Manisha Dhanwani
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Shivani Gupta
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Manisha Dhanwani
22 Jan 2026
रायपुर/ बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार हाईवे और सड़कों पर स्टंटबाजी और बर्थ-डे सेलिब्रेशन की शिकायत आ रही हैं। इस घटनाओं को हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान में लेते हुए सुनवाई करते हुए सरकार से कहा-हाईवे पर स्टंटबाजी और बर्थ-डे-सेलिबे्रशन पर पुलिस की कार्रवाई सिर्फ दिखावे के लिए नहीं चाहिए। ऐसी कार्रवाई करें कि अपराधियों को सबक मिले। साथ ही आदेश दिया कि केवल दिखावे के लिए कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, ऐसा अपराध करने वालों को बांड भराकर ही गाड़ी छोड़नी चाहिए।
बता दें कि प्रदेश भर में इस तरह के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। हाईकोर्ट ने स्टंटबाजी, बर्थ-डे सेलिब्रेशन और केक कटिंग के इन मामलों पर स्वत: संज्ञान लेकर राज्य शासन से जवाब मांगा था। हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद शासन की ओर से जवाब प्रस्तुत करते हुए कहा गया कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर अभियान चलाया और स्टंट में शामिल गाड़ियों को जब्त किया है। इसके साथ ही कार मालिकों के ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश भी की गई। यह कार्रवाई सड़क सुरक्षा के नजरिए से की गई ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके। ऐसे मामलों में गाड़ियों के मालिकों की पहचान करने के साथ ही मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि सार्वजनिक सड़कों पर स्टंटबाजी करने वाले युवाओं को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। ताकि यह दूसरों के लिए सबक बने।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि पुलिस का प्रकोप अक्सर केवल गरीब, मध्यम वर्ग और दलितों पर पड़ता है। जबकि संपन्न और बाहुबलियों के खिलाफ पुलिस नख-दंतहीन बाघ बन जाती हैं। ऐसे लोग मामूली जुमार्ना भरकर आसानी से छोड़ दिए जाते हैं और उनके वाहन भी वापस कर दिए जाते हैं। कोर्ट ने बिलासपुर क्षेत्र के लावर में पुलिस द्वारा जब्त की गई 18 कारों को हाईकोर्ट की अनुमति के बिना नहीं छोड़ने कहा था। अब शासन की ओर से जवाब पेश करने के बाद इन गाड़ियों को बांड भरने के बाद छोड़ने के आदेश दिए गए हैं।
शासन की ओर से चीफ सेक्रेटरी ने जवाब में कहा कि इस बारे में लोगों को भी जागरूक होना होगा। सिविक सेंस जरूरी है। शासन अपने स्तर पर कड़ाई के साथ ही नियमों का पालन करा रहा है। लोगों में जागरूकता अभियान हर थाने स्तर पर चलाए जा रहे हैं। कलेक्टर और एसपी की ओर से इसके लिए अलग से पत्र जारी किए जा रहे हैं। कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि गैर जिम्मेदार और खतरे में डालने वाले अपराधियों के खिलाफ सख्ती जरूरी है ताकि आम नागरिक सुरक्षित महसूस करें।