Aniruddh Singh
11 Jan 2026
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में आज एक बार फिर बड़ी कमजोरी देखने को मिली है। शेयर बाजार ने सप्ताह के पहले दिन गिरावटम में कारोबार शुरू किया था। शुरुआती कारोबार से ही निवेशकों का रुझान सतर्क नजर आ रहा था। सुबह के सत्र से ही बिकवाली के दबाव में प्रमुख सूचकांक नीचे खिसकते चले गए। सेंसेक्स 11.39 बजे तक करीब 683 अंकों की गिरावट के साथ 82,892.55 के स्तर पर आ गया है, जबकि निफ्टी 199.10 अंक की गिरावट के साथ 25,484.20 पर ट्रेड कर रहा है। इस स्थिति ने यह साफ कर दिया कि बाजार में फिलहाल भरोसे की कमी बनी हुई है और निवेशक जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं। गिरावट का असर सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी दबाव साफ नजर आ रहा है। जहां निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की। सुबह करीब 9.40 बजे के आसपास बीएसई का मार्केट कैप 462.52 लाख करोड़ रुपए के आसपास था, जो अब घटकर करीब 465.92 लाख करोड़ रुपए के आसपास आ गया है। इससे निवेशकों की पूंजी में से सुबह के सत्र में 3.4 लाख करोड़ रुपए डूब गए।

सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, आईटी और हेल्थकेयर जैसे अहम क्षेत्रों में बिकवाली से बाजार को कोई मजबूत सहारा नहीं मिल पाया। हालांकि मेटल सेक्टर ने कुछ हद तक स्थिरता दिखाई, लेकिन वह भी बाजार की समग्र गिरावट को रोकने में नाकाम रहा। जब ज्यादातर सेक्टर एक साथ दबाव में आते हैं, तो यह बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माना जाता है। मार्केट विड्थ भी कमजोर रही, क्योंकि गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से कहीं ज्यादा रही। कई शेयर अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर के आसपास पहुंच गए, जो बाजार की कमजोरी को और गहराता है। मौजूदा माहौल यही बताता है कि निवेशक फिलहाल सतर्क हैं और स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
उधर, एशियाई शेयर बाजारों में सोमवार को मिलाजुला लेकिन सकारात्मक रुख देखने को मिला। अधिकांश एशियाई बाजारों में तेजी दर्ज की गई, जिसकी अगुवाई टेक्नोलॉजी शेयरों ने की। अमेरिकी बाजारों में आई हालिया मजबूती का असर एशिया के टेक शेयरों पर दिखा, खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चिप निर्माण से जुड़ी कंपनियों में खरीदारी का उत्साह बना रहा। हालांकि, यह तेजी बहुत बड़ी नहीं रही, क्योंकि वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मैक्रो-इकोनॉमिक जोखिमों ने निवेशकों को पूरी तरह निश्चिंत नहीं होने दिया। जापान में बाजार बंद रहने के कारण क्षेत्रीय बाजारों में कारोबार का वॉल्यूम अपेक्षाकृत कम रहा। इसके बावजूद टेक शेयर दिन के सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले सेक्टर साबित हुए। एआई को लेकर बनी लगातार उम्मीदों और सेमीकंडक्टर की बढ़ती मांग ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा। यही वजह रही कि वॉल स्ट्रीट में शुक्रवार को आई मजबूती की झलक एशियाई बाजारों में भी देखने को मिली।
हालांकि, अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स में बाद में कमजोरी आ गई। एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में करीब 0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जब अमेरिकी सरकार द्वारा फेडरल रिजर्व की जांच की खबर सामने आई। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने इस जांच को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया, जिसके बाद केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई। इसका असर वैश्विक निवेश धारणा पर भी पड़ा। दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने भी बाजार की चाल को सीमित रखा। ईरान में विरोध प्रदर्शन, वेनेजुएला में अमेरिकी दखल, चीन और जापान के बीच कूटनीतिक तनाव और व्हाइट हाउस की ग्रीनलैंड को लेकर बयानबाजी जैसी घटनाओं ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा। साल की शुरुआत भले ही एशियाई बाजारों के लिए सकारात्मक रही हो, लेकिन इन जोखिमों के चलते निवेशक पूरी तरह जोखिम लेने के मूड में नहीं दिखे।
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वालों में रहा, जिसमें करीब 1.2 प्रतिशत की तेजी आई। यह उछाल मुख्य रूप से टेक और चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में मजबूती के कारण देखने को मिला। वहीं, हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी टेक शेयरों के सहारे मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। चीन के शंघाई और शेनझेन से जुड़े प्रमुख सूचकांकों को भी टेक शेयरों से समर्थन मिला। हांगकांग बाजार में हाल ही में सूचीबद्ध कई एआई कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला। खास तौर पर नॉलेज एटलस टेक, जिसे Z.AI के नाम से जाना जाता है के शेयरों में करीब 25 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। यह दिखाता है कि एआई को लेकर निवेशकों का उत्साह अभी भी बरकरार है, भले ही वैश्विक अनिश्चितताएं बाजार पर दबाव बना रही हों।