रायपुर में प्रदर्शन करने पर लगेगा टैक्स, संगठनों ने कहा- आवाज दबाने की साजिश

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नगर निगम ने सार्वजनिक स्थानों पर धरना-प्रदर्शन और पंडाल लगाने पर शुल्क लगाने का फैसला किया है। इस नए नियम के तहत अब प्रदर्शन करने के लिए आयोजकों को शुल्क देना होगा। अगर पंडाल भी लगाना है तो प्रति वर्ग फुट का शुल्क निर्धारित किया गया है। निगम के इस निर्णय का कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। जिसे वे लोकतंत्र की हत्या और लोगों की आवाज दबाने की साजिश बता रहे हैं।
शुल्क क्यों लगाया गया?
दरअसल, महापौर मीनल चौबे के अनुसार यह शुल्क इसलिए लगाया गया है ताकि प्रदर्शनों के दौरान नगर निगम को साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च की भरपाई की जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला राज्य शासन के निर्देश के तहत लिया गया है। जिसके तहत ऐसी गतिविधियों के लिए विशेष नियम बनाए जाने थे। महापौर ने यह भी कहा कि शुल्क लेने से प्रदर्शन के रूट और उसके बाद की सफाई व्यवस्था पर ध्यान देना आसान होगा।
प्रदर्शन स्थलों पर भी सख्ती
इस बीच नवा रायपुर (अटल नगर) में भी रखरखाव कार्य के कारण अगले दो महीने तक धरना-प्रदर्शन पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। जिला प्रशासन ने इस दौरान किसी अन्य वैकल्पिक स्थल पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। नया रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर पहले से ही प्रदर्शन पर रोक है।
संगठनों का कड़ा विरोध
नगर निगम के इस फैसले पर किसान नेता तेजराम विद्रोही सहित कई संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि इस तरह से टैक्स लगाना लोगों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोकेगा और यह उग्र आंदोलन को जन्म दे सकता है। संगठनों ने प्रशासन से इस अलोकतांत्रिक फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
आने वाले दिनों में बढ़ सकता है शुल्क
वर्तमान में यह शुल्क 500 रुपए रखा गया है। लेकिन जानकारी के अनुसार आने वाले दिनों में इसे बढ़ाकर 1000 रुपए तक किया जा सकता है। वहीं पंडाल लगाने के लिए 5 रुपए प्रति वर्ग फुट देना होगा। यह प्रस्ताव निगम की सामान्य सभा में सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है।





















