Naresh Bhagoria
11 Jan 2026
Naresh Bhagoria
11 Jan 2026
Naresh Bhagoria
11 Jan 2026
संतोष चौधरी, भोपाल। सुरक्षित नौकरी, तय वेतन, अधिकांश युवाओं के सपने यहीं तक सिमट जाते हैं। लेकिन, प्रदेश के कुछ युवाओं ने इस तयशुदा राह को छोड़कर जोखिम का रास्ता चुना। राजधानी के रवींद्र भवन में शुरू हुई दो दिवसीय मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट-2026 में पहुंचे ऐसे ही युवाओं की कहानियां बताती हैं कि हौसला बड़ा हो, तो अस्थिरता भी अवसर बन जाती है। प्रदेशभर से आए युवाओं में बड़ी समानता यही है कि इन्होंने अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर अपने विचारों पर भरोसा किया। आज ये युवा न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार और समाधान तैयार कर रहे हैं। इन युवाओं की कहानियां बताती हैं कि नौकरी छोड़ना अंत नहीं, शुरुआत हो सकती है। पीपुल्स समाचार ने ऐसे ही कुछ युवाओं से चर्चा की...

भोपाल की कशिश सोनारे और उनके साथी वीरेंद्र मेहरा और भारत कुशवाह के साथ आईटी सेक्टर की नौकरी छोड़कर मार्च 2025 में डिजिटल टिफिन सर्विस प्लेटफॉर्म 'अपनी थाली' शुरू किया। पहले दिन सिर्फ 4 बुकिंग मिलीं, लेकिन आज रोजाना 250 से ज्यादा लोग उनकी सेवा ले रहे हैं। उनका लक्ष्य रोजाना 1000 लोगों से तक टिफिन पहुंचाना है।

इंदौर के चंद्रकांत धाकड़ ने बीज कंपनी की नौकरी छोड़कर जून 2024 में स्टार्टअप 'थ्रू जीन सीड' की शुरुआत की। कृषि परिवार से जुड़े होने से उन्होंने किसानों की समस्याओं को समझा और उन्हें समाधान में बदला। 10 लाख रुपए की पूंजी से शुरू यह स्टार्टअप महज 18 महीनों में 1.08 करोड़ रुपए के टर्नओवर तक पहुंच गया है। इस उपलब्धि के लिए उन्हें समिट में बेस्ट यंग स्टार्टअप अवॉर्ड दिया जाएगा। यह अवॉर्ड उन्हें मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव सोमवार को देंगे।

भोपाल के डॉ. पंकज सिंह ने मरीजों की परेशानी कम करने के लिए 'क्यूरो टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट' नाम का मेडिकल सोशल प्लेटफॉर्म शुरू किया। आज उनकी 11 सदस्यीय टीम भोपाल में अस्पतालों, क्लीनिकों से जुड़कर सेवाएं दे रही है।

इंदौर के अंकित सेन ने एचआर की नौकरी छोड़कर महिलाओं के लिए विशेष राइड सर्विस 'गो नारी' शुरू की। इसमें राइडर भी महिलाएं ही हैं। अभी ट्रायल फेज में रोजाना 100 महिलाएं इस सेवा का उपयोग कर रही हैं, लक्ष्य रोज एक हजार राइड का है।

आगर जिले के दुर्गेश सिंह चौहान ने अपने जिले की पहचान बने संतरे को अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का सपना देखा। 20 लाख रुपए की पूंजी से शुरू हुआ उनका स्टार्टअप अब जापान, कोरिया और एशियाई देशों की ओर बढ़ रहा है। उनका लक्ष्य अगले 10 वर्षों में 100 करोड़ रुपए का कारोबार खड़ा करना है।