Aakash Waghmare
11 Jan 2026
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में साइबर ठगों ने अब तक की सबसे संगठित और डरावनी ठगी को अंजाम दिया है। इस बार निशाने पर एक बुजुर्ग नॉन रेजिडेंट इंडियन (NRI) डॉक्टर दंपति रहे। जिन्हें 17 दिन तक तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में रखकर करीब 15 करोड़ रुपए की ठगी कर ली गई। ठगों ने खुद को TRAI, प्रवर्तन निदेशालय (ED), पुलिस और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा अधिकारी बताकर न सिर्फ कानून का डर दिखाया, बल्कि वीडियो कॉल के जरिए हर पल उनकी निगरानी भी की।
पीड़ितों की पहचान 77 वर्षीय डॉ. इंदिरा तनेजा और उनके पति डॉ. ओम तनेजा के रूप में हुई है। दोनों करीब 48 वर्षों तक अमेरिका में रहे और संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े रहे। रिटायरमेंट के बाद वर्ष 2015 में वे भारत लौटे और दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश-2 में रह रहे हैं। दोनों सामाजिक और चैरिटेबल गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं।
पूरे मामले की शुरुआत 24 दिसंबर 2025 को हुई, जब डॉ. इंदिरा तनेजा के मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का अधिकारी बताया। कॉलर ने दावा किया कि, उनके मोबाइल नंबर से आपत्तिजनक कॉल की गई हैं और उनके नाम पर बैंक खातों में ब्लैक मनी पाई गई है। ठगों ने कहा कि, मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है और इसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है।

कुछ ही घंटों में ठगों ने बातचीत को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ दिया। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), गिरफ्तारी वारंट, सुप्रीम कोर्ट और जेल भेजने की धमकी दी गई। डॉक्टर दंपति को बताया गया कि, अगर उन्होंने किसी से बात की या जानकारी लीक की तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यहीं से शुरू हुआ तथाकथित डिजिटल अरेस्ट।
24 दिसंबर से 10 जनवरी तक डॉक्टर दंपति लगातार वीडियो कॉल पर रहे। जब भी डॉ. इंदिरा घर से बाहर निकलतीं या बैंक जातीं, ठग उनके पति के फोन पर वीडियो कॉल चालू रखते थे ताकि वह किसी को कुछ बता न सकें। पीड़िता के मुताबिक, उन्हें यहां तक कहा गया था कि बच्चों से बात करते समय भी वीडियो कॉल चालू रहे।
ठगों ने डॉक्टर दंपति को मुंबई में पेश होने को कहा। जब डॉ. इंदिरा ने बताया कि, उनके पति का ऑपरेशन हुआ है और वे यात्रा नहीं कर सकते, तो ठगों ने डिजिटल अरेस्ट लागू कर दिया। इसके बाद हर गतिविधि पर सख्त नजर रखी जाने लगी।
ठगों ने पहले से पूरी स्क्रिप्ट तैयार कर रखी थी। बैंक जाने से पहले डॉ. इंदिरा को रटवाया जाता था कि-
17 दिनों के भीतर ठगों ने आठ अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराए।
इस तरह कुल 14 करोड़ 85 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए। हर बार ठग भरोसा दिलाते रहे कि, यह सिर्फ जांच प्रक्रिया है और RBI के जरिए पूरी रकम वापस मिल जाएगी।

ठगों ने कहा कि, पैसा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जरिए क्लियर होगा और दंपति को क्लीन चिट मिल जाएगी। यही भरोसा दिलाकर उन्हें लगातार पैसे ट्रांसफर करवाए गए।
10 जनवरी की सुबह ठगों ने डॉक्टर दंपति को स्थानीय पुलिस स्टेशन जाने को कहा। डॉ. इंदिरा वीडियो कॉल पर रहते हुए थाने पहुंचीं और ठगों की पुलिसकर्मियों से बात भी कराई गई। कॉल करने वाले पुलिस से भी बदतमीजी से पेश आए। यहीं पुलिस ने स्पष्ट किया कि, यह पूरा मामला साइबर ठगी है।
पुलिस स्टेशन में डॉक्टर दंपति को पहली बार एहसास हुआ कि, वे 17 दिन तक एक सुनियोजित साइबर जाल में फंसे रहे। RBI से पैसे लौटाने का दावा पूरी तरह झूठा निकला।
डॉ. इंदिरा तनेजा का कहना है कि, उन्होंने जो ड्रामा किया, वह बेहद भरोसेमंद लग रहा था। हमें लगा कि वे हमारी मदद कर रहे हैं।
डॉ. ओम तनेजा ने बताया कि, हमें जेल भेजने की धमकी दी गई। वे हमारे बारे में सब जानते थे। हम डर गए और उनके वश में आ गए।
दिल्ली पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर ली है। जांच स्पेशल सेल की साइबर यूनिट IFSO (Intelligence Fusion and Strategic Operations) को सौंपी गई है। पुलिस अब मनी ट्रेल, फर्जी दस्तावेज, वीडियो कॉल सर्विलांस, डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।

डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि साइबर ठगों की बनाई गई एक मानसिक कैद है। इसमें-
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खासतौर पर बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं। उनके पास जीवनभर की बचत होती है और वे आसानी से डर और भरोसे में आ जाते हैं। यह स्कैम पैसा ही नहीं, मानसिक शांति भी छीन लेता है।
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