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लद्दाख हिंसा की होगी न्यायिक जांच, करेंगे सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे नेतृत्व, गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला

- 24 सितंबर को लेह में भड़की थी हिंसा, 4 की मौत
लद्दाख हिंसा की होगी न्यायिक जांच, करेंगे सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे नेतृत्व, गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लेह में 24 सितंबर, 2025 को हुई हिंसा की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी और करीब 90 लोग घायल हुए थे। गृह मंत्रालय ने शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025 को इस मामले में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी.एस. चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित करने की घोषणा की। 

    यह जांच यह पता लगाएगी कि उस दिन ऐसी गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति कैसे बनी, पुलिस ने क्या कार्रवाई की और किन परिस्थितियों में लोगों की जान गई।

    राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग पर भड़के थे हालात

    लद्दाख में कई हफ्तों से राज्य का दर्जा और भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहे थे। ये प्रदर्शन पहले शांतिपूर्ण थे, लेकिन 24 सितंबर को लेह में स्थिति अचानक बिगड़ गई। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया। इसी दौरान चार लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हुए।

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    गृह मंत्रालय ने कहा- निष्पक्ष जांच होगी

    गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए गृह मंत्रालय ने आज न्यायिक जांच की घोषणा की है। यह जांच उन परिस्थितियों की पड़ताल करेगी जिनके कारण गंभीर कानून और व्यवस्था की समस्या पैदा हुई, पुलिस ने क्या कार्रवाई की, और चार व्यक्तियों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हुई। सरकार का कहना है कि वह लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं के प्रति प्रतिबद्ध है और किसी भी समय संवाद के लिए तैयार है।

    सरकार ने संवाद की पेशकश दोहराई

    गृह मंत्रालय ने बयान में यह भी कहा कि सरकार लगातार बातचीत के पक्ष में है। सरकार किसी भी समय संवाद के लिए तैयार है और आगे भी उच्च स्तरीय समिति या अन्य प्लेटफॉर्म के माध्यम से एपेक्स बॉडी लेह (ABL) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के साथ चर्चा का स्वागत करती रहेगी। सरकार को उम्मीद है कि संवाद और सहयोग से स्थिति में जल्द सुधार होगा।

    तीन सदस्यीय आयोग करेगा जांच

    गृह मंत्रालय के अनुसार, यह तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग होगा, जिसकी अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज डॉ. बी.एस. चौहान करेंगे। यह आयोग हिंसा से जुड़ी घटनाओं, पुलिस कार्रवाई, प्रशासनिक विफलताओं और स्थानीय परिस्थितियों की व्यापक जांच करेगा। जांच रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर जवाबदेही तय की जाएगी।

    सोनम वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप 

    हिंसा के दो दिन बाद, 26 सितंबर को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया। सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए हैं। फिलहाल वांगचुक को जोधपुर जेल भेजा गया है। उनकी गिरफ्तारी ने देशभर में बहस छेड़ दी है, क्योंकि वांगचुक लंबे समय से लद्दाख के पर्यावरण और स्वायत्तता के मुद्दों पर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे।
    लद्दाख के लोगों की मांग 

    लद्दाख के सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद क्षेत्र की पहचान, नौकरियों और जमीन पर खतरा बढ़ा है। इसी के चलते राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा की मांग उठ रही है। हालिया हिंसा के बाद यह मांग और तेज हो गई है, जबकि सरकार लगातार बातचीत के ज़रिए समाधान निकालने पर जोर दे रही है।

    Mithilesh Yadav
    By Mithilesh Yadav

    वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...Read More

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