झीरम का सच जेब में था तो जांच में क्यों नहीं निकला? अरुण साव का तंज,भूपेश बघेल का पलटवार

प्रेम कुमार,रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हमले को लेकर NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार किया है। साव ने सवाल उठाया कि जब बघेल लगातार झीरम का सच अपनी जेब में होने की बात कहते थे, तो जांच के दौरान वह सच सामने क्यों नहीं आया। जवाब में बघेल ने कहा कि कांग्रेस ने इस हमले में अपने बड़े नेताओं को खोया है और घटना का दर्द वही समझ सकता है जिसने अपनों को खोया हो।
जेब में था सच तो जांच में क्यों नहीं निकला? अरुण साव
झीरम मामले को लेकर कांग्रेस की बैठक और नेताओं के बयानों पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधा। साव ने कहा कि बघेल लगातार दावा करते रहे कि 'झीरम का सच मेरी जेब में है', लेकिन जांच के दौरान ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया। साव ने आरोप लगाया कि झीरम मामले को लेकर कांग्रेस की ओर से राजनीति की गई। उनका कहना था कि यदि किसी नेता के पास मामले से जुड़े तथ्य या साक्ष्य थे, तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने रखना चाहिए था।
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साव के बयान से बढ़ा सियासी तापमान
NIA कोर्ट के फैसले के बाद झीरम घाटी को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा की ओर से अदालत के फैसले को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है, जबकि कांग्रेस की ओर से जांच के दायरे और हमले के पीछे की बड़ी साजिश से जुड़े सवाल उठाए जा रहे हैं।
भूपेश बघेल का पलटवार- हमने अपने बड़े नेताओं को खोया
अरुण साव के बयान पर भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि झीरम हमले में कांग्रेस ने अपने कई बड़े नेताओं को खोया है। बघेल ने साव के परिवार के किसी सदस्य की इस घटना में हत्या नहीं होने का उल्लेख करते हुए कहा कि शायद इसलिए उन्हें उस दर्द और घटना का एहसास नहीं हो सकता। भूपेश बघेल पहले भी NIA कोर्ट के फैसले के बाद झीरम मामले में बड़ी साजिश और कथित मुख्य साजिशकर्ताओं से जुड़े सवाल उठाते रहे हैं।
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अदालत का फैसला आया, लेकिन सवाल बाकी
कांग्रेस की ओर से यह सवाल उठाया जा रहा है कि अदालत में जिन आरोपियों के खिलाफ मामला चला, उनके दोष सिद्ध होने और सजा के बावजूद हमले की व्यापक साजिश से जुड़े सभी सवालों का जवाब मिला या नहीं। हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका या किसी कथित साजिश के संबंध में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक रिकॉर्ड और अदालत के निर्णय के आधार पर ही माना जाना चाहिए।
कवासी लखमा पर सवाल, अरुण साव ने क्या कहा?
झीरम मामले में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता कवासी लखमा को लेकर उठ रहे सवालों पर भी अरुण साव ने प्रतिक्रिया दी। साव ने कहा कि NIA ने मामले की विस्तृत जांच की है और बड़ी संख्या में लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए होंगे, उनका उल्लेख चार्जशीट में किया गया होगा। ऐसे में किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर निष्कर्ष न्यायिक रिकॉर्ड और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
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13 साल बाद NIA कोर्ट का बड़ा फैसला
झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को बस्तर के दरभा क्षेत्र में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान हुआ था। हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल सहित कई नेताओं और अन्य लोगों की मौत हुई थी। विभिन्न रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 27 से 29 के बीच बताई गई है; PTI की रिपोर्ट के अनुसार 29 लोगों की मौत हुई थी।
5 सितंबर को दोषी, 16 सितंबर को मौत की सजा
NIA की विशेष अदालत ने 5 सितंबर 2026 को 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद 16 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद झीरम मामले पर एक बार फिर राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
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फैसले के बाद कांग्रेस की अगली रणनीति क्या?
NIA कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस की ओर से पीड़ित परिवारों के साथ समन्वय, कानूनी विकल्पों पर विचार और मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आगे की रणनीति को लेकर बैठक भी की है।
झीरम पर अब अदालत के बाद सियासत
एक तरफ अदालत द्वारा दोषियों को सुनाई गई सजा चर्चा के केंद्र में है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस हमले की व्यापक साजिश और जांच के दायरे से जुड़े सवाल उठा रही है। भाजपा नेता कांग्रेस के इन सवालों को लेकर राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं।
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बांग्लादेशी नागरिकों की जांच पर भी साव का बयान
बिलासपुर में बांग्लादेशी नागरिकों की जांच को लेकर पूछे गए सवाल पर भी अरुण साव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पुलिस को कुछ लोग संदिग्ध मिले थे, इसलिए उनके संबंध में जांच की जा रही थी। साव के मुताबिक जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक पाया जाता है तो केवल इस आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।
कांग्रेस अनुशासन समिति पर भी साव का हमला
कांग्रेस की अनुशासन समिति की बैठक को लेकर भी अरुण साव ने कांग्रेस के संगठनात्मक कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में नेताओं को बाहर करने और फिर वापस लेने की प्रक्रिया चलती रहती है। यह साव की राजनीतिक टिप्पणी है और इस पर कांग्रेस की ओर से अलग प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।
झीरम पर अब अगला सवाल क्या?
NIA कोर्ट के फैसले के बाद झीरम घाटी मामले का कानूनी अध्याय एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंचा है, लेकिन राजनीतिक बहस खत्म नहीं हुई है। दोषियों को सजा, जांच का दायरा, कथित बड़ी साजिश और लंबित सवाल अब प्रदेश की राजनीति में चर्चा के प्रमुख विषय बने हुए हैं।
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फैसले के बाद भी जारी है 'झीरम' की सियासत
13 साल पुराने इस मामले पर अदालत का फैसला आने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। आने वाले दिनों में कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी भी झीरम मामले को छत्तीसगढ़ की राजनीति के केंद्र में बनाए रख सकती है।




















