मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपने ताजा अनुमान में खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) का लक्ष्य घटाकर 2.6% कर दिया है। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है, क्योंकि पहले अनुमान इससे अधिक था और भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई थी। इस कमी का मुख्य कारण सरकार द्वारा हाल ही में किए गए जीएसटी दरों में कटौती को बताया जा रहा है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि टैक्स में कमी से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर दबाव घटेगा और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। महंगाई पर नियंत्रण किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूर होता है। भारत में महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई लगातार नीतिगत ब्याज दर और अन्य मौद्रिक उपकरणों का इस्तेमाल करता है। अब जब सरकार ने जीएसटी में कटौती की है, तो कई जरूरी चीजें और सेवाएं सस्ती हो गई हैं, जिससे सीधा असर महंगाई दर पर दिखाई दे रहा है।
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यही वजह है कि एमपीसी ने अगले वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान घटाकर 2.6% कर दिया है। यह स्तर आरबीआई के निर्धारित लक्ष्य 4% से काफी नीचे है, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में उपभोक्ताओं को महंगाई से बड़ी राहत मिलने वाली है। हालांकि, केंद्रीय बैंक के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। महंगाई बहुत नीचे चली जाए तो यह भी अर्थव्यवस्था के लिए सही नहीं माना जाता क्योंकि इससे मांग और निवेश पर असर पड़ सकता है। आरबीआई का प्रमुख लक्ष्य होता है कि महंगाई 2% से 6% के बीच रहे ताकि न तो उपभोक्ता और उद्योग पर बोझ पड़े और न ही बाजार में मंदी जैसी स्थिति पैदा हो।
फिलहाल 2.6% का अनुमान यह दिखाता है कि कीमतों का दबाव नियंत्रित है और आरबीआई को ब्याज दरों में कटौती करने का अवसर भी मिल सकता है। ब्याज दरों में कटौती का असर सीधे तौर पर आम लोगों और उद्योगों पर पड़ता है। अगर रेपो रेट घटता है तो बैंकों से कर्ज लेना सस्ता हो जाता है, जिससे गृह ऋण, वाहन ऋण और व्यापारिक कर्ज की ब्याज दरें कम हो जाती हैं। इससे खपत और निवेश बढ़ते हैं और अर्थव्यवस्था में विकास को गति मिलती है। इसीलिए महंगाई दर का गिरना आरबीआई के लिए एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे आगे चलकर ब्याज दरों में राहत देने की संभावना बढ़ जाती है।
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सरकार का जीएसटी दरों में कटौती का फैसला यह दिखाता है कि वह उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने और बाजार की मांग बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। जब वस्तुएं और सेवाएं सस्ती होती हैं, तो लोग अधिक खरीदारी करते हैं, जिससे उत्पादन और रोजगार दोनों में बढ़ोतरी होती है। यह नीति न केवल महंगाई पर नियंत्रण में सहायक होती है बल्कि आर्थिक वृद्धि को भी मजबूती देती है। समग्र रूप से देखा जाए तो आरबीआई का महंगाई अनुमान घटाकर 2.6% करना अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में कीमतों का दबाव बहुत अधिक नहीं रहेगा और आम जनता को राहत मिलेगी।