Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

Peoples Update Special :हमारे त्योहार और परंपरा बनते हैं दरकते रिश्तों को जोड़ने का मजबूत जरिया

इसे संयोग कहा जाए या त्योहारों व परंपराओं की ताकत कि टूटते रिश्तों को जोड़ने के लिए ऐसे ही शुभ अवसर ऊर्जा देते हैं। कैलेंडर के अनुसार देखें तो अगस्त से नवंबर तक फैमिली कोर्ट में सबसे ज्यादा समझौते होते हैं।
हमारे त्योहार और परंपरा बनते हैं दरकते रिश्तों को जोड़ने का मजबूत जरिया
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पल्लवी वाघेला, भोपाल। भारत त्योहारों का देश है और त्योहार हमेशा से रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाने में कारगर माने गए हैं। यह युक्ति फैमिली कोर्ट में चल रहे केसेस में भी काम आती है। यही वजह है कि फेस्टिव सीजन यानी अगस्त से लेकर नवंबर तक का समय रिश्तों में दोबारा ताजगी लाने का जरिया बनता है।

    Uploaded media

    दिवाली, दशहरे पर रिश्तों की ताजगी  

    फैमिली कोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि हर साल कोर्ट में इन चार माह में सबसे अधिक समझौते होते हैं। लोग, काउंसलर और जज की सलाह पर साथ में राखी, दशहरा, करवा चौथ, दिवाली जैसे त्योहार व शादी सालगिरह साथ मनाने के बाद रिश्तों में ताजगी महसूस करते हैं। बीते तीन साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो त्योहार रिश्तों को जोड़े रखने में सफल रही हैं।

    पता नहीं था पत्नी ने व्रत रखा

    करवा चौथ के दूसरे दिन पत्नी का जन्मदिन था। काउंसलर की सलाह पर पति, जब पत्नी के मायके पहुंचा तो पता चला कि पत्नी ने व्रत रखा हुआ है। पति ने बताया कि पहली करवा चौथ पर पत्नी गर्भवती थी, इसके बाद विवाद के चलते मायके चली गई। उसे पता ही नहीं था कि पत्नी उसके लिए व्रत रखती है। दोनों ने शिकवे भुलाकर राजीनामा किया।

    12 साल बाद सगे भाइयों ने दिवाली मनाई

    जबलपुर में अपने बच्चों की पहल पर 12 साल बाद दो सगे भाइयों ने एक साथ दिवाली मनाई। इस दौरान भाई की नन्हीं पोती को देख बड़े भाई-भाभी भी भावुक हो उठे। इस दौरान दोनों एक दूसरे के गले मिले और गिले शिकवे दूर हो गए। दिवाली के बाद बड़े भाई ने कोर्ट से सारे केस खारिज कर, संपत्ति का विवाद समाप्त कर लिया।

    बच्चों की खातिर त्योहार पर मिले दंपति

    इंदौर में दंपति के विवाद में उनके बच्चे सालों से दूर थे। कोर्ट में काउंसलिंग के दौरान 12 वर्षीय बच्चे ने कहा कि जब वह दोस्तों के हाथ में राखी देखता है तो बुरा लगता है, लेकिन 7 साल की बहन मां के पास रहती है और राखी पर भी दोनों मिल नहीं पाते। कोर्ट ने दंपति को बच्चों की खातिर त्योहारों पर मिलने को कहा। युक्ति काम कर गई और बच्चों की खातिर दंपति ने साथ रहने का फैसला किया। 

    त्योहार मेल-मिलाप का जरिया

    त्योहार न केवल अच्छी यादें बनाने और सोशल गैदरिंग का, बल्कि संवाद और भावनाएं व्यक्त करने का भी जरिया होते हैं। फैमिली कोर्ट में आने वाले केसेस में यह नजर आता है कि ईगो और गलतफहमी, रिश्ते में खाई का काम करती है। इसलिए, आवेदकों को व्रत-त्योहार के जरिए समीप लाने का प्रयास करते हैं और ज्यादातर केस में यह काम भी आता है।                                                         शैल अवस्थी, काउंसलर

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

    Latest Posts