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अंबिकापुर में जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित छत्तीसगढ़ी काष्ठ कलाकार पंडी राम मंडावी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि बस्तर नक्सली मुक्त होने के बाद अब क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करना जरूरी है।
68 वर्षीय पंडी राम मंडावी ने 12-16 साल की उम्र में अपने पूर्वजों से बस्तर की पारंपरिक काष्ठ कला सीखना शुरू किया। उन्होंने लकड़ी पर उकेरी चित्रकारी, मूर्तियां और अन्य शिल्पकृतियां बनाकर बस्तर की कला को नई ऊँचाई तक पहुँचाया। उनकी मेहनत और कला के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
पंडी राम मंडावी ने अपनी काष्ठ कला का प्रदर्शन 8 से अधिक देशों में किया है। उन्होंने अलग-अलग वर्कशॉप और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए 1000 से अधिक कारीगरों को कला सिखाई और इस परंपरा को नई पीढ़ियों तक पहुँचाने का काम किया।
पंडी राम मंडावी ने कहा कि अब बस्तर में यह कला खतरे में है। उनके द्वारा बनाई गई कलाकृतियों को सही बाजार नहीं मिल रहा, जिससे युवा इस कला को सीखने में रुचि नहीं ले रहे हैं। बाजार न मिलने की वजह से आय नहीं हो रही है और अगर यही हाल रहा तो बस्तर की यह काष्ठ कला आने वाले समय में विलुप्त हो सकती है।

सरकार से उन्हें 10 लाख रुपए की सहायता मिली है। इस मदद से वे शेड बनाकर युवाओं को प्रशिक्षण देंगे और बस्तर की काष्ठ कला को जीवित रखने का प्रयास करेंगे।
पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद पंडी राम मंडावी को कई सरकारी आयोजनों में आमंत्रित किया जाता है। वे जापान सहित कई राज्यों में जाकर युवाओं को अपनी खास काष्ठ और मूर्ति कला की ट्रेनिंग दे चुके हैं। इस तरह वे एक सांस्कृतिक दूत के रूप में बस्तर की कला को देश और दुनिया तक पहुँचाने का काम कर रहे हैं।