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दुबई। दुबई ने वन फ्रीजोन पासपोर्ट नामक एक नई योजना की शुरुआत की है, जिसका उद्देस्य शहर के अलग-अलग फ्रीजोन्स को एकीकृत करके व्यवसायों को अधिक सुगमता प्रदान करना है। इसके तहत अब किसी कंपनी को यदि वह पहले से किसी फ्रीजोन में पंजीकृत है, तो अन्य फ्रीजोन में काम करने के लिए उसे अलग-अलग लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। यह व्यवस्था न केवल समय और धन बचाएगी, बल्कि व्यापारिक माहौल को और अधिक पारदर्शी तथा सुविधाजनक बनाएगी। फ्रीजोन वास्तव में वे विशेष आर्थिक क्षेत्र होते हैं, जहां विदेशी निवेशकों को कई छूट और विशेषाधिकार दिए जाते हैं। इसमें 100 प्रतिशत विदेशी स्वामित्व का अधिकार, टैक्स छूट, कस्टम्स में रियायतें और स्वतंत्र नियामक ढांचा शामिल होता है। यही कारण है कि दुबई और पूरे यूएई में 40 से अधिक फ्रीजोन स्थापित हैं, जो लॉजिस्टिक्स, हेल्थकेयर, फिनटेक, मीडिया, डिजाइन और लक्ज़री रिटेल जैसे क्षेत्रों में वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करते हैं। अब तक प्रत्येक फ्रीजोन का अपना स्वतंत्र ढ़ांचा था, जिसके कारण किसी कंपनी को दूसरे क्षेत्र में विस्तार करने के लिए नया लाइसेंस और पंजीकरण कराना पड़ता था।
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वन फ्रीजोन पासपोर्ट’ इसी समस्या को दूर करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह व्यवस्था पूरी फ्रीजोन प्रणाली को एकजुट कर देगी और व्यापार विस्तार को सरल बनाएगी। उदाहरण के तौर पर विश्व-प्रसिद्ध लग्जरी ब्रांड लुई विटॉन इस योजना का पहला सदस्य बना है। उसने अपना कॉर्पोरेट कार्यालय दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर फ्रीजोन में खोला है और गोदाम जेबेल अली फ्रीजोन में स्थापित किया है। पूरा प्रोसेस केवल 5 दिनों में पूरा हो गया। इस कदम का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि कंपनियां विभिन्न फ्रीजोन की सुविधाओं का उपयोग कर पाएंगी, बिना बार-बार लाइसेंस प्रक्रिया से गुजरने की बाध्यता के। इससे दुबई एक अधिक एकीकृत और सहज बिज़नेस हब बन जाएगा। वैश्विक निवेशक अब इसे और आकर्षक विकल्प मानेंगे, क्योंकि यहां नियामकीय अड़चनें कम हो रही हैं। यही वजह है कि दुबई फ्रीजोन काउंसिल के अधिकारियों ने इसे एक परिवर्तनकारी पहल करार दिया है, जो शहर को एक सशक्त वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करेगी।
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हालांकि, इस योजना में कुछ सीमाएं भी हैं। किसी कंपनी को इस पासपोर्ट के जरिए दूसरे फ्रीजोन में कर्मचारियों को नियुक्त करने या ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं होगी। इसी प्रकार, खुदरा व्यापार (रिटेल) क्षेत्र और वर्चुअल ऑफिस, साझा डेस्क, बिज़नेस सेंटर जैसी सेवाएं भी इस योजना के दायरे से बाहर हैं। इसका मतलब यह है कि यह व्यवस्था मुख्यतः उन कंपनियों के लिए लाभकारी होगी जिन्हें भौतिक संरचनाओं और बहु-क्षेत्रीय संचालन की जरूरत होती है। दुबई के लिए यह पहल एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह गैर-तेल व्यापार को और बढ़ावा देगी। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 की पहली तिमाही में यूएई का गैर-तेल व्यापार लगभग 18.6 प्रतिशत बढ़कर 835 अरब दिरहम तक पहुंच गया। ऐसे में, नई नीति निवेशकों और कंपनियों को और अधिक आकर्षित करेगी। संक्षेप में, दुबई का वन फ्रीजोन पासपोर्ट’ व्यवस्था उस दिशा में कदम है जहां व्यापारिक संस्थाओं को अधिक स्वतंत्रता, तेजी और सुविधा मिलेगी। यह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल देगा बल्कि दुबई को अंतरराष्ट्रीय निवेश के केंद्र के रूप में और अधिक मजबूत बनाएगा।