Aniruddh Singh
7 Jan 2026
मुुंबई। भारतीय शेयर बाजार में बीते चार कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का क्रम जारी है। इस दौरान बीएसई सेंसेक्स 1,581 अंकों से अधिक टूट गया है, जबकि निफ्टी-50 में करीब 1.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। निवेशक इस समय वैश्विक और घरेलू अनिश्चितताओं को लेकर सतर्क हैं। दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर दुनिया भर के पूंजी बाजारों पर देखा जा सकता है। अमेरिका द्वारा नया टैरिफ लगाने की चचार्एं बाजार की धारणा को कमजोर कर रही हैं। यह खबर सामने आते ही गुरुवार के कारोबार में आईटी, मेटल, आॅटो और निर्यात से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। घरेलू स्तर पर कंपनियों के तिमाही नतीजे भी इस गिरावट की एक अहम वजह हैं।
जब कॉरपोरेट आय उम्मीद के मुताबिक नहीं आती या कुछ बड़ी कंपनियों के नतीजे कमजोर रहते हैं, तो निवेशकों का भरोसा डगमगाता है। कुछ सेक्टर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कई बड़े सेक्टर दबाव में हैं, और यही असंतुलन पूरे बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहा है। गुरुवार के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स का 780 अंकों से ज्यादा गिरकर 84,180.96 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में 1 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट के साथ 25,876.85 के स्तर पर आ गया है। कारोबार के दौरान लगभग सभी सेक्टरों में दबाव देखा गया। चार दिनों में बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में करीब 9.19 लाख करोड़ रुपए की गिरावट आई है।
इस गिरावट का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली माना जा रहा है। जनवरी महीने में अब तक एफआईआई हजारों करोड़ रुपए के शेयर बेच चुके हैं। बुधवार को भी विदेशी निवेशकों ने बड़ी मात्रा में इक्विटी से पैसा निकाला। लगातार पूंजी निकासी से बाजार की धारणा कमजोर होती जा रही है और घरेलू निवेशकों में भी सतर्कता बढ़ी है। इसके अलावा गुरुवार को साप्ताहिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी होने के कारण भी बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहा, क्योंकि कई ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन काटीं या आगे के लिए रोलओवर किया। वैश्विक संकेत भी भारतीय बाजार के पक्ष में नहीं रहे। एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली और अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में दबाव में बंद हुए थे। निवेशकों के बीच वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक हालात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भारत और अमेरिका के बीच लंबित व्यापार समझौते पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार में जोखिम से बचने का माहौल बना रह सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार पर दबाव डाला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई, जो भारत जैसे आयातक देश के लिए नकारात्मक संकेत माना जाता है। महंगा तेल चालू खाते के घाटे और महंगाई दोनों पर असर डाल सकता है। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और रूस से व्यापार करने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की संभावनाओं ने भी बाजार को डराया है। इससे भारत के निर्यात आधारित सेक्टर, खासकर टेक्सटाइल और सीफूड कंपनियों के शेयरों में दबाव आया।
अमेरिका ने भारत और चीन समेत रूस से कारोबार करने वाले सभी देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के बाद एक्सपोर्ट पर फोकस करने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। खासतौर पर टेक्सटाइल और श्रिंप (झींगा) एक्सपोर्ट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट इस खबर के बाद आई कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक द्विदलीय प्रतिबंध विधेयक को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है। इस विधेयक में रूस के साथ कारोबार जारी रखने वाले देशों पर कड़े आर्थिक कदम उठाने और 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। इस सूची में भारत का नाम सामने आने से निवेशकों में चिंता बढ़ गई।
टेक्सटाइल सेक्टर में सबसे अधिक गिरावट गोकलदास एक्सपोर्ट्स में देखने को मिली। कारोबार के दौरान कंपनी के शेयर करीब 13% तक टूटकर 596.65 रुपए के स्तर तक आ गए। गोकलदास की कुल कमाई का 60% से ज्यादा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है। इससे पहले 2025 में भी यह शेयर ट्रंप की बार-बार बदलती टैरिफ नीति के चलते 34% से अधिक गिरा था। इसके अलावा केपीआर मिल के शेयर भी 2% से ज्यादा गिर गए। वहीं पर्ल ग्लोबल इंडस्ट्रीज में करीब 6% की गिरावट देखने को मिली। अमेरिका के नए टैरिफ प्रस्ताव के बाद सीफूड और श्रिंप एक्सपोर्ट से जुड़ी कंपनियां में भारी बिकवाली देखने को मिली। एपेक्स फ्रोजन फीड्स के शेयर 6% से ज्यादा टूटे। वहीं अवंति फीड्स के शेयरों में करीब 7% तक की गिरावट देखने को मिली। इन कंपनियों की आमदनी का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है।