Naresh Bhagoria
11 Jan 2026
Naresh Bhagoria
11 Jan 2026
Naresh Bhagoria
11 Jan 2026
Naresh Bhagoria
11 Jan 2026
इंदौर। शहर में प्रतिबंधित चाइनीज मांझा अब सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि खुली मौत का ऐलान बन चुका है। मूसाखेड़ी क्षेत्र में 20 वर्षीय युवराज गुर्जर, निवासी मयूर नगर (शीतलामाता मंदिर के सामने), अपनी बाइक से गुजर रहा था। सड़क पर लटका चाइनीज मांझा अचानक उसके गले में फंस गया। बाइक की रफ्तार के साथ मांझा ब्लेड की तरह गले को चीरता चला गया। युवराज लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे संभाला और तुरंत अस्पताल पहुंचाया।
जुपिटर हॉस्पिटल के ICU में भर्ती
युवराज को विशेष जुपिटर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार गले पर गहरा और गंभीर घाव है। अत्यधिक रक्तस्राव हुआ है, हालत नाजुक बनी हुई है। उसे ICU में रखकर लगातार निगरानी की जा रही है।
सपना-संगीता रोड पर छात्र भी बना शिकार
इसी तरह सपना-संगीता रोड पर नीट की तैयारी कर रहे नरेंद्र जामोद भी चाइनीज मांझे की चपेट में आ गए। दोस्त अनिल चौहान के साथ बाइक से लौटते समय मांझा गले में फंस गया। नरेंद्र मूल रूप से धार जिले के देहरी क्षेत्र का निवासी है और इंदौर में रहकर पढ़ाई कर रहा है। फिलहाल वह भी निजी अस्पताल के ICU में भर्ती है।
45 वर्षीय व्यक्ति की मौत
तिलक नगर थाना क्षेत्र में चाइनीज मांझे ने एक और जिंदगी निगल ली। 45 वर्षीय रघुवीर धाकड़ शकुंतला हॉस्पिटल के पास सड़क से गुजर रहे थे, तभी मांझा उनके गले में फंस गया। गंभीर हालत में उन्हें एमवाय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच
घटना की सूचना पर तिलक नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू की है।
दो दिन पहले भी हुआ था हादसा
धार रोड स्थित बियाबानी क्षेत्र में दो दिन पहले भी यही कहानी दोहराई गई। हार्डवेयर व्यापारी हुसैन भाई का चाइनीज मांझे से गला कट गया। बियाबानी पोस्ट ऑफिस के सामने हुए इस हादसे में काफी खून बहा। उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां गले पर टांके लगाए गए।
खुलेआम बिक रहा ‘खूनी मांझा’
मकर संक्रांति को देखते हुए प्रशासन ने चाइनीज मांझे की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है, लेकिन हकीकत यह है कि यह खूनी मांझा शहर की गलियों, चौक-चौराहों और बाजारों में खुलेआम बिक रहा है। न कोई डर, न कोई कार्रवाई।
सवालों के घेरे में प्रशासन
लगातार हो रही घटनाएं साफ बता रही हैं कि प्रशासन की सख्ती सिर्फ फाइलों और बैठकों तक सीमित है। सड़क पर आज भी हर बाइक सवार, पैदल यात्री और बच्चा इस अदृश्य मौत के फंदे के बीच चलने को मजबूर है।