Hemant Nagle
10 Jan 2026
भोपाल। राजधानी में अलग-अलग तरीकों से साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं। कोलार इलाके में CBI का अधिकारी बनकर MPEB के रिटायर्ड अधिकारी को तीन दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर तीन लाख रुपए ठग लिए, जालसाजों ने फरियादी को साइबर ठगी का आरोपी बताकर डराया और ज्यादा रकम ऐंठने का प्रयास किया, लेकिन सूचना मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें सुरक्षित बचा लिया। इस मामले में पुलिस ने आईटी एक्ट और धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं के तहत अज्ञता के खिलाफ केस दर्ज किया है।
शिर्डीपुरम कोलार निवासी जगन्नाथ राठौर (72) MPEB के रिटायर्ड अधिकारी हैं। गत 6 जनवरी को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने व्यक्ति ने खुद को दिल्ली CBI का सब इंस्पेक्टर बताया और कहा कि आप वीडियो कॉल के माध्यम से हम से जुड़े आप से बात करना है। चंद सेकेंड बाद वीडियो कॉल पर सामने एक पुलिस वर्दी में एक अधिकारी दिखाई दिया। उसने बताया कि 527 करोड़ के साइबर फ्राड का एक मामले की जांच उनके पास है, उक्त रकम को जिन खातों में ट्रांसफर किया गया है, उनमें से एयरटेल की सिम आपका है। आरोपी ने उन्हें डराया कि अगर इस मामले की जांच में आपने हमारा सहयोग नहीं किया तो मजबूरन आपको गिरफ्तार करना पड़ेगा। इसके बाद फरियादी को वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट में होने की बात बताई गई।
ठगों ने धमकी भरे अंजाम में कहा कि इस दौरान आप किसी से बात नहीं करेंगे, घर से बाहर नहीं जाएंगे और लगातार फोन व वीडियो कॉल पर मौजूद रहेंगे। तीन दिनों तक जालसाजों ने उन्हें कई तरह से डरा दिया कि वे खुद को अपराधी समझने लगे। इस दौरान ठगों ने उनसे बैंक खातों, एटीएम कार्ड, ओटीपी और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां ले लीं। इसके बाद उनके खातों से धीरे-धीरे करीब तीन लाख रुपए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर लिए। फरिदयादी ने डर के चलते अपने परिजनों को भी डिजिटल अरेस्ट होने की सूचना नहीं दी और खुद को तीन दिनों तक कमरे में बंद रखा।
जब वह कमरे से तीन दिनों तक बाहर नहीं आए तो उसके भांजे ने कोलार पुलिस को सूचना दी। पुलिस तत्काल पीड़ित के घर पहुंची और उन्हें रेसक्यू कर डिजिटल अरेस्ट से सुरक्षित मुक्त कराया। शातिर जालसाजों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों ने डिजिटल अरेस्ट की वारदात को अंजाम दिया। कोलार पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। वहीं पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों को होल्ड कर ठगी की राशि फ्रीज कर ली है।
एमपी नगर थाने के एसआई कुलदीप खरे ने बताया कि शाहपुरा इलाके में रहने वाले 33 वर्षीय युवा बैंक अधिकारी है। उसने पुलिस को बताया कि मंगलवार को उसके व्हाट्सऐप पर एक लिंक आई थी। जिसमें ट्रैफिक नियम तोड़ने पर 500 रुपए का ऑनलाइन चालान भरने का मैसेज था। उसे लगा कि कहीं उसने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन हुआ होगा, तभी तो चालान भरने के लिए लिंक भेजी गई है। इस कारण उसने तुरंत एपीके लिंक को ओपन कर लिया। इसके बाद उनके खाते से अलग-अलग समय में 2 लाख 50 हजार 219 रुपए दूसरे खातों में ट्रांसफर हो गए। इस घटना के बाद उन्होंने 1930 पर कॉल कर साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। जहां पर साइबर पुलिस ने शून्य पर केस दर्ज कर डायरी एमपी नगर थाने को भेजी। इसके बाद गुरुवार को पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।
पिपलानी थाना प्रभारी चंद्रिका यादव ने बताया कि अवधपुरी निवासी शिखा माया राणाभट्ट पिता ओम बहादुर (27) प्राइवेट जॉब करती है। उसने पुलिस को बताया कि वह अच्छी नौकरी की तलाश में थी, इसलिए उसने अपना रिज्यूम ऑनलाइन किया था। इसी बीच 31 दिसंबर को उसके व्हाट्सऐप पर एक लिंक आई, जिसे उसने ओपन कर लिया, फिर उसे बताया गया कि अब वह टेलीग्राम पर बात करेंगे। इसके बाद वह जालसाज के बातों में आकर ट्रेलीग्राम के माध्यम से उसके संपर्क में आ गई। जालसाज ने उसे बताया कि वह उसे टास्क देंगे और टास्क पूरा होने के बदले उसे पैसा दिया जाएगा, लेकिन उसे पैसा जमा करना होगा, पहले उसे छोटे-छोटे टास्क दिए गए जो उसने पूरे कर लिए, इसके एवज में उसे मुनाफे के साथ पैसा वापस मिला। जालसाज ने उसे बड़े टास्क पूरा कर ज्यादा पैसा कमाने का लालच देकर मोटी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा ली। युवती ने भी करीब पांच बार में 2 लाख 87 हजार रुपए आरोपी के खाते में ट्रांसफर कर लिए। इसके बाद उसे मुनाफे के साथ रकम वापस नहीं मिली।