आईएमएफ के कार्यकारी निदेशक नियुक्त किए गए आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल 

Follow on Google News
आईएमएफ के कार्यकारी निदेशक नियुक्त किए गए आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल 

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति तीन सालों की अवधि के लिए की गई है। यह भारत के लिए गर्व की बात है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इतनी प्रतिष्ठित संस्था में भारतीय प्रतिनिधित्व बढ़ना न केवल देश की आर्थिक साख को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक आर्थिक नीतियों में भी भारत की आवाज को ताकत देता है। डॉ. पटेल भारतीय अर्थव्यवस्था के उन कुछ चुनिंदा अर्थशास्त्रियों में गिने जाते हैं, जिन्होंने मौद्रिक नीति को आधुनिक और मजबूत ढांचा दिया। उन्होंने ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण की सिफारिश की थी, जिसे बाद में भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर अपनाया है। इसके तहत 4 फीसदी महंगाई दर का लक्ष्य तय किया गया और इसे एक स्थिर व पारदर्शी नीति ढांचे का हिस्सा बनाया गया।

ये भी पढ़ें: रिलायंस की एजीएम आज, हो सकती है जियो व रिलायंस रिटेल के आईपीओ की टाइमलाइन को लेकर बड़ी घोषणा

रघुराम राजन के बाद गर्वनर बने थे पटेल

उर्जित पटेल को 2016 में रघुराम राजन के बाद 24वें गवर्नर के रूप में रिजर्व बैंक की कमान सौंपी गई थी। हालांकि, उन्होंने दिसंबर 2018 में अचानक व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दे दिया था। इस तरह वे 1992 के बाद सबसे कम कार्यकाल वाले गवर्नर बने। उनकी विदाई के पीछे सरकार और आरबीआई के बीच संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर मतभेद को मुख्य कारण माना गया था। आईएमएफ से उनका पुराना रिश्ता रहा है। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने 5 साल तक वॉशिंगटन डीसी में और फिर भारत में आईएमएफ के डेपुटी रेजीडेंट रिप्रेजेंटेटिव के रूप में काम किया था। यह अनुभव उनके लिए नए कार्यकाल में उपयोगी साबित होगा। इसके अलावा, वे रिजर्व बैंक में डिप्टी गवर्नर भी रह चुके हैं, जहां वे मौद्रिक नीति, सांख्यिकी, अनुसंधान और सूचना प्रबंधन जैसे अहम विभागों को संभालते थे।

निजी क्षेत्र में भी निभाई है अहम भूमिका

सिर्फ सरकारी सेवाओं तक ही नहीं, उन्होंने निजी क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। वे रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईडीएफसी लिमिटेड, एमसीएक्स लिमिटेड और गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन जैसी कंपनियों से जुड़े रहे हैं। इसके अतिरिक्त वे 1998 से 2001 तक भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में सलाहकार भी रहे हैं। शैक्षणिक दृष्टि से भी डॉ. पटेल का सफर प्रेरणादायक है। उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय से स्नातक, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एमफिल और अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। उनकी शिक्षा और अनुभव का मिश्रण उन्हें वैश्विक वित्तीय मंच पर एक प्रभावशाली नीति-निर्माता बनाता है। 

ये भी पढ़ें: भारत में भी लागू हो शुगर आधारित टैक्स प्रणाली, पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों ने की मांग

आईएमएफ में मजबूत हुई भारत की स्थिति

आईएमएफ में उनकी नियुक्ति का मतलब यह है कि अब भारत की सोच और हितों का और बेहतर प्रतिनिधित्व विश्व अर्थव्यवस्था की नीति निर्धारण प्रक्रिया में होगा। आईएमएफ वैश्विक वित्तीय स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विकासशील देशों को सहायता देने जैसी भूमिकाओं में प्रमुख संस्था है। ऐसे में डॉ. पटेल का अनुभव और दृष्टिकोण न केवल भारत बल्कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है। उर्जित पटेल की यह नियुक्ति भारत की आर्थिक ताकत और प्रतिभा का वैश्विक स्तर पर सम्मान है। उनके नेतृत्व में आईएमएफ में भारत की भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे न केवल देश को लाभ होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संतुलन को भी नई दिशा मिलेगी।

Aniruddh Singh
By Aniruddh Singh

अनिरुद्ध प्रताप सिंह। नवंबर 2024 से पीपुल्स समाचार में मुख्य उप संपादक के रूप में कार्यरत। दैनिक जाग...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts