बिलासपुर में संदिग्ध बांग्लादेशी केस का बड़ा अपडेट, 23 में से 18 लोग रिहा, 5 पर अब भी दस्तावेजों की जांच

रायपुर: बिलासपुर में संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। STF की कार्रवाई के बाद रायपुर स्थित डिटेंशन सेंटर भेजे गए 23 लोगों में से 18 लोगों को दस्तावेज सत्यापन के बाद रिहा कर दिया गया है। जांच में इन 18 लोगों के भारतीय मूल के नागरिक होने की पुष्टि होने की बात सामने आई है। वहीं, बाकी 5 लोगों के दस्तावेजों में कमी और संदेह से जुड़े बिंदुओं की जांच अभी जारी है।
STF कार्रवाई के बाद डिटेंशन सेंटर पहुंचे थे 23 लोग
बिलासपुर शहर में 5 सितंबर को STF ने कार्रवाई करते हुए 23 लोगों को हिरासत में लिया था। पुलिस की ओर से इनकी पहचान और नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों की जांच के लिए सभी को रायपुर डिटेंशन सेंटर भेजा गया था। अब दस्तावेजों के सत्यापन के बाद 18 लोगों को रिहा कर दिया गया है।
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18 लोगों की भारतीय नागरिकता की पुष्टि
जांच प्रक्रिया के दौरान 18 लोगों के उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, सत्यापन में इनके भारतीय मूल के नागरिक होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद इन्हें डिटेंशन सेंटर से छोड़ दिया गया।वहीं, बचे हुए 5 लोगों के दस्तावेजों में कमी पाए जाने की बात सामने आई है। इनकी नागरिकता और पहचान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच अभी जारी है।
पिता की जगह ससुर का नाम, यहीं से बढ़ा था शक
पुलिस की शुरुआती जांच में कुछ लोगों के दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे थे। बताया गया कि कुछ दस्तावेजों में पिता के नाम की जगह ससुर का नाम दर्ज था। इसके अलावा मूल निवास और पहचान से संबंधित दस्तावेजों में भी पुलिस को कुछ विसंगतियां मिली थीं। इन्हीं आधारों पर संबंधित लोगों की पहचान और नागरिकता को लेकर आगे जांच शुरू की गई थी।
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शुरुआती जांच में बांग्लादेशी होने का जताया गया था संदेह
कार्रवाई के शुरुआती चरण में पुलिस ने इन लोगों के बांग्लादेशी नागरिक होने का संदेह जताया था। हालांकि, दस्तावेजों के सत्यापन के बाद 18 लोगों के भारतीय नागरिक होने की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच का फोकस बाकी 5 लोगों के दस्तावेजों और पहचान से जुड़े रिकॉर्ड पर है।
सिरगिट्टी इलाके में रहकर करते थे छोटे-मोटे काम
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया था कि इनमें से अधिकांश लोग बिलासपुर के सिरगिट्टी इलाके में रहकर अलग-अलग काम करते थे।कुछ लोग बाल के बदले बर्तन देने का काम करते थे, जबकि कुछ लोग टेंट-पंडाल लगाने और अन्य छोटे-मोटे काम से जुड़े बताए गए हैं। पुलिस ने इनके पश्चिम बंगाल में बताए गए पते और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध दस्तावेजों की जानकारी भी जुटाई थी।
अब 5 लोगों के दस्तावेजों पर पूरा फोकस
18 लोगों के सत्यापन के बाद रिहाई हो चुकी है। अब पुलिस की जांच बाकी 5 लोगों के दस्तावेजों पर केंद्रित है। पुलिस इन लोगों के अतिरिक्त पहचान पत्र, निवास और अन्य संबंधित रिकॉर्ड मंगवाकर उनकी जांच कर रही है। जिन दस्तावेजों को अधूरा या संदिग्ध माना जा रहा है, उनका संबंधित थाना और क्षेत्र के रिकॉर्ड से मिलान कराया जाएगा।
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SIR प्रक्रिया का भी सामने आया जिक्र
मामले में कुछ लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के तहत हटाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड का सत्यापन जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। फिलहाल 18 लोगों को दस्तावेज सत्यापन के बाद रिहा किया जा चुका है, जबकि 5 लोगों के मामले में जांच पूरी होने का इंतजार है।




















