Bilaspur News:शराब घोटाले में अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत, राज्य से बाहर रहने की शर्त

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में मुख्य आरोपी कारोबारी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। अदालत ने उन्हें राज्य से बाहर रहने, जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने और सभी शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ढेबर से जुड़ी करीब 1200 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क कर चुका है।
सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मुख्य आरोपियों में शामिल कारोबारी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जमानत के दौरान उन्हें राज्य से बाहर रहना होगा और जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करना होगा। साथ ही किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
तीन एजेंसियों की जांच जारी
अनवर ढेबर के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED), आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) अलग-अलग मामलों में जांच कर रही हैं। शराब घोटाले को लेकर कई स्तरों पर कार्रवाई अभी भी जारी है।
1200 करोड़ की संपत्तियां कुर्क
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने से पहले ED ने इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1200 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। इनमें रायपुर की चर्चित 'ढेबर सिटी' और गोवा का 'वेस्टइन गोवा' होटल भी शामिल हैं।
PMLA के तहत बड़ी कार्रवाई
ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत तीन अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए थे। एजेंसी के अनुसार संपत्तियों की डीड वैल्यू लगभग 200 करोड़ रुपए है, जबकि बाजार मूल्य 1000 करोड़ रुपए से अधिक आंका गया है।
गोवा होटल खरीदने का दावा
जांच एजेंसी का दावा है कि उत्तर गोवा के अंजुना स्थित 'वेस्टइन गोवा' होटल को कथित शराब घोटाले से प्राप्त करीब 110 करोड़ रुपए की राशि से खरीदा गया था। ED ने अपनी जांच में यह भी आरोप लगाया है कि नकदी के परिवहन में कुछ अन्य लोगों की भूमिका रही। इन आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय अदालत में होना बाकी है।
2883 करोड़ के सिंडिकेट का आरोप
ED के मुताबिक EOW और ACB की FIR के आधार पर हुई जांच में वर्ष 2019 से 2023 के बीच आबकारी व्यवस्था में कथित हेरफेर कर 2883 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई का मामला सामने आया है। एजेंसी का आरोप है कि इस कथित सिंडिकेट के संचालन में अनवर ढेबर और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी अनिल टुटेजा की भूमिका रही।
जमीन, बैंक खाते और निवेश अटैच
ED ने ढेबर सिटी से जुड़ी जमीनों के अलावा कई कंपनियों की संपत्तियां भी कुर्क की हैं। ओम साई बेवरेजेस, दिशिता वेंचर्स और नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड भी अटैच किए गए हैं। एजेंसी का दावा है कि इन कंपनियों के जरिए कथित सिंडिकेट को आर्थिक लाभ पहुंचाया जाता था।
85 आरोपी, जांच जारी
ED इस मामले में अब तक छह पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है। हाल ही में विजय भाटिया, टी. भुनेश्वर राव, प्रबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर को भी आरोपी बनाया गया है। इसके साथ ही PMLA मामले में आरोपियों की संख्या 85 हो गई है। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है।
राहत, लेकिन शर्तों के साथ
सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिली अंतरिम जमानत केवल निर्धारित शर्तों के साथ लागू रहेगी। अदालत ने साफ किया है कि यह राहत जांच या ट्रायल को प्रभावित नहीं करेगी और कानूनी प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी।












