किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए खाद्य तेलों पर 10% आयात शुल्क बढ़ाए केंद्र सरकार

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कम कीमत की वजह से घटने लगी है सोयाबीन की जोत
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किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए खाद्य तेलों पर 10% आयात शुल्क बढ़ाए केंद्र सरकार

नई दिल्ली। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने केंद्र सरकार से मांग की है कि खाद्य तेलों पर आयात शुल्क कम से कम 10 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए ताकि घरेलू किसानों को मिल रही कम कीमतों से उन्हें बचाया जा सके। दरअसल, सस्ते आयात और देश के भीतर तेल बीजों के दाम गिरने की वजह से किसान सोयाबीन जैसी फसलों की खेती से पीछे हट रहे हैं। एसोसिएशन का कहना है कि यदि सरकार तुरंत आयात शुल्क बढ़ाती है तो किसानों का भरोसा दोबारा लौटेगा, उत्पादन में वृद्धि होगी और भारत आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ सकेगा। सोपा के अध्यक्ष दवेश जैन ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भेजे गए अपने पत्र में कहा कि पिछले कुछ समय से लगातार घरेलू दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बने हुए हैं। कम कीमत की वजह से किसानों को सही दाम नहीं मिल पा रहा और उन्होंने इस बार सोयाबीन बोने का क्षेत्रफल 5 प्रतिशत से अधिक घटा दिया है।

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एमएसपी से कम बिक रहा सोयाबीन

किसान लगातार घाटे में फसल बेचने पर मजबूर हैं इस लिए वे धीरे-धीरे इस खेती से ही दूर हो रहे हैं। सोपा ने कहा सरकार को आयात शुल्क बढ़ाकर स्थानीय उत्पादन को बचाने के लिए कदम उठाने होंगे। मई 2025 में सरकार ने कच्चे खाद्य तेलों पर आयात शुल्क 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया था, ताकि घरेलू स्तर पर रिफाइनिंग को बढ़ावा दिया जा सके और खाद्य महंगाई पर काबू रखा जा सके। हालांकि परिष्कृत खाद्य तेलों पर शुल्क 35.75 प्रतिशत पर यथावत रखा गया था। सोपा का कहना है कि इस नीति का फायदा उपभोक्ताओं को तो हुआ है, लेकिन किसानों को गंभीर नुकसान झेलना पड़ा। यहां तक कि सरकारी खरीद के बावजूद भी स्टॉक्स घाटे में बेचने पड़े और संभावना है कि मौजूदा फसल स्थिति को देखते हुए सरकार को फिर से सोयाबीन खरीदना पड़ेगा, जिसमें 5,000 करोड़ रुपए से अधिक का खर्च आ सकता है।

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सामान्य से भी नीचे चले गए खाद्य तेलों के दाम

एसोसिएशन का तर्क है कि आज के हालात में खाद्य तेल महंगाई को नहीं बढ़ा रहे, बल्कि उनकी कीमतें सामान्य से भी नीचे चली गई हैं। ऐसे में उपभोक्ता थोड़ी ज्यादा कीमत चुकाने के लिए तैयार हो सकते हैं, जिससे किसानों को न्यायपूर्ण दाम मिलेगा और भारत आयात पर निर्भरता घटा सकेगा। सोपा का यह भी कहना है कि लंबे समय से बहुत कम या शून्य आयात शुल्क पर खाद्य तेलों को देश में लाने की नीति ने भारतीय तेल बीज अर्थव्यवस्था को गंभीर क्षति पहुंचाई है। सरकार किसानों को एमएसपी के ज़रिए राहत देने की कोशिश करती है, लेकिन अगर बाज़ार में कीमतें लगातार नीचे बनी रहें और आयात सस्ता होता रहे तो यह राहत भी टिकाऊ नहीं होगी। सोपा का मानना है कि किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें स्थिर और बेहतर मूल्य का भरोसा देना जरूरी है।

Aniruddh Singh
By Aniruddh Singh

अनिरुद्ध प्रताप सिंह। नवंबर 2024 से पीपुल्स समाचार में मुख्य उप संपादक के रूप में कार्यरत। दैनिक जाग...Read More

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