद ही ढलाई और आगे का काम शुरू किया जाता है। निर्माण के बाद भी गुणवत्ता की जांच की जाती है। यदि कहीं कोई कमी सामने आती है तो उसे तकनीकी प्रक्रिया के तहत ठीक कराया जाता है।

-एस. कृष्ण चैतन्य, एमडी, एमपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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