सौर-पवन परियोजनाओं के लिए 25 साल का समझौता, प्रोजेक्ट खत्म होने पर 90 दिन में हटानी होगी मशीनरी

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि उपयोग अनुमति समझौते (LUPA) के प्रावधानों में संशोधन किया है। इस संबंध में राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। इसमें भूमि उपयोग शुल्क, समझौते की अवधि, समयपूर्व समाप्ति, स्थायी सहायक संरचनाओं और विवाद निपटारे से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं।
भूमि उपयोग शुल्क
संशोधित प्रावधान के तहत भूमि उपयोग शुल्क संबंधित समझौते की प्रभावी तिथि पर प्रचलित कलेक्टर दर का 50 प्रतिशत होगा। कुछ निर्धारित मामलों में यह 75 प्रतिशत रहेगा। शुल्क का भुगतान एमपी साइबर ट्रेजरी के माध्यम से किया जाएगा और इसे लगातार पांच समान वार्षिक किस्तों में जमा करना होगा।
अनुबंध की अवधि
समझौते की अवधि परियोजना के प्रकार के आधार पर निर्धारित की गई है। सौर, पवन, विंड-सोलर हाइब्रिड, सोलर थर्मल और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए अवधि 25 वर्ष, बायोमास आधारित बिजली परियोजनाओं के लिए 30 वर्ष और लघु जल विद्युत परियोजनाओं के लिए 40 वर्ष होगी। यह अवधि परियोजना की वाणिज्यिक संचालन तिथि से लागू होगी और परियोजना की आयु अथवा निर्धारित अवधि में जो पहले हो, उसी के अनुसार रहेगी।
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स्थायी सहायक संरचनाएं
परियोजनाओं में स्थायी सहायक निर्माण के लिए 5% भूमि या 1 हेक्टेयर की सीमा वाले पुराने प्रतिबंध को हटा दिया गया है।
समय पूर्व समझौता अवधि समाप्त होने पर निपटान
समयपूर्व समझौता समाप्त होने की स्थिति में कंपनी को 90 दिन के भीतर संयंत्र, मशीनरी और अन्य सामान हटाना होगा। इसके बाद जमीन पर बची संपत्ति पर सरकार का पूर्ण अधिकार होगा और इसके लिए कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा। स्थायी सहायक संरचनाओं के लिए भी यही व्यवस्था लागू होगी।
विवादों का समाधान
इसके अलावा यदि परियोजना संचालक कंपनी सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है तो विवादों का निपटारा के प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से किया जाएगा। अन्य सभी पुराने प्रावधान यथावत रहेंगे।
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