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आज से लागू हुआ डिमर्जर, अब दो स्वतंत्र इकाइयों के रूप में अगल-अलग काम करेगी टाटा मोटर्स

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के नाम से जानी जाएगी मौजूदा टाटा मोटर्स, एक अलग कंपनी होगी टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स
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आज से लागू हुआ डिमर्जर, अब दो स्वतंत्र इकाइयों के रूप में अगल-अलग काम करेगी टाटा मोटर्स

मुंबई। टाटा मोटर्स ने आधिकारिक तौर पर अपने डिमर्जर प्रक्रिया को 1 अक्टूबर से लागू कर दिया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब टाटा मोटर्स एक ही कंपनी न रहकर दो स्वतंत्र इकाइयों के रूप में काम करेगी। मौजूदा टाटा मोटर्स अब टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के नाम से जानी जाएगी, जिसमें यात्री वाहन, इलेक्ट्रिक वाहन और जगुआर लैंड रोवर का कारोबार शामिल होगा। दूसरी ओर, टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स एक अलग सूचीबद्ध कंपनी के रूप में शेयर बाजार में ट्रेड करेगी। इस डिमर्जर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हर टाटा मोटर्स शेयरधारक को उनकी मौजूदा हिस्सेदारी के बदले नई कंपनी का भी शेयर मिलेगा। यानी यदि किसी निवेशक के पास अभी टाटा मोटर्स का 1 शेयर है तो उसे एक और शेयर टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स का मिलेगा। इस कदम का सबसे बड़ा मकसद यह है कि दोनों कारोबारों को अपनी-अपनी रणनीति के मुताबिक आगे बढ़ने की स्वतंत्रता मिले।

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अब तक एक साथ चल रहे थे दोनों सेगमेंट

अब तक टाटा मोटर्स के तहत पैसेंजर वाहन और कमर्शियल वाहन एक साथ संचालित हो रहे थे, लेकिन दोनों के बिजनेस मॉडल, चुनौतियां और ग्रोथ की संभावनाएं अलग-अलग हैं। पैसेंजर वाहनों और इलेक्ट्रिक वाहनों में कंपनी का जोर इनोवेशन और टेक्नोलॉजी पर है, जबकि कमर्शियल वाहन कारोबार मुख्यतः इन्फ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्रियल डिमांड से जुड़ा है। अलग-अलग कंपनियों के रूप में काम करने से निवेशकों को भी साफ-साफ समझ आएगा कि वे किस व्यवसाय में निवेश कर रहे हैं और उसके अनुसार वैल्यूएशन तय होगा।

पैसेंजर वाहन इकाई के अंतर्गत रहेगा जेएलआर

टाटा मोटर्स का प्रीमियम ब्रांड जगुआर लैंड रोवर अब पैसेंजर वाहन इकाई के अंतर्गत रहेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंपनी की पकड़ और मजबूत होगी। वहीं, कमर्शियल व्हीकल कंपनी अपनी अलग पहचान के साथ देश-विदेश में भारी वाहनों और बसों के कारोबार को गति देगी। चूंकि दोनों सेक्टरों का बाजार अलग है, इसलिए डिमर्जर के बाद उनके प्रदर्शन का आकलन करना और निवेश करना आसान हो जाएगा। इस डिमर्जर से शेयरधारकों के लिए भी बड़ा लाभ है। उन्हें बिना अतिरिक्त लागत के एक अतिरिक्त कंपनी का शेयर मिल रहा है।

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बेहतर प्रतिस्पर्धा कर पाएंगी दोनों कंपनियां

इससे उनके पोर्टफोलियो का मूल्य बढ़ने की संभावना है, क्योंकि दोनों इकाइयां अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर पाएंगी और अलग-अलग निवेश आकर्षित कर पाएंगी। आमतौर पर डिमर्जर का उद्देश्य शेयरधारकों की वैल्यू को अनलॉक करना होता है, ताकि बाजार हर कारोबार की सही कीमत तय कर सके। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स इस क्षेत्र में अग्रणी मानी जाती है। वहीं कमर्शियल वाहन सेक्टर भी बुनियादी ढ़ांचे और लॉजिस्टिक्स में निवेश बढ़ने के कारण लंबे समय में मजबूत दिख रहा है। दोनों इकाइयां स्वतंत्र होकर अधिक केंद्रित रणनीति बना सकेंगी और निवेशकों का भरोसा जीत पाएंगी।

Aniruddh Singh
By Aniruddh Singh

अनिरुद्ध प्रताप सिंह। नवंबर 2024 से पीपुल्स समाचार में मुख्य उप संपादक के रूप में कार्यरत। दैनिक जाग...Read More

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