ईरान में जनआंदोलन या सत्ता परिवर्तन?सरकार विरोधी प्रदर्शनों का 16वां दिन, हिंसा में 538 लोगों की मौत

तेहरान। ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार 16वें दिन भी थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। राजधानी तेहरान समेत देश के 100 से ज्यादा शहरों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक बदहाली और सख्त धार्मिक शासन से नाराज जनता सड़कों पर है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब तक सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों की गिरफ्तारी के दावे सामने आ चुके हैं।
इसी बीच ईरानी सरकार ने इन प्रदर्शनों के पीछे इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद और विदेशी ताकतों का हाथ बताया है। वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान, ईरान की जवाबी चेतावनी और निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की देश वापसी की घोषणा ने संकट को और गहरा कर दिया है।
16 दिनों में कितनी मौतें, कितनी गिरफ्तारियां?
ईरान में जारी प्रदर्शनों को लेकर अलग-अलग मीडिया संस्थानों और एजेंसियों के आंकड़े सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 538 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 490 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षाकर्मी शामिल बताए गए हैं। वहीं एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, 109 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। इसके अलावा 10,600 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि, सुरक्षाबलों ने कई इलाकों में सीधे गोलीबारी की, जबकि सरकार का कहना है कि हिंसा के लिए प्रदर्शनकारी जिम्मेदार हैं।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिसवालों को जिंदा जलाया?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने प्रदर्शनकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि, प्रदर्शन के नाम पर पुलिसकर्मियों की हत्या की जा रही है और कुछ सुरक्षाकर्मियों को जिंदा जला दिया गया। अराघची ने इन घटनाओं के पीछे इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद का हाथ बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पुलिस पर हमले का एक वीडियो भी साझा किया। सरकार का दावा है कि, यह आंदोलन अब शांतिपूर्ण नहीं रहा, बल्कि हिंसक विद्रोह में बदल चुका है।
तेहरान में अंधेरा, मोबाइल फ्लैश से नारेबाजी
10 जनवरी को राजधानी तेहरान में हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए। कई इलाकों में बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। अंधेरे के बीच प्रदर्शनकारी मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जलाकर नारे लगाते नजर आए। 9 जनवरी को प्रदर्शनकारियों ने तेहरान की अल-रसूल मस्जिद में आग भी लगा दी। इन घटनाओं ने धार्मिक और राजनीतिक तनाव को और भड़का दिया है।
सुरक्षाबलों की कार्रवाई और फायरिंग के आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि, कई शहरों में सुरक्षाबलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सीधी फायरिंग की। वहीं सरकार का कहना है कि, सुरक्षाबल आत्मरक्षा में कार्रवाई कर रहे हैं और हिंसा फैलाने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।
ट्रंप बोले- ईरान ने बातचीत का प्रस्ताव दिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि, ईरान ने अमेरिका से संपर्क कर बातचीत का प्रस्ताव दिया है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि, उनका प्रशासन तेहरान के साथ बैठक तय करने को लेकर चर्चा कर रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर हालात और बिगड़े तो अमेरिका को पहले कार्रवाई करनी पड़ सकती है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, ईरान आजादी की ओर देख रहा है, जो पहले कभी नहीं हुआ। अमेरिका मदद के लिए तैयार है।
ईरान की अमेरिका और इजराइल को चेतावनी
ईरान ने अमेरिका और इजराइल को सख्त चेतावनी दी है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालीबाफ ने कहा कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने, अमेरिकी जहाज और इजराइल सभी ईरान के निशाने पर होंगे। यह बयान संसद के लाइव सत्र में आया, जहां सांसद ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे लगा रहे थे।
राष्ट्रपति पजशकियान बोले- दंगे भड़का रहे अमेरिका-इजराइल
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की बात सुनेगी, लेकिन दंगाइयों से सख्ती से निपटा जाएगा।
सरकारी टीवी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, हम जनता की समस्याओं का समाधान करेंगे, लेकिन समाज को तबाह करने की इजाजत नहीं दे सकते।
ईरान में भारतीयों की गिरफ्तारी की खबरों का खंडन
प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर भारतीय नागरिकों की गिरफ्तारी की खबरें भी सामने आईं। हालांकि, भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने इन खबरों को पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताया। उन्होंने साफ किया कि, किसी भी भारतीय नागरिक को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
अमेरिका और ब्रिटेन में भी प्रदर्शन
लॉस एंजिलिस (अमेरिका)
ईरान के समर्थन में हो रहे प्रदर्शन के दौरान हंगामा हो गया। एक तेज रफ्तार ट्रक प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच से निकल गया। लोग जान बचाकर भागे और बाद में गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने ट्रक ड्राइवर पर हमला करने की कोशिश की। पुलिस ने कुछ ही ब्लॉक आगे जाकर ट्रक को रोक लिया।
लंदन (ब्रिटेन)
लंदन में ईरानी दूतावास के बाहर प्रदर्शनकारियों ने ईरान का मौजूदा झंडा उतारकर 1979 से पहले का शेर और सूरज वाला झंडा फहरा दिया। पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है।
क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की वापसी की घोषणा
ईरान में 47 साल बाद एक बार फिर राजशाही समर्थक आवाजें तेज हो रही हैं। प्रदर्शनकारी निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग कर रहे हैं। रजा पहलवी ने घोषणा की है कि, वह ईरान लौटकर प्रदर्शनों में शामिल होंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि, वह राष्ट्रीय क्रांति की जीत के समय ईरान की जनता के साथ खड़े होंगे।
कौन हैं रजा पहलवी?
रजा पहलवी का जन्म 31 अक्टूबर 1960 को तेहरान में हुआ था। वह ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद राजशाही के पतन के साथ ही उन्हें निर्वासन में जाना पड़ा। तब से लेकर अब तक वे पिछले करीब 50 वर्षों से अमेरिका में रह रहे हैं। रजा पहलवी ईरान को एक सेक्युलर और लोकतांत्रिक देश बनाने की वकालत करते रहे हैं और मौजूदा धार्मिक शासन के विकल्प के तौर पर खुद को प्रस्तुत करते हैं।
आंदोलन की जड़- महंगाई और आर्थिक संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि इस आंदोलन की सबसे बड़ी वजह आर्थिक बदहाली है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर 1.45 मिलियन प्रति डॉलर तक पहुंच गई। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% तक बढ़ोतरी। दवाओं के दाम 50% तक बढ़े। 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव। इन हालातों ने खासकर Gen-Z और युवाओं को सरकार के खिलाफ खड़ा कर दिया है।
14 दिनों का घटनाक्रम: आंदोलन कैसे बढ़ा
28 दिसंबर 2025: तेहरान से आंदोलन शुरू।
31 दिसंबर: 21 राज्यों में हिंसा।
1 जनवरी 2026: 5 प्रदर्शनकारियों की मौत।
7 जनवरी: सुरक्षाबलों पर हमले।
8 जनवरी: 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन, इंटरनेट बंद।
10 जनवरी: मस्जिद में आग, बिजली सप्लाई बंद।
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