दीपका खदान विस्तार पर भड़का ग्रामीणों का गुस्सा, GM ऑफिस में जड़ा ताला

प्रेम कुमार,रायपुर: SECL दीपका खदान के विस्तार को लेकर ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच विवाद अब सड़क पर आ गया है। हरदीबाजार में स्वास्थ्य केंद्र, पटवारी कार्यालय और आंगनबाड़ी समेत 8 शासकीय भवनों को एक्सीवेटर से ढहाए जाने के विरोध में शनिवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने दीपका महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव कर मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल और सरपंच लोकेश्वर कंवर के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में मुआवजा, नौकरी, पुनर्वास और नई बसाहट की मांग प्रमुख रही।
बुलडोजर कार्रवाई के बाद भड़का आक्रोश
शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे एसईसीएल प्रबंधन की कार्रवाई के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों के मुताबिक, हरदीबाजार में स्वास्थ्य केंद्र, पटवारी कार्यालय और आंगनबाड़ी सहित कुल 8 शासकीय भवनों को एक्सीवेटर की मदद से ढहा दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई से पहले उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनका कहना है कि जमीन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दे लंबित होने के बावजूद भवनों को गिराने की कार्रवाई की गई।

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अस्पताल टूटा, मरीज लौटे खाली हाथ
कार्रवाई का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाई दिया। अस्पताल कर्मचारी संतोष के मुताबिक, सामान बाहर निकालने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। इसके चलते जरूरी दस्तावेज, दवाइयां और अन्य सामग्री मलबे में दब गई। शनिवार को आसपास के गांवों से मरीज इलाज कराने पहुंचे, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र का भवन टूट चुका देखकर उन्हें वापस लौटना पड़ा।
GM ऑफिस पर ताला, ठप रहा कामकाज
शनिवार सुबह करीब 9 बजे विधायक प्रेमचंद पटेल और सरपंच लोकेश्वर कंवर के नेतृत्व में ग्रामीण दीपका महाप्रबंधक कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और धरने पर बैठ गए। तालाबंदी के चलते एरिया ऑफिस का कामकाज दिनभर प्रभावित रहा। अधिकारी और कर्मचारी कार्यालय के बाहर ही रहे।
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CGM ने समझाने की कोशिश की
ग्रामीणों के प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद दीपका के सीजीएम अशोक कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति शांत कराने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक मुआवजा, नौकरी, पुनर्वास और नई बसाहट से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होता, तब तक ऐसी कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
300 ग्रामीणों का घेराव, CISF से नोकझोंक
GM कार्यालय के घेराव के दौरान तैनात CISF जवानों और पुलिस बल के साथ ग्रामीणों की हल्की नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गेट से हटाने का प्रयास किया, लेकिन बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मुख्य गेट के सामने बैठ गए।।करीब 300 ग्रामीणों ने धरना देते हुए एसईसीएल दीपका प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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बाजार बंद कर व्यापारियों ने दिया समर्थन
प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में हरदीबाजार के व्यापारियों ने भी ग्रामीणों के समर्थन में अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। शनिवार को साप्ताहिक बाजार का दिन होने के बावजूद बाजार में अधिकांश दुकानें बंद रहीं। इससे विरोध का असर गांव के व्यापारिक क्षेत्र में भी दिखाई दिया।
विधायक की चेतावनी मांगें नहीं मानीं तो खदान बंद
कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल ने कहा कि ग्राम पंचायत को पूर्व सूचना देकर ही इस तरह की कार्रवाई की जानी चाहिए थी। उन्होंने ग्रामीणों की मांगों को जायज बताते हुए प्रबंधन और प्रशासन से तत्काल ध्यान देने की अपील की। पटेल ने कहा कि फिलहाल ग्रामीणों ने GM कार्यालय पर ताला लगाया है। यदि मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में खदान का काम भी बंद कराने का निर्णय लिया जा सकता है। इसकी जिम्मेदारी दीपका प्रबंधन की होगी।
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इन गांवों के ग्रामीण हुए लामबंद
प्रदर्शन में केवल हरदीबाजार ही नहीं, बल्कि सराईसिंगार, रैंकी, मलगांव, आमगांव, दर्शखांचा और सुआभोड़ी के ग्रामीण भी शामिल हुए। ग्रामीणों का दावा है कि उनकी जमीनें खदान विस्तार में चली गई हैं, लेकिन कई प्रभावित परिवारों को अभी तक नौकरी, मकान और बसाहट से संबंधित मुआवजा नहीं मिला है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
प्रदर्शनकारियों ने जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा निर्धारण और पत्रक में कथित गड़बड़ियों को दूर कर उचित मुआवजा देने की मांग की है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए बेहतर पुनर्वास, नई बसाहट और भूमि अधिग्रहण के बदले नियमानुसार स्थायी नौकरी की मांग भी उठाई गई। ग्रामीणों ने करीब 18 हेक्टेयर जमीन से प्रभावित परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग भी रखी है।
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8 घंटे बाद खत्म हुआ प्रदर्शन
करीब 8 घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद बिलासपुर मुख्यालय में ग्रामीणों की मांगों पर चर्चा कराने के आश्वासन के बाद शाम करीब 5 बजे आंदोलन समाप्त हुआ। अब ग्रामीणों की नजर प्रबंधन और प्रशासन के अगले कदम पर है। विवाद का समाधान बातचीत से होता है या आंदोलन आगे बढ़ता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।




















