🌤️
--Bhopal, India

डिजिटल अरेस्ट का सबसे खौफनाक मामला!17 दिन की ऑनलाइन कैद, NRI बुजुर्ग डॉक्टर दंपति से 15 करोड़ की ठगी

दिल्ली में साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर NRI बुजुर्ग डॉक्टर दंपति को 17 दिन तक वीडियो कॉल सर्विलांस में रखा। खुद को TRAI, ED और पुलिस अधिकारी बताकर ठगों ने गिरफ्तारी और मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाया। RBI से पैसा लौटाने का झांसा देकर 8 ट्रांजैक्शन में 14.85 करोड़ रुपए ठग लिए गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच IFSO को सौंपी है।
Follow on Google News
17 दिन की ऑनलाइन कैद, NRI बुजुर्ग डॉक्टर दंपति से 15 करोड़ की ठगी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में साइबर ठगों ने अब तक की सबसे संगठित और डरावनी ठगी को अंजाम दिया है। इस बार निशाने पर एक बुजुर्ग नॉन रेजिडेंट इंडियन (NRI) डॉक्टर दंपति रहे। जिन्हें 17 दिन तक तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में रखकर करीब 15 करोड़ रुपए की ठगी कर ली गई। ठगों ने खुद को TRAI, प्रवर्तन निदेशालय (ED), पुलिस और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा अधिकारी बताकर न सिर्फ कानून का डर दिखाया, बल्कि वीडियो कॉल के जरिए हर पल उनकी निगरानी भी की।

    कौन हैं पीड़ित डॉक्टर दंपति

    पीड़ितों की पहचान 77 वर्षीय डॉ. इंदिरा तनेजा और उनके पति डॉ. ओम तनेजा के रूप में हुई है। दोनों करीब 48 वर्षों तक अमेरिका में रहे और संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े रहे। रिटायरमेंट के बाद वर्ष 2015 में वे भारत लौटे और दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश-2 में रह रहे हैं। दोनों सामाजिक और चैरिटेबल गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं।

    24 दिसंबर की एक कॉल से शुरू हुआ डर का खेल

    पूरे मामले की शुरुआत 24 दिसंबर 2025 को हुई, जब डॉ. इंदिरा तनेजा के मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का अधिकारी बताया। कॉलर ने दावा किया कि, उनके मोबाइल नंबर से आपत्तिजनक कॉल की गई हैं और उनके नाम पर बैंक खातों में ब्लैक मनी पाई गई है। ठगों ने कहा कि, मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है और इसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है।

    Uploaded media

    ED, PMLA और नेशनल सिक्योरिटी का डर

    कुछ ही घंटों में ठगों ने बातचीत को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ दिया। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), गिरफ्तारी वारंट, सुप्रीम कोर्ट और जेल भेजने की धमकी दी गई। डॉक्टर दंपति को बताया गया कि, अगर उन्होंने किसी से बात की या जानकारी लीक की तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यहीं से शुरू हुआ तथाकथित डिजिटल अरेस्ट।

    17 दिन की डिजिटल कैद, हर कदम पर निगरानी

    24 दिसंबर से 10 जनवरी तक डॉक्टर दंपति लगातार वीडियो कॉल पर रहे। जब भी डॉ. इंदिरा घर से बाहर निकलतीं या बैंक जातीं, ठग उनके पति के फोन पर वीडियो कॉल चालू रखते थे ताकि वह किसी को कुछ बता न सकें। पीड़िता के मुताबिक, उन्हें यहां तक कहा गया था कि बच्चों से बात करते समय भी वीडियो कॉल चालू रहे।

    मुंबई न जा पाने पर बढ़ाया गया दबाव

    ठगों ने डॉक्टर दंपति को मुंबई में पेश होने को कहा। जब डॉ. इंदिरा ने बताया कि, उनके पति का ऑपरेशन हुआ है और वे यात्रा नहीं कर सकते, तो ठगों ने डिजिटल अरेस्ट लागू कर दिया। इसके बाद हर गतिविधि पर सख्त नजर रखी जाने लगी।

    बैंक से पैसे निकलवाने की पूरी स्क्रिप्ट

    ठगों ने पहले से पूरी स्क्रिप्ट तैयार कर रखी थी। बैंक जाने से पहले डॉ. इंदिरा को रटवाया जाता था कि-

    • बैंक मैनेजर पूछे तो क्या जवाब देना है
    • पैसे क्यों निकाले जा रहे हैं
    • निवेश, लोन या सामाजिक प्रोजेक्ट का बहाना कैसे बनाना है
    • बैंक स्टाफ के सवालों पर भी वही जवाब दिए गए, जो ठगों ने सिखाए थे।

    8 ट्रांजैक्शन में उड़ गए 14.85 करोड़

    17 दिनों के भीतर ठगों ने आठ अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराए।

    • कभी 2 करोड़
    • कभी 2.10 करोड़
    • कभी 1.99 करोड़

    इस तरह कुल 14 करोड़ 85 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए। हर बार ठग भरोसा दिलाते रहे कि, यह सिर्फ जांच प्रक्रिया है और RBI के जरिए पूरी रकम वापस मिल जाएगी।

    Uploaded media

    RBI रिफंड का झांसा

    ठगों ने कहा कि, पैसा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जरिए क्लियर होगा और दंपति को क्लीन चिट मिल जाएगी। यही भरोसा दिलाकर उन्हें लगातार पैसे ट्रांसफर करवाए गए।

    10 जनवरी को सामने आया सच

    10 जनवरी की सुबह ठगों ने डॉक्टर दंपति को स्थानीय पुलिस स्टेशन जाने को कहा। डॉ. इंदिरा वीडियो कॉल पर रहते हुए थाने पहुंचीं और ठगों की पुलिसकर्मियों से बात भी कराई गई। कॉल करने वाले पुलिस से भी बदतमीजी से पेश आए। यहीं पुलिस ने स्पष्ट किया कि, यह पूरा मामला साइबर ठगी है।

    पुलिस स्टेशन में डॉक्टर दंपति को पहली बार एहसास हुआ कि, वे 17 दिन तक एक सुनियोजित साइबर जाल में फंसे रहे। RBI से पैसे लौटाने का दावा पूरी तरह झूठा निकला।

    पीड़ितों का दर्द

    डॉ. इंदिरा तनेजा का कहना है कि, उन्होंने जो ड्रामा किया, वह बेहद भरोसेमंद लग रहा था। हमें लगा कि वे हमारी मदद कर रहे हैं।

    डॉ. ओम तनेजा ने बताया कि, हमें जेल भेजने की धमकी दी गई। वे हमारे बारे में सब जानते थे। हम डर गए और उनके वश में आ गए।

    दिल्ली पुलिस की कार्रवाई

    दिल्ली पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर ली है। जांच स्पेशल सेल की साइबर यूनिट IFSO (Intelligence Fusion and Strategic Operations) को सौंपी गई है। पुलिस अब मनी ट्रेल, फर्जी दस्तावेज, वीडियो कॉल सर्विलांस, डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।

    Uploaded media

    क्या है डिजिटल अरेस्ट

    डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि साइबर ठगों की बनाई गई एक मानसिक कैद है। इसमें-

    • वीडियो कॉल पर पुलिस स्टेशन जैसा बैकग्राउंड दिखाया जाता है।
    • पीड़ित की हर गतिविधि ऑनलाइन मॉनिटर की जाती है।
    • घर से बाहर निकलने और किसी से बात करने पर रोक लगाई जाती है।
    • बैंक अकाउंट सीज करने और गिरफ्तारी की धमकी दी जाती है।

    बुजुर्ग क्यों बनते हैं आसान शिकार

    साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खासतौर पर बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं। उनके पास जीवनभर की बचत होती है और वे आसानी से डर और भरोसे में आ जाते हैं। यह स्कैम पैसा ही नहीं, मानसिक शांति भी छीन लेता है।

    अगर कोई डिजिटल अरेस्ट करे तो क्या करें

    • बिल्कुल न डरें।
    • वीडियो कॉल तुरंत काटें।
    • नंबर ब्लॉक करें।
    • फोन स्विच ऑफ करें।
    • साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
    • cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें।

    यह भी पढ़ें: ये है रॉबिन हुड आर्मी... पांच साल से दे रहे नि:शुल्क शिक्षा, 100 बच्चों का स्कूलों में कराया दाखिला

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

    icon

    Latest Posts