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भोपाल में हिंदू एकता सम्मेलन :पीपुल्स मॉल में हुआ कार्यक्रम, वक्ता बोले- जिस देश का समाज संगठित होगा, दुनिया उसके पीछे चलेगी

क्ता बोले कि धर्म के साथ पांडव और श्रीकृष्ण और पांडव थे, अधर्म के साथ कौरव खड़े थे। दूसरी ओर वक्ताओं ने छत्रपति शिवाजी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी ने देश में हिंदुओं के मन में संगठन का भाव पैदा किया।
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पीपुल्स मॉल में हुआ कार्यक्रम, वक्ता बोले- जिस देश का समाज संगठित होगा, दुनिया उसके पीछे चलेगी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। राजधानी भोपाल में रविवार को हिंदू एकता पर विशेष सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम भोपाल स्थित पीपुल्स मॉल में आयोजित किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर अलग-अलग वक्ताओं ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने लोगों से समाज से संगठित होने पर विशेष जोर दिया, आगे वक्ता बोले कि जिस देश का समाज संगठित होगा दुनिया उसके पीछे चलेगी। 

    बता दें यह कार्यक्रम पीपुल्स मॉल के अंदर बने लाल किले पर आयोजित हुआ इसे हिंदू समाज को एकजुट करने के उद्देश्य से आयोजित किया। जिसमें राष्ट्रीय की भूमिका, लोगों के कर्तव्य के बारे में विशेष जोर दिया गया। साथ ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले विद्वानों पर विशेष प्रकाश डाला गया।

    धर्म के पांडव- श्रीकृष्ण, अधर्म के साथ कौरव

    अन्य भाषण में वक्ता बोले कि धर्म के साथ पांडव और श्रीकृष्ण और पांडव थे, अधर्म के साथ कौरव खड़े थे। दूसरी ओर वक्ताओं ने छत्रपति शिवाजी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी ने देश में हिंदुओं के मन में संगठन का भाव पैदा किया, जो वीरता की शोर्यता और पराक्रम की निशानी बनीं। इतना ही नहीं वे बोले कि आज हिंदुस्तान नहीं होता तो हो सकता है कि हम मुगलिस्तान में होते। 

    प्रोग्राम की प्रमुख बातें

    • बड़ी भागीदारी: सम्मेलन में विभिन्न सामाजिक संगठनों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने हिस्सा लिया। आयोजन स्थल पर उत्साहपूर्ण माहौल नजर आया।

    • एकता पर जोर: वक्ताओं ने कहा कि समाज की मजबूती का आधार आपसी एकता और संगठन है। जब समाज संगठित होता है, तभी वह अपनी पहचान और अधिकारों की रक्षा कर सकता है।

    • राष्ट्र निर्माण में भूमिका: वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि जिस देश का समाज संगठित होता है, दुनिया उसी देश का अनुसरण करती है। संगठित समाज राष्ट्र को वैश्विक मंच पर मजबूत बनाता है।

    • सांस्कृतिक चेतना का आह्वान: सम्मेलन में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को बचाए रखने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

    • सकारात्मक संदेश: कार्यक्रम के दौरान समाज में आपसी सद्भाव, सहयोग और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।

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    कई महिलाओं ने लिया हिस्सा

    हिंदू एकता के कार्यक्रम में शहर के कई इलाके की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। साथ ही उनके बच्चे भी दिखे। जहां कुछ महिलाएं मंच के पास बैठी नजर आई तो वहीं अन्य महिलाएं कुर्सी पर नजर आई, इसके अलावा पुरुषों ने भी प्रोग्राम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, रविवार को हुए कार्यक्रम को लोगों ने काफी ध्यानपूर्वक सुना। 

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    इस दौरान भाषण देने आई एक महिला वक्ता ने कहा कि आज की माताएं भी लोरी सुनाती है। इस दौरान उन्होंने बताया कि माताएं बच्चों को झूला झूलाते समय...कौआ मामा आएगा, बिल्ला मौसी आएगी जैसी लोरियां सुनाती है। इस पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस बच्चों के मामा कौआ हो, जिसकी मोसी बिल्ली हो क्या वे बच्चे शेर को कभी पकड़ पाएंगे। 

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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