Manisha Dhanwani
10 Jan 2026
Hemant Nagle
10 Jan 2026
Naresh Bhagoria
10 Jan 2026
Vijay S. Gaur
9 Jan 2026
शैलेंद्र वर्मा, इंदौर। जिस भागीरथपुरा में दूषित पानी से 20 जानें गईं वहां नर्मदा की लाइन 25 साल पहले वर्ष 2000 में डाली गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, इन पाइप लाइनों की उम्र करीब 15 साल होती है। इस अवधि में पाइपलाइन बदल दी जानी चाहिए थी। खास बात यह है कि वर्ष 2000 से इंदौर में लगातार भाजपा का मेयर रहा है, बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया गया। 20 मौतों के बाद अब लाइनें बदली जा रही हैं।
भागीरथपुरा के पूर्व पार्षद मांगीलाल रेड़वाल 2022 तक 35 वर्षों तक लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे। वे चार बार निर्दलीय, दो बार भाजपा और एक बार कांग्रेस से इस क्षेत्र के पार्षद रहे। वर्तमान में भी यहां से भाजपा का पार्षद है। रेड़वाल बताते हैं, 2017-18 में पार्षद रहते हुए उन्होंने नर्मदा लाइन बदलने का प्रस्ताव रखा था, जो स्वीकृत भी हो गया था। करीब पौने दो करोड़ के दो टेंडर हुए, लेकिन ठेकेदार ने दो साल तक काम नहीं किया। कई शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद काम ठंडे बस्ते में चला गया। उनके अनुसार, इस क्षेत्र में ड्रेनेज लाइनें भी करीब 34 साल पहले 1991 में डाली गई थीं। बाद में 2000 में छोटी और तंग गलियों के कारण नर्मदा की लाइन ड्रेनेज लाइन के नीचे डाल दी गई, जो तकनीकी रूप से जोखिम भरी स्थिति रही।
इंदौर के स्ट्रक्चरल इंजीनियर अतुल सेठ के अनुसार, सीवेज लाइन की अधिकतम उम्र 100 साल होती है, लेकिन बीच में डैमेज होने पर समय पर सुधार जरूरी है। वैसे नियमत: हर 15 दिन में लाइन की जांच करनी चाहिए। कहीं गाद जमा हो या पानी का प्रवाह बाधित हो, तो डैमेज की पहचान की जाए। समय रहते मरम्मत होने पर बड़ी समस्या से बचा जा सकता है।
अतुल सेठ के मुताबिक, पानी सप्लाई के लिए जो पाइप उपयोग किए जाते हैं, वह तीन कैटेगरी के होते हैं। उन्होंने बताया कि ए-कैटेगरी की उम्र 10-15 साल, बी-कैटेगरी की उम्र 30-35 साल और सी कैटेगरी वाले पाइप की अधिकतम उम्र 60 से 70 साल तक होती है।
भाजपा पार्षद कमल बाघेला का कहना है, 2024 में महापौर को पत्र लिखकर जर्जर ड्रेनेज लाइनों से अवगत कराया था। स्वीकृति के बाद करीब आधी लाइन बदली भी गई, लेकिन नर्मदा लाइन को लेकर काम अटका रहा।
भागीरथपुरा में किस क्वालिटी के पानी के पाइप डाले गए, वो मेरे कार्यकाल का नहीं है। हां, गंदे पानी की शिकायत पर तत्काल एक्शन लिया जाना चाहिए था।
उमा शशि शर्मा, पूर्व महापौर
पानी की लाइनों के संबंध में तकनीकी जानकारी नहीं है, पर विकास कार्य किए जाते हैं तो मॉनिटरिंग होनी चाहिए। शिकायतों का निराकरण तत्काल होना चाहिए था।
कृष्णमुरारी मोघे, पूर्व महापौर
जो नई लाइन डाली जा रही है, उसमें पीवीसी पाइप का इस्तेमाल कर रहे हैं। इंजीनियर से हम बात करेंगे कि इस गुणवत्ता क्या है और कितने साल बाद इसे बदलना होगा।
पुष्यमित्र भार्गव, महापौर, इंदौर