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मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीाई) द्वारा नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25% की पहली कटौती शनिवार से लागू हो गई है। इस कदम से अनुमान है कि बैंकिंग सिस्टम में लगभग 60,000 से 70,000 करोड़ रुपए तक की अतिरिक्त लिक्विडिटी का प्रवाह होगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय ऐसे समय पर लिया गया है जब त्योहारी सीजन और वित्तीय वर्ष के आखिरी महीनों, यानी दिसंबर से मार्च के बीच, नकदी की मांग बढ़ जाती है और तरलता पर दबाव आता है। इस कटौती के चलते आरबीआई को अन्य मौद्रिक साधनों को प्रभावित किए बिना तरलता का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलेगी और ब्याज दरों को स्थिर रखने में सहूलियत रहेगी। बीते एक माह में औसत तरलता अधिशेष करीब 2.75 लाख करोड़ रुपए रही है और गुरुवार तक यह बढ़कर 2.87 लाख करोड़ रुपए हो गई।
आरबीआई जून से ही वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामी के जरिए अतिरिक्त तरलता को अवशोषित कर रहा था और 27 जून से अब तक लगभग 20.37 लाख करोड़ रुपए सिस्टम से निकाले जा चुके हैं। यह कदम इसलिए जरूरी था, ताकि बैंकिंग सिस्टम में अत्यधिक नकदी का संचय न हो और वित्तीय स्थिरता बनी रहे। जून में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में आरबीआई ने कुल 100 बेसिस पॉइंट यानी 1% की सीआरआर कटौती का ऐलान किया था। यह कटौती चरणबद्ध तरीके से चार बार में लागू की जाएगी। जब यह पूरी तरह लागू हो जाएगी, तब तक बैंकिंग सिस्टम में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपए की प्राथमिक तरलता का प्रवाह हो चुका होगा। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस दौरान कहा था कि 3% सीआरआर का स्तर आरामदायक माना जाता है।
इस कदम का उद्देश्य केवल अतिरिक्त तरलता उपलब्ध कराना ही नहीं है, बल्कि बैंकों की लागत को घटाना और उनके मार्जिन को बेहतर बनाना भी है। आरबीआई का अनुमान है कि इससे बैंकों के मार्जिन में लगभग 7 बेसिस पॉइंट तक सुधार होगा। इस बढ़ी तरलता के कारण बैंकों की जमा दरों में किसी तरह के बदलाव की संभावना नहीं है क्योंकि बाजार में पहले से ही इस अतिरिक्त नकदी प्रवाह को ध्यान में रखकर ब्याज दरों को समायोजित किया जा चुका है। आरबीआई के हालिया आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की ताजा रुपए की सावधि जमा दर का भारित औसत 5.75% से घटकर 5.61% हो गया। इसका मतलब है कि बैंकों ने पहले ही जमा दरों में कमी कर दी है। इसमें और गिरावट की संभावना नहीं दिखती। बैंकों के बीच चर्चा चल रही है कि इस अतिरिक्त नकदी को कहां निवेश किया जाए।
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एक निजी बैंक के ट्रेजरी हेड के अनुसार, अभी यह तय नहीं हुआ है कि अतिरिक्त धन को किस क्षेत्र में लगाया जाएगा। यह निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि उस समय सिस्टम में तरलता कितनी है और कौन से निवेश साधन बेहतर रिटर्न दे रहे हैं। कुल मिलाकर, सीआरआर में की गई यह पहली कटौती त्योहारी सीजन और वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में नकदी की मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी। इससे न केवल बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त तरलता बनी रहेगी बल्कि बैंकों को अपनी संचालन लागत घटाने और लाभप्रदता बढ़ाने का अवसर मिलेगा। यह कदम वित्तीय बाजारों को स्थिर रखने, ब्याज दरों को नियंत्रित करने और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है।