Vijay S. Gaur
15 Jan 2026
Naresh Bhagoria
15 Jan 2026
Shivani Gupta
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Shivani Gupta
15 Jan 2026
पल्लवी वाघेला, भोपाल। भारत त्योहारों का देश है और त्योहार हमेशा से रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाने में कारगर माने गए हैं। यह युक्ति फैमिली कोर्ट में चल रहे केसेस में भी काम आती है। यही वजह है कि फेस्टिव सीजन यानी अगस्त से लेकर नवंबर तक का समय रिश्तों में दोबारा ताजगी लाने का जरिया बनता है।

फैमिली कोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि हर साल कोर्ट में इन चार माह में सबसे अधिक समझौते होते हैं। लोग, काउंसलर और जज की सलाह पर साथ में राखी, दशहरा, करवा चौथ, दिवाली जैसे त्योहार व शादी सालगिरह साथ मनाने के बाद रिश्तों में ताजगी महसूस करते हैं। बीते तीन साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो त्योहार रिश्तों को जोड़े रखने में सफल रही हैं।
करवा चौथ के दूसरे दिन पत्नी का जन्मदिन था। काउंसलर की सलाह पर पति, जब पत्नी के मायके पहुंचा तो पता चला कि पत्नी ने व्रत रखा हुआ है। पति ने बताया कि पहली करवा चौथ पर पत्नी गर्भवती थी, इसके बाद विवाद के चलते मायके चली गई। उसे पता ही नहीं था कि पत्नी उसके लिए व्रत रखती है। दोनों ने शिकवे भुलाकर राजीनामा किया।
जबलपुर में अपने बच्चों की पहल पर 12 साल बाद दो सगे भाइयों ने एक साथ दिवाली मनाई। इस दौरान भाई की नन्हीं पोती को देख बड़े भाई-भाभी भी भावुक हो उठे। इस दौरान दोनों एक दूसरे के गले मिले और गिले शिकवे दूर हो गए। दिवाली के बाद बड़े भाई ने कोर्ट से सारे केस खारिज कर, संपत्ति का विवाद समाप्त कर लिया।
इंदौर में दंपति के विवाद में उनके बच्चे सालों से दूर थे। कोर्ट में काउंसलिंग के दौरान 12 वर्षीय बच्चे ने कहा कि जब वह दोस्तों के हाथ में राखी देखता है तो बुरा लगता है, लेकिन 7 साल की बहन मां के पास रहती है और राखी पर भी दोनों मिल नहीं पाते। कोर्ट ने दंपति को बच्चों की खातिर त्योहारों पर मिलने को कहा। युक्ति काम कर गई और बच्चों की खातिर दंपति ने साथ रहने का फैसला किया।
त्योहार न केवल अच्छी यादें बनाने और सोशल गैदरिंग का, बल्कि संवाद और भावनाएं व्यक्त करने का भी जरिया होते हैं। फैमिली कोर्ट में आने वाले केसेस में यह नजर आता है कि ईगो और गलतफहमी, रिश्ते में खाई का काम करती है। इसलिए, आवेदकों को व्रत-त्योहार के जरिए समीप लाने का प्रयास करते हैं और ज्यादातर केस में यह काम भी आता है। शैल अवस्थी, काउंसलर