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अमेजन और ब्लू ओरिजिन के संस्थापक जेफ बेजोस की मां जैकी बेजोस का 78 साल की उम्र में निधन, दुर्लभ बीमारी से थीं पीड़ित

अमेजन और ब्लू ओरिजिन के संस्थापक जेफ बेजोस की मां जैकी बेजोस का 78 साल की उम्र में निधन, दुर्लभ बीमारी से थीं पीड़ित
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मियामी। अमेजन और ब्लू ओरिजिन के संस्थापक जेफ बेजोस की मां जैकलिन जैकी बेजोस का 78 वर्ष की आयु में 14 अगस्त को मियामी स्थित उनके घर पर निधन हो गया। बेजोस फैमिली फाउंडेशन ने बताया कि वह पिछले 5 सालों से लेवी बॉडी डिमेंटिया नामक दुर्लभ और गंभीर मस्तिष्क रोग से पीड़ित थीं। यह बीमारी स्मृति, सोच और शारीरिक क्षमता को धीरे-धीरे प्रभावित करती है। उनके निधन पर जेफ बेजोस ने एक भावुक पोस्ट लिखते हुए कहा कि उनकी मां ने सिर्फ 17 साल की उम्र में उन्हें जन्म दिया और जीवनभर अपार प्रेम और समर्थन दिया। जेफ ने कहा कि उनकी मां हमेशा देती रहीं, बदले में उन्होंने कभी कुछ नहीं मांगा। उनका जीवन हम सबके लिए एक सौभाग्य की तरह था। जेफ बेजोस ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा उनका जीवन एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे बेहद विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत और मेहनत से न केवल खुद आगे बढ़ा जा सकता है, बल्कि आसपास के दूसरे लोगों को भी ऐसा ही करने प्रेरित किया जा सकता है।

    मात्र 17 साल की उम्र में जेफ बेजोस की मां बनीं

    1946 में जन्मी जैकी ने बहुत कम उम्र में मां बनने की चुनौती स्वीकार की और अकेले ही अल्बुकर्क, न्यू मैक्सिको में जेफ का पालन-पोषण किया। वह दिन में बैंक में नौकरी करती थीं और रात में कॉलेज की पढ़ाई करती थीं। यह उनके दृढ़ निश्चय का प्रमाण था। इसी दौरान उनकी मुलाकात क्यूबा से आए प्रवासी मिगुएल माइक बेजोस से हुई, जो बाद में उनके जीवनसाथी बने। दोनों ने मिलकर एक परिवार बसाया और जेफ के अलावा क्रिस्टीना और मार्क को जन्म दिया। उनका घर हमेशा खुला रहता था, जहां उनकी गर्मजोशी और अपनापन सभी को परिवार जैसा एहसास कराता था। जैकी शिक्षा की ताकत में गहरा विश्वास रखती थीं। यही कारण था कि 45 वर्ष की आयु में उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की और सेंट एलिजाबेथ यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान में उच्च सम्मान के साथ स्नातक किया। उनकी सीखने की इच्छा और आत्मविकास की ललक बताती है कि उम्र कभी भी सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती।

    गजब की ती सीखने की इच्छा और आत्मविकास की ललक

    उनका समाजसेवा का सफर 2000 में बेजोस फैमिली फाउंडेशन की स्थापना से नई ऊंचाइयों पर पहुंचा। इस फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने वरूम जैसी पहल की शुरुआत की, जो पेरेंटिंग टूल्स प्रदान करके बच्चों के शुरुआती विकास में मदद करती है। बेजोस स्कॉलर्स प्रोग्राम युवाओं को नेतृत्व और सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रेरित करता है। उनका मानना था कि मिलकर प्रयास करने से पूरी पीढ़ी का भविष्य बदला जा सकता है। भले ही उन्होंने पेशेवर और सामाजिक क्षेत्रों में कई उपलब्धियां हासिल कीं, लेकिन उनके लिए परिवार हमेशा सर्वोपरि रहा। 11 पोते-पोतियां और एक परपोता उनकी धड़कन थे। वह प्यार से उन्हें मार्मी बुलाती थीं और हर साल कैंप मार्मी आयोजित करती थीं, जो परिवार को एक साथ लाने और रिश्तों को मजबूत करने का खास अवसर होता था। वह अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गई हैं जो जीवटता, करुणा, सेवा और परिवार का महत्व स्थापित करता है। उनका जीवन इस बात का भी प्रमाण है कि कठिनाइयों के बावजूद प्रेम, शिक्षा और सेवा का मार्ग चुनकर हम न केवल खुद का, बल्कि अपने आस-पास के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

    Aniruddh Singh
    By Aniruddh Singh

    अनिरुद्ध प्रताप सिंह। नवंबर 2024 से पीपुल्स समाचार में मुख्य उप संपादक के रूप में कार्यरत। दैनिक जाग...Read More

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