Garima Vishwakarma
12 Jan 2026
इंदौर में सोमवार को एक और मौत के साथ मृतकों की संख्या बढ़कर 23 हो गई। ताजा मृतक भगवानदास पिता तुकाराम भरणे (64) हैं, जो पिछले 10 दिनों से अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। पहले उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, हालत बिगड़ने पर बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां अंततः उन्होंने दम तोड़ दिया।
बॉम्बे हॉस्पिटल के जनरल मैनेजर राहुल पाराशर ने बताया कि जब भगवानदास को यहां लाया गया, तब उन्हें कार्डियक अरेस्ट आ चुका था। सीपीआर देकर जान बचाने की कोशिश की गई और वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन गैंग्रीन और मल्टी ऑर्गन फेल्योर ने उनकी सांसें छीन लीं।
कमला बाई की मौत भी सवालों के घेरे में
इससे पहले मृतक महिला की पहचान कमला बाई, पति तुलसीराम (59) के रूप में हुई थी। 5-6 जनवरी से उल्टी-दस्त से पीड़ित कमला बाई की हालत बिगड़ने पर 7 जनवरी को एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 9 जनवरी को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
कमला बाई और उसका पति मजदूरी कर जीवन यापन करते थे। दोनों करीब 20 दिन पहले ही जीवन की फेल से भागीरथपुरा आकर रहने लगे थे। इसी दौरान दूषित पानी पीने से उसकी तबीयत बिगड़ गई।
मौत के बाद परिजनों ने नगर निगम की टीम और संबंधित केंद्र को सूचना दी, लेकिन आधार कार्ड जीवन की फेल का होने के कारण इस मौत को दूषित पानी से जोड़कर दर्ज नहीं किया गया। प्रशासनिक आंकड़ों में मौतों का खेल यहीं से शुरू हो जाता है।
बीमारी का बहाना, जिम्मेदारी से पल्ला
एमवाय अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव का कहना है कि कमला बाई भागीरथपुरा यूनिट की मरीज नहीं थी। वह पंचम की फेल की निवासी थी और पिछले एक साल से किडनी की बीमारी से पीड़ित थी। मामला एमएलसी नहीं होने के कारण पोस्टमॉर्टम भी नहीं कराया गया। सवाल यह है कि क्या पुरानी बीमारी का हवाला देकर दूषित पानी की जिम्मेदारी से बचा जा सकता है?
आईसीयू में बढ़ती भीड़, डर का माहौल
भागीरथपुरा में अब भी दहशत का माहौल है। लोग नल का पानी छूने से भी डर रहे हैं। आरओ, बोरिंग और बोतलबंद पानी पर निर्भर हो चुके हैं। पानी को छानकर और उबालकर पीना अब मजबूरी बन चुका है।
नेताओं के दौरे, फिर भी नहीं रुकी मौतें
29 दिसंबर को जब बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंचे, तब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ अस्पतालों में पहुंचे और मरीजों से मुलाकात की। लेकिन इसके बाद भी दूषित पानी से मौतों का सिलसिला थमा नहीं।
एक के बाद एक लोग दम तोड़ते गए, और प्रशासन सिर्फ आंकड़े गिनता रह गया। आज हालात यह हैं कि कई मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं, कई आईसीयू में हैं और कई परिवार अपनों को खो चुके हैं।