छात्र संवाद: होसबाले बोले-सत्ता और समाज से जेन-जी का सवाल पूछना गलत नहीं

भोपाल। आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने छात्रों से संवाद के दौरान भ्रष्टाचार, सोशल लाइफ व कॅरियर में बैलेंस और डिजिटल युग में संघ की कार्यप्रणाली जैसे सवालों के बेबाकी के साथ जवाब दिए। उन्होंने कहा कि समाज अथवा सत्ता से युवाओं (जेन-जी) का सवाल पूछना गलत नहीं। युवाओं के सवालों की अनदेखी न हो बल्कि उन्हें समझने की जरूरत है। एआई और तकनीक पर वह बोले- तकनीक, साधन बने लेकिन नियंत्रण मानव के हाथ में रहे।
250 विद्यार्थी शामिल हुए
समाज सेवा न्यास द्वारा आयोजित संवाद में लगभग 250 विद्यार्थी एवं प्राध्यापक शामिल हुए। इस दौरान राम जन्मभूमि संघर्ष पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया।छात्रों ने सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक, तकनीकी और राष्ट्रीय विषयों से जुड़ी 11 सवाल रखे। होसबाले ने कहा कि नई पीढ़ी का प्रश्न पूछना भारतीय परंपरा का हिस्सा है। युवाओं के प्रश्नों को सुनने, समझने और संवाद के माध्यम से उत्तर देने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पांडेय तथा भोपाल विभाग संघचालक सोमकांत उमालकर भी मौजूद थे। कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में उन्होंने प्रबुद्ध नागरिकों से भी संवाद-मुलाकात की।

प्रमुख सवाल-जवाब
सवाल: बदलती तकनीक और डिजिटल युग में संघ के काम काज में कितना बदलाव आया?
जवाब: संघ के मूल्य-सिद्धांत और मुख्य बातें शाश्वत हैं, बस काम करने के तरीके-तकनीक में बदलाव होता रहता है।
सवाल: सोशल मीडिया और वैचारिक ‘इको चैंबर’ के दौर में युवाओं से संघ का जुड़ाव और उनके सवालों पर क्या कहेंगे?
जवाब: नई पीढ़ी सत्ता, समाज या किसी संस्था से प्रश्न करती है तो उसे गलत नहीं माना जाना चाहिए। नरेंद्र के रूप में स्वामी विवेकानंद ने भी प्रश्न किए थे और नचिकेता का प्रश्न करना भारतीय परंपरा में प्रसिद्ध है।
सवाल: देश में भ्रष्टाचार पर कैसे लगाम लगेगी, स्वयंसेवकों के बारे में क्या मार्गदर्शन है?
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जवाब: व्यवस्था में सुधार जरूरी है, लेकिन इसकी शुरुआत व्यक्ति के अपने जीवन से होनी चाहिए। स्वयंसेवकों को पहले स्वयं भ्रष्टाचार से मुक्त रहने का प्रयास करना चाहिए और समाज में भी इसके विरुद्ध जागरूकता विकसित करनी चाहिए।
सवाल: भारत को औपनिवेशिक मानसिकता से कैसे मुक्त किया जाए?
जवाब: देश, राजनीतिक रूप से स्वतंत्र हो चुका है, लेकिन ‘डिकोलोनाइजेशन ऑफ माइंड’ की प्रक्रिया अभी जारी है। राजनीतिक स्वतंत्रता के बाद मानसिक स्वतंत्रता भी जरूरी है।
सवाल: भारतीय सभ्यता, संस्कृति और दृष्टि को समझने के लिए जरूरी क्या है?
जवाब: भारतीय दृष्टि को समझने के लिए इतिहास, पुरातत्व, भाषाविज्ञान और सामाजिक विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में अध्ययन आवश्यक है।
सवाल: सिस्टम और छात्रों के बीच वैचारिक माहौल कैसे बदलेगा?
जवाब: ग्रुप डिस्कशन और राष्ट्रहित से जुड़ी रचनात्मक गतिविधियां शुरू हों। छोटी-छोटी गतिविधियों के माध्यम से भी सकारात्मक वातावरण बनाया जा सकता है। बेंगलुरु के छात्रों का ‘नमो भारती’ कार्यक्रम इसका उदाहरण है।
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सवाल: शिक्षा व्यवस्था में भारतीय दृष्टि का जुड़ाव कैसे बढ़े?
जवाब: इतिहास, पुरातत्व, भाषाविज्ञान और सामाजिक विज्ञान के कई क्षेत्रों में भारत को लंबे समय तक पश्चिमी दृष्टि से देखने का प्रयास हुआ। समाज की सकारात्मक उपलब्धियों और परंपराओं का भी वस्तुनिष्ठ अध्ययन होना चाहिए।




















