मु्ंबई। तेज उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के चलते बाजार पर दबाव बना रहा। सुबह करीब 10:38 बजे सेंसेक्स 313.81 अंक या 0.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ 84,647.33 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 109.35 अंक या 0.42 प्रतिशत फिसलकर 26,031.40 पर पहुंच गया। निफ्टी 50 के शेयरों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और जेएसडब्ल्यू स्टील प्रमुख रूप से नुकसान में रहे, जिनमें करीब 2 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। वहीं ईटरनल और अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन के शेयरों में तेजी रही और ये लगभग 1 प्रतिशत तक चढ़े। बाजार की चौड़ाई नकारात्मक बनी रही, जहां लगभग 1479 शेयरों में तेजी, 1767 शेयरों में गिरावट और 171 शेयरों में कोई बदलाव नहीं देखा गया।
बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह एफआईआई की बिकवाली रही। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1,527.71 करोड़ रुपए के शेयर बेच दिए। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र था जब एफआईआई ने बिकवाली की। इससे पहले 2 जनवरी को वे मामूली खरीदार रहे थे और उन्होंने 289.80 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे थे। जनवरी महीने में अब तक एफआईआई करीब 5,760 करोड़ रुपए के शेयर बेच चुके हैं, जबकि 2025 में रिकॉर्ड स्तर पर विदेशी पूंजी की निकासी देखी गई थी। इसके अलावा गुरुवार को सेंसेक्स डेरिवेटिव्स का साप्ताहिक एक्सपायरी दिन भी था। एक्सपायरी के दिन ट्रेडर्स अपने खुले सौदों को बंद करते हैं या अगले कॉन्ट्रैक्ट में रोलओवर करते हैं, जिससे ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ जाता है और बाजार में अस्थिरता देखने को मिलती है।
वैश्विक संकेत भी कमजोर रहे। एशियाई बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जहां जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग लाल निशान में कारोबार करते दिखे, वहीं अमेरिकी शेयर बाजार भी बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए। विश्लेषकों के अनुसार वर्तमान भू-राजनीतिक हालात और वैश्विक व्यापार से जुड़ी चिंताओं ने शेयर बाजारों में लगातार जोखिम से बचने की भावना को बढ़ा दिया है। लंबे समय से लंबित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पूरा होना बाजार में तेजी के लिए एक अहम कारक बन सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.4 प्रतिशत चढ़कर 60.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल के दाम बढ़ना भारतीय बाजार के लिए नकारात्मक माना जाता है। इसके साथ ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता और टैरिफ से जुड़ी चिंताओं ने भी बाजार पर दबाव बनाया। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में निफ्टी 50 में 0.7 प्रतिशत और सेंसेक्स में 0.9 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह गिरावट उस बयान के बाद देखने को मिली है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारतीय वस्तुओं पर ऊंचे टैरिफ लगाने की चेतावनी दी। अमेरिका पहले ही कुछ भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा चुका है, जिसका आधा हिस्सा भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल के आयात से जुड़ा हुआ है।