Aniruddh Singh
7 Jan 2026
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार 7 जनवरी को गिरावट का सिलसिला लगातार तीसरे कारोबारी दिन जारी रहा। वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों और घरेलू निवेशकों की सतर्कता के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में नजर आए। दिन के अंत में सेंसेक्स करीब 102.20 अंकों की कमजोरी के साथ 84,961 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी लगभग 38 अंक टूटकर 26,140 के आसपास स्थिर हुआ। भले ही यह गिरावट बहुत तेज न हो, लेकिन लगातार तीसरे दिन बाजार का लाल निशान में बंद होना यह बताता है कि निवेशक फिलहाल ऊंचे स्तरों पर खरीदारी करने से बच रहे हैं। इसके बावजूद बाजार की पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं कही जा सकती। मिडकैप और सम्हल शेयरों ने फ्रंटलाइन इंडेक्स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।

बीएसई मिडकैप इंडेक्स में करीब आधा प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई,वहीं स्मॉलकैप इंडेक्स भी मामूली तेजी के साथ बंद हुआ। यह संकेत देता है कि निवेशक चुनिंदा शेयरों में अवसर देख रहे हैं और गिरावट के दौरान वैल्यू आधारित खरीदारी कर रहे हैं। सेक्टर के लिहाज से देखें तो आईटी, फार्मा और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में मजबूती देखने को मिली। टाइटन, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, विप्रो और जियो फाइनेंशियल जैसे शेयरों ने निफ्टी को कुछ हद तक सहारा दिया। वहीं दूसरी ओर ऑटो, ऑयल एंड गैस, रियल एस्टेट और टेलीकॉम सेक्टर में बिकवाली का दबाव बना रहा। सिप्ला, मारुति सुजुकी, मैक्स हेल्थकेयर, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और पावर ग्रिड जैसे शेयरों में कमजोरी देखने को मिली, जिसका असर बाजार की समग्र चाल पर पड़ा।

तकनीकी नजरिए से बाजार अब अहम स्तरों के करीब पहुंच गया है। निफ्टी के लिए 25,950 से 25,900 का दायरा मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है, तो बाजार में और दबाव बढ़ सकता है और निफ्टी 25,800 या उससे नीचे भी फिसल सकता है। वहीं ऊपर की तरफ 26,200 से 26,250 का स्तर बड़ी बाधा के रूप में देखा जा रहा है। इस स्तर के पार जाने पर ही बाजार में दोबारा तेज़ी के संकेत मजबूत होंगे। कुल मिलाकर, 7 जनवरी का कारोबार यह दर्शाता है कि बाजार फिलहाल असमंजस की स्थिति में है। न तो बड़ी गिरावट के संकेत हैं और न ही तेजी की साफ तस्वीर है। 8 जनवरी को बाजार की दिशा वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और तकनीकी स्तरों पर काफी हद तक निर्भर करेगी। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए सतर्क रहना और चुनिंदा शेयरों पर ही फोकस करना समझदारी भरा कदम माना जा सकता है।