Aniruddh Singh
11 Jan 2026
मुंबई। साल 2025 भारतीय और वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए बेहद दिलचस्प साबित हो रहा है। इस साल अब तक सबसे बड़ी तेजी कमोडिटी मार्केट में देखने को मिली है, खासतौर पर कीमती धातुओं ने अच्छी बढ़त हासिल की है। चांदी ने इस साल 59% की जबरदस्त बढ़त दर्ज की है, जबकि सोने में भी 47% का उछाल देखने को मिली है। इसके विपरीत, भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख इंडेक्स निफ्टी अब तक सिर्फ 4% ही ऊपर चढ़ पाया है। इस असमान गति को देखते हुए निवेशक और विश्लेषक फिलहाल असमंजस में हैं। इतिहास पर नजर डालें तो देखा जा सकता है कि जब अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक जोखिमभरे शेयर बाजार से निकलकर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों में निवेश करते हैं। अभी वैश्विक स्तर पर कई ऐसे कारक सक्रिय हैं जो इस बदलाव को तेज कर सकते हैं।
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अमेरिका और यूरोप में आर्थिक मंदी का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और अन्य केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती की दिशा में जा रहे हैं। ब्याज दरें कम होने से डॉलर कमजोर पड़ता है और निवेशक सोने व चांदी जैसे विकल्पों की ओर बढ़ते हैं। यही वजह है कि इन धातुओं में इतनी जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। चांदी की कीमतों में 59% का उछाल यह संकेत देता है कि निवेशक सिर्फ सुरक्षित संपत्तियों की तलाश नहीं कर रहे, बल्कि औद्योगिक मांग भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रही है। चांदी का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है। जैसे-जैसे हरित ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्र में निवेश बढ़ रहा है, चांदी की मांग में तेजी आ रही है।
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सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए जब भी भू-राजनीतिक तनाव या आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक उसमें निवेश करते हैं। 2025 में कई बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम हुए हैं, जैसे अमेरिका-चीन व्यापार तनाव, मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और यूरोप में आर्थिक संकट, जिन्होंने सोने को और आकर्षक बना दिया है। निफ्टी का मात्र 4% की बढ़त दर्ज करना यह दर्शाता है कि शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा कुछ कमजोर पड़ा है। कंपनियों के तिमाही नतीजों में सुस्ती, विदेशी निवेशकों का सतर्क रुख और घरेलू मांग में हल्की गिरावट इसकी प्रमुख वजहें हैं। हालाँकि भारतीय अर्थव्यवस्था की लंबी अवधि की स्थिति मजबूत बनी हुई है, लेकिन अल्पकाल में निवेशक कम जोखिम वाले विकल्पों की ओर झुक रहे हैं।
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विश्लेषकों का मानना है कि यदि सोने और चांदी की यह तेजी इसी तरह जारी रहती है और निफ्टी की गति धीमी बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। इसका मतलब यह होगा कि जिन निवेशकों का पैसा अभी शेयर बाजार में है, वे धीरे-धीरे उसे निकालकर सोने-चांदी या अन्य कमोडिटी में लगाना शुरू कर सकते हैं। इससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ेगा और निफ्टी की वृद्धि और धीमी हो सकती है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि निफ्टी की यह धीमी चाल अस्थायी हो सकती है। यदि आगामी तिमाहियों में कंपनियों के नतीजे बेहतर आते हैं, विदेशी निवेश फिर से लौटता है और सरकार बड़े आर्थिक सुधारों की घोषणा करती है, तो शेयर बाजार में तेजी वापस आ सकती है।