Aniruddh Singh
7 Jan 2026
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को निवेशकों की सतर्कता साफ नजर आई। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 376.28 अंक या 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 85,063.34 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 26,200 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलते हुए 71.60 अंक या 0.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 26,178.70 पर आ गया। खास बात यह रही कि यह गिरावट ऐसे समय में दर्ज की गई, जब एक दिन पहले ही निफ्टी ने कारोबार के दौरान नया रिकॉर्ड स्तर छुआ था। बाजार में आई इस कमजोरी से यह संकेत मिलता है कि ऊंचे स्तरों पर निवेशक फिलहाल जोखिम उठाने से बच रहे हैं। हालिया तेजी के बाद बड़े शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिला, जिसने सूचकांकों की चाल को कमजोर कर दिया। एचडीएफसी बैंक जैसे हैवीवेट शेयर में करीब 2 प्रतिशत और रिलायंस इंडस्ट्रीज में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट ने बाजार की धारणा को खासा प्रभावित किया।

चूंकि इन शेयरों का सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ा वेटेज होता है, इसलिए इनकी गिरावट का असर पूरे बाजार पर पड़ा। वैश्विक मोर्चे पर भी अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी ने बाजार में असहजता पैदा की। रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर दिए गए इस बयान से यह आशंका गहराई कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर भारतीय कंपनियों और निर्यात आधारित सेक्टर्स पर पड़ सकता है। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया। एफआईआई की ओर से शेयरों की बिक्री से बाजार में तरलता घटती है और निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है।

घरेलू निवेशक भी अक्सर एफआईआई के रुख को बाजार के संकेत के तौर पर देखते हैं, जिससे मनोवैज्ञानिक दबाव और बढ़ जाता है। भू-राजनीतिक स्तर पर वेनेजुएला से जुड़ी घटनाओं ने भी वैश्विक अस्थिरता को बढ़ाया। ऐसी परिस्थितियों में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकते हैं और जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाते हैं। इसी का असर बाजार में बढ़ती अस्थिरता के रूप में दिखा, जहां इंडिया वीआईएक्स में तेजी दर्ज की गई। कुल मिलाकर, मौजूदा गिरावट किसी बड़े संकट का संकेत नहीं है, बल्कि यह ऊंचे स्तरों पर सतर्कता, वैश्विक तनाव और निवेशकों की सावधानी भरी रणनीति को दर्शाती है।