रीवा के बाढ़ प्रभावित गुरुगुदा गांव में बिजली-पानी का संकट, टमस नदी का मटमैला पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

रीवा। गांव में बिजली के तार बेजान लटके हैं और मोबाइल चार्ज कराने के लिए ग्रामीणों को मीलों दूर दूसरे गांवों में जाना पड़ रहा है। सूरज ढलते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है, वहीं लोग टमस नदी का मटमैला पानी इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बिजली बहाल करने और साफ पानी के लिए टैंकर उपलब्ध कराने की मांग की है।
बाढ़ के बाद गांव में बुनियादी सुविधाएं ठप
जवा तहसील के गुरुगुदा गांव में बाढ़ का पानी तो उतर गया, लेकिन अपने पीछे बर्बादी के गहरे निशान छोड़ गया है। बाढ़ के बाद बुनियादी सुविधाओं का संकट खड़ा हो गया है और आम आदमी की दिनचर्या बेपटरी हो गई है, जिससे ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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बिजली गुल, मोबाइल चार्ज कराने जाना पड़ रहा बाहर
गांव में विद्युत आपूर्ति ध्वस्त होने का असर हर घर पर दिख रहा है। डिजिटल दौर में संचार का सबसे बड़ा जरिया मोबाइल फोन तक बंद पड़े हैं, जिन्हें चार्ज कराने के लिए ग्रामीणों को मीलों दूर दूसरे गांवों की शरण लेनी पड़ रही है, जबकि सूरज ढलते ही पूरा गांव घने अंधेरे में डूब जाता है।
अंधेरे में विषैले जीव-जंतुओं का डर
बिजली नहीं होने से रात के समय ग्रामीणों की मुश्किल और बढ़ जाती है। पूरा गांव अंधेरे में डूबने के कारण विषैले जीव-जंतुओं का खौफ लगातार बना रहता है, जिससे लोग डर के माहौल में रात गुजारने को मजबूर हैं और बिजली व्यवस्था जल्द बहाल होने का इंतजार कर रहे हैं।
टमस नदी का मटमैला पानी पीने की मजबूरी
सबसे चिंताजनक स्थिति प्यास बुझाने को लेकर है। गांव में पेयजल का कोई सुरक्षित जरिया न बचने पर लोग टमस नदी का मटमैला पानी इस्तेमाल करने को मजबूर हैं, जबकि बाढ़ के बाद नदी का जल अत्यधिक प्रदूषित हो चुका है और इसके सीधे उपयोग से संक्रामक व जलजनित बीमारियों के फैलने की गंभीर आशंका है।
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विधायक और प्रशासन से तत्काल राहत की मांग
स्थानीय बाशिंदों ने क्षेत्रीय विधायक दिव्यराज सिंह, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और जिला प्रशासन से संवेदनशीलता दिखाते हुए इस जमीनी संकट से तत्काल राहत दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली बहाल करने के साथ जब तक पेयजल की मुकम्मल व्यवस्था नहीं होती, तब तक टैंकरों से साफ पानी पहुंचाया जाए। स्थानीय निवासी शिवशंकर तिवारी ने बताया कि गांव में अंधेरा पसरा है और हलक सुखाने वाली प्यास। मोबाइल तक चार्ज कराने बाहर जाना पड़ता है। टमस नदी का गंदा पानी पीने की मजबूरी है। शासन-प्रशासन से गुहार है कि बिजली बहाल की जाए और जब तक कोई मुकम्मल व्यवस्था न बने, तब तक टैंकरों से साफ पानी पहुंचाया जाए।




















