Aniruddh Singh
7 Jan 2026
नई दिल्ली। भारत सरकार आने वाले बजट में कस्टम ड्यूटी की मौजूदा संरचना में बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है। अभी देश में आयात शुल्क यानी कस्टम ड्यूटी के 8 अलग-अलग स्लैब लागू हैं, लेकिन सरकार इन्हें घटाकर 5 या 6 करने की योजना बना रही है। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स प्रणाली को सरल बनाना, व्यापार से जुड़े विवादों को कम करना और आयात शुल्क को देश की औद्योगिक तथा व्यापारिक प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाना है। कस्टम ड्यूटी स्लैब कम होने का सीधा अर्थ यह है कि अलग-अलग वस्तुओं पर लगने वाले शुल्क की दरें कम श्रेणियों में बंटी होंगी। फिलहाल कई वस्तुओं के वर्गीकरण को लेकर विवाद होते हैं कि वे किस श्रेणी में आएंगी और उन पर कितनी ड्यूटी लगेगी।
इस वजह से कस्टम विभाग और कारोबारियों के बीच लंबे समय तक मुकदमे चलते रहते हैं। स्लैब कम होने से वर्गीकरण आसान होगा और मुकदमेबाजी में कमी आने की उम्मीद है। सरकार इस प्रक्रिया में उन इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को भी ठीक करना चाहती है, जहां कच्चे माल पर ज्यादा और तैयार माल पर कम शुल्क लगता है। ऐसा होने पर देश में उत्पादन करने वाली कंपनियों को नुकसान होता है और आयात को बढ़ावा मिलता है। ड्यूटी ढांचे को संतुलित करने से घरेलू उद्योग को फायदा मिल सकता है और मेक इन इंडिया जैसी पहलों को मजबूती मिल सकती है। यह कदम हाल में हुए और चल रहे अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।
भारत जब दूसरे देशों के साथ मुक्त व्यापार या विशेष व्यापार समझौते करता है, तो आयात-निर्यात शुल्क को सरल और पारदर्शी बनाना जरूरी हो जाता है। इसके साथ-साथ सरकार एक पेपरलेस और सहज कस्टम प्रणाली की दिशा में भी काम कर रही है, ताकि आयात-निर्यात की प्रक्रिया तेज और कम खचीर्ली हो सके। पिछले दो वर्षों से केंद्र सरकार कस्टम ढांचे को दुरुस्त करने पर लगातार ध्यान दे रही है। पिछले बजट में भी कस्टम ड्यूटी में बड़े स्तर पर युक्तिकरण किया गया था, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि अभी और सुधार की गुंजाइश है। इसी वजह से बीते तीन-चार महीनों से इस पर गंभीरता से काम चल रहा है और इस साल के बजट में इसकी घोषणा होने की संभावना है। सरकार कस्टम ड्यूटी को वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी के साथ भी बेहतर तालमेल में लाना चाहती है, ताकि पूरा अप्रत्यक्ष कर ढांचा एकसार और स्पष्ट हो।
विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) और घरेलू टैरिफ क्षेत्र के बीच ड्यूटी संरचना को फिर से परिभाषित करने पर भी केंद्र सरकार विचार कर रही है, जो व्यापक एसईजेड सुधारों का हिस्सा है। फिलहाल कस्टम से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में मुकदमे लंबित हैं और हजारों करोड़ रुपए की वसूली अटकी हुई है। उद्योग जगत का कहना है कि जहां जानबूझकर टैक्स चोरी नहीं हुई है, वहां विवाद सुलझाने के लिए एक तरह की राहत या माफी योजना लाई जानी चाहिए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी संकेत दे चुकी हैं कि कस्टम ड्यूटी का सरलीकरण सरकार के सुधार एजेंडे का अगला बड़ा कदम होगा। कुल मिलाकर, यह प्रस्ताव व्यापार को आसान बनाने और अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।