Aniruddh Singh
7 Jan 2026
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेज उतार–चढ़ाव के बीच जोरदार बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 780.18 अंक या 0.92% गिरावट के साथ 84,180.96 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 265.90 अंक या 1.02% से अधिक गिरकर 25,874.85 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार की इस कमजोरी के पीछे घरेलू कारणों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंताओं ने भी बड़ी भूमिका निभाई। लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए, जिसमें मेटल और ऑयल एंड गैस शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखा गया। बाजार की विड्थ भी कमजोर रही, क्योंकि गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से कहीं ज्यादा रही। इससे यह साफ संकेत मिला कि बिकवाली केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे बाजार में फैली हुई थी।

इस गिरावट का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली माना जा रहा है। जनवरी महीने में अब तक एफआईआई हजारों करोड़ रुपए के शेयर बेच चुके हैं। बुधवार को भी विदेशी निवेशकों ने बड़ी मात्रा में इक्विटी से पैसा निकाला। लगातार पूंजी निकासी से बाजार की धारणा कमजोर होती जा रही है और घरेलू निवेशकों में भी सतर्कता बढ़ी है। इसके अलावा गुरुवार को साप्ताहिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी होने के कारण भी बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहा, क्योंकि कई ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन काटीं या आगे के लिए रोलओवर किया। वैश्विक संकेत भी भारतीय बाजार के पक्ष में नहीं रहे। एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली और अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में दबाव में बंद हुए थे। निवेशकों के बीच वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक हालात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भारत और अमेरिका के बीच लंबित व्यापार समझौते पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार में जोखिम से बचने का माहौल बना रह सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार पर दबाव डाला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई, जो भारत जैसे आयातक देश के लिए नकारात्मक संकेत माना जाता है। महंगा तेल चालू खाते के घाटे और महंगाई दोनों पर असर डाल सकता है। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और रूस से व्यापार करने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की संभावनाओं ने भी बाजार को डराया है। इससे भारत के निर्यात आधारित सेक्टर, खासकर टेक्सटाइल और सीफूड कंपनियों के शेयरों में दबाव आया।

अमेरिका ने भारत और चीन समेत रूस से कारोबार करने वाले सभी देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के बाद एक्सपोर्ट पर फोकस करने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। खासतौर पर टेक्सटाइल और श्रिंप (झींगा) एक्सपोर्ट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट इस खबर के बाद आई कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक द्विदलीय प्रतिबंध विधेयक को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है। इस विधेयक में रूस के साथ कारोबार जारी रखने वाले देशों पर कड़े आर्थिक कदम उठाने और 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। इस सूची में भारत का नाम सामने आने से निवेशकों में चिंता बढ़ गई।
टेक्सटाइल सेक्टर में सबसे अधिक गिरावट गोकलदास एक्सपोर्ट्स में देखने को मिली। कारोबार के दौरान कंपनी के शेयर करीब 13% तक टूटकर 596.65 रुपए के स्तर तक आ गए। गोकलदास की कुल कमाई का 60% से ज्यादा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है। इससे पहले 2025 में भी यह शेयर ट्रंप की बार-बार बदलती टैरिफ नीति के चलते 34% से अधिक गिरा था। इसके अलावा केपीआर मिल के शेयर भी 2% से ज्यादा गिर गए। वहीं पर्ल ग्लोबल इंडस्ट्रीज में करीब 6% की गिरावट देखने को मिली। अमेरिका के नए टैरिफ प्रस्ताव के बाद सीफूड और श्रिंप एक्सपोर्ट से जुड़ी कंपनियां में भारी बिकवाली देखने को मिली। एपेक्स फ्रोजन फीड्स के शेयर 6% से ज्यादा टूटे। वहीं अवंति फीड्स के शेयरों में करीब 7% तक की गिरावट देखने को मिली। इन कंपनियों की आमदनी का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है।