आईटी शेयरों में गिरावट से म्यूचुअल फंडों के 13,000 करोड़ डूबे, H-1B वीजा नियमों ने दिया जबर्दस्त शुरुआती झटका

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आईटी शेयरों में गिरावट से म्यूचुअल फंडों के 13,000 करोड़ डूबे, H-1B वीजा नियमों ने दिया जबर्दस्त शुरुआती झटका

मुंबई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एच-1बी वीजा फीस बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर करने के फैसले के बाद आज सप्ताह के पहले दिन सोमवार को शेयर बाजार में आईटी सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में 2 से 6 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। इसके चलते म्यूचुअल फंडों की देश की टॉप-10 आईटी कंपनियों में किए गए निवेश की वैल्यू में लगभग 13,000 करोड़ रुपए की गिरावट आई है। एच-1बी वीजा के नियमों में किए जाने वाले बदलाव से भारतीय आईटी सेक्टर के बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है।

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के H-1B वीजा फीस बढ़ाने के ऐलान के बाद आज 22 सितंबर को आईटी सेक्टर की कंपनियों में भारी गिरावट देखी गई। इसके चलते म्यूचुअल फंडों की देश की टॉप-10 आईटी कंपनियों में किए गए निवेश की वैल्यू करीब 13,000 करोड़ रुपये तक घट गई। H-1B वीजा के नियमों में बदलाव को भारतीय आईटी सेक्टर के प्रॉफिट मार्जिन और हायरिंग रणनीतियों पर सीधा चोट माना जा रहा है। जिसके चलते निवेशक घबरा गए और आज आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।

सबसे तगड़ा झटका इंफोसिस को लगा

19 सितंबर तक, देश की टॉप 10 आईटी कंपनियों में म्यूचुअल फंडों के निवेश की कुल वैल्यू 3.41 लाख करोड़ रुपए थी। लेकिन आज 22 सितंबर को शेयर बाजार खुलने पर यह वैल्यू घटकर 3.28 लाख करोड़ रुपए पर आ गई। म्यूचुअल फंडों की सबसे बड़ी होल्डिंग इंफोसिस में है। म्यूचुअल फंडों के पोर्टफोलियो में सबसे तगड़ा झटका इंफोसिस को लगा है। 19 सितंबर तक इंफोसिस में एमएफ निवेश का मूल्य 1,31,482 करोड़ रुपए था, जो 22 सितंबर को घटकर 1,26,856 करोड़ रुपए पर आ गया। यानी अकेले इंफोसिस से ही 4,626 करोड़ रुपए की वैल्यू घटी है।

टीसीएस समेत अन्य कंपनियों में भी बड़ी गिरावट

इसी तरह सबसे अधिक होल्डिग वाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी टीसीएस के शेयरों में भी बडी गिरावट देखने को मिली है। टीसीएस में म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स की वैल्यू तीन दिन में 2,052 करोड़ रुपए घटी और यह 64,144 करोड़ से गिरकर 62,092 करोड़ रह गई है। सबसे अधिक होल्डिंग के मामले में एचसीएल टेक 35,850 करोड़ रुपए के साथ तीसरे स्थान पर है। एचसीएल टेक के निवेश का मूल्य भी 1,154 करोड़ रुपए घटकर 37,006 करोड़ से 35,853 करोड़ पर आ गया है। टेक महिंद्रा (1,680 करोड़), कोफोर्ज (918 करोड़), परसिस्टेंट सिस्टम्स (1,014 करोड़) और एमफैसिस (762 करोड़) में भी भारी गिरावट देखने को मिली है। वहीं विप्रो (403 करोड़), एलटीआई माइंडट्री (426 करोड़) और ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज (58 करोड़) के निवेश मूल्य में अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज की गई।

मार्जिन पर तात्कालिक असर न्यूट्रलः जेएम फाइनेंशियल

जेएम फाइनेंशियल की रिपोर्ट के मुताबिक, इसका मार्जिन पर तात्कालिक असर न्यूट्रल दिखाई देता है। यद्यपि, अगर कंपनियों को अमेरिका में लोकल टैलेंट को ज्यादा वेतन पर हायर करना पड़ा, तो मार्जिन पर 15–50 बेसिस पॉइंट तक का असर देखने को मिल सकता है। लेकिन बढ़ते ऑफशोरिंग और क्लाइंट्स से प्राइस रीनेगोशिएशन इस असर को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश की 10 प्रमुख आईटी कंपनियों के कुल कर्मचारियों का सिर्फ 1.2% से 4.1% हिस्सा ही एच-1बी वीजा पर है, जिससे इनके लिए जोखिम सीमित है। ब्रोकरेज का मानना है कि वीजा नियमों को लेकर सबसे बड़ी रेगुलेटरी अनिश्चितता खत्म हो गई है। अब कंपनियां वैकल्पिक उपायों पर काम करना शुरू करेंगी और बहुत संभावना है कि लंबी अवधि में यह स्थित भारतीय आईटी सेक्टर के लिए नेट पॉजिटिव साबित हो।

Aniruddh Singh
By Aniruddh Singh

अनिरुद्ध प्रताप सिंह। नवंबर 2024 से पीपुल्स समाचार में मुख्य उप संपादक के रूप में कार्यरत। दैनिक जाग...Read More

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