नई दिल्ली। देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.3% से 6.8% के दायरे के ऊपर बढ़ेगी। उन्होंने कहा इसका मुख्य कारण सोमवार से लागू हुए जीएसटी 2.0 है, जिसे केंद्र सरकार ने एक बड़े सुधार के रूप में पेश किया है। उन्होंने कहा इस सुधार के साथ यूनियन बजट में घोषित आयकर राहत और अन्य रियायतों का संयुक्त असर भारतीय अर्थव्यवस्था में घरेलू मांग को बढ़ाएगा और इसका संयुक्त प्रभाव जीडीपी में तेज बढ़ोतरी के रूप में देखने को मिलेगा। नागेश्वरन ने दिल्ली में आयोजित नेटवर्क18 रिफॉर्म्स रीलोडेड 2025 सम्मेलन में कहा जीएसटी दरों में कटौती और आयकर में राहत का कुल आर्थिक प्रभाव 2.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्यक्ष कर और अप्रत्यक्ष कर (जीएसटी) में दी गई यह राहत अर्थव्यवस्था में उपभोग और निवेश को प्रोत्साहित करेगी, जिससे उत्पादन, सेवाओं और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ वैश्विक अनिश्चितताएं इस प्रभाव को आंशिक रूप से कम कर सकती हैं।
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जब उनसे राज्यों की जीएसटी आय पर असर के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में जीएसटी दरों में कटौती के बावजूद राज्यों का राजस्व संग्रह लगातार बढ़ा है। इसका अर्थ यह है कि कम दरों के बावजूद खपत में वृद्धि होने से सरकार की कमाई पर नकारात्मक असर नहीं पड़ा। उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 में सकल राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4% रहने का भरोसा जताया। उनका कहना है कि गैर-कर राजस्व में भी अच्छा इजाफा हुआ है और त्योहारों के मौसम में खपत बढ़ने से यह वित्तीय वर्ष का संतुलन और मजबूत रहेगा। नागेश्वरन ने कहा उच्च आवृत्ति संकेतकों के आधार पर उन्हें उम्मीद है कि दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7% के करीब रहेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए नए टैरिफ के असर पर उन्होंने कहा इस साल भारत की वृद्धि दर पर लगभग 0.4-0.5% का नकारात्मक असर पड़ सकता था और अगले साल यह प्रभाव 1% तक हो सकता है।
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उन्होंने आश्वासन दिया कि जीएसटी सुधारों के कारण यह नकारात्मक असर काफी हद तक कम हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि मध्यम और लंबी अवधि में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। बल्कि, जीएसटी सुधार और सरकारी नियमों में ढील भारत को निवेश के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बनाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में अतिरिक्त टैरिफ के बावजूद भारत में निवेश का माहौल मजबूत बना रहेगा। नागेश्वरन ने यह भी बताया कि कंपनियों को दूसरी छमाही की उधारी और राजकोषीय लक्ष्य को लेकर चिंता है, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि दूसरी छमाही की उधारी में कोई बदलाव नहीं होगा।
इससे 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। कुल मिलाकर, जीएसटी 2.0 को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। यह न केवल उपभोग और निवेश को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक चुनौतियों जैसे अमेरिकी टैरिफ के नकारात्मक प्रभाव को भी काफी हद तक संतुलित कर सकेगा। इससे आने वाले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8% तक पहुंचने की संभावना मजबूत हो गई है।