Gathbandhan In Wedding:हिंदू धर्म में सात फेरे से पहले क्यों जरूरी है गठबंधन? जानें इस रस्म का महत्व

भारत में शादी-विवाह अलग-अलग धर्मों और रीति-रिवाजों के अनुसार होता है। हर धर्म और रीति-रिवाज में अलग रस्में होती हैं, जो रिश्ते की पवित्रता को दर्शाती हैं। हिंदू विवाह में भी सात फेरे, मंगलसूत्र और मांग में सिंदूर लगाने से पहले जो रस्म निभाई जाती है, उसे गठबंधन कहते हैं।यह शादी का एक ऐसा चरण है, जिसके बिना विवाह अधूरा माना जाता है।
गठबंधन का अर्थ है दूल्हा और दुल्हन को पवित्र बंधन में जोड़ना। इस रस्म में दुल्हन की चुनरी और दूल्हे के पटके को दुपट्टे से मजबूती के साथ बांधा जाता है। माना जाता है कि यह गांठ हमेशा बनी रहे, क्योंकि यह विश्वास, प्यार और साथ निभाने का वचन दर्शाती है।
गठबंधन में प्रयोग होने वाले प्रतीक
- सिक्का
सिक्का डालने का मतलब है कि विवाह में धन का अधिकार दोनों के बीच बराबर रहेगा। - फूल (पुष्प)
फूल सौंदर्य और शुभता के प्रतीक हैं। इन्हें गांठ में डालने का संकेत है कि वर-वधू का जीवन खुशहाल और खिलखिलाता रहे और दोनों एक-दूसरे की तारीफ करें। - हल्दी
हल्दी शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक है। इसका उद्देश्य है कि दोनों एक-दूसरे के स्वास्थ्य और भलाई का ख्याल रखें और रिश्ते में कभी भी हीन भावना न रहे। - दूर्वा
दूर्वा प्रेम और स्थायित्व का प्रतीक है। सूखी होने पर भी यह पानी डालने के बाद हरी हो जाती है, जो दिखाती है कि रिश्ते में प्रेम और आत्मीयता हमेशा कायम रहे। - अक्षत
अक्षत अन्नपूर्णा देवी का प्रतीक है। इसे डालने का अर्थ है कि विवाह में समृद्धि और सुख-समृद्धि बनी रहे।
गठबंधन का महत्व
गठबंधन पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाने का संकेत है। इसका अर्थ है कि दोनों एक-दूसरे का सम्मान करेंगे, भरोसा बनाए रखेंगे और हर परिस्थिति में साथ निभाएंगे। साफ और पवित्र कपड़े से गांठ बांधना यह दर्शाता है कि रिश्ता ईमानदारी और पवित्रता के साथ आगे बढ़ेगा।











