इंदौर में पुलिस की मीडिया से आंखमिचौली! 20KM तक घूमाया, फिर भी छिपाई सच्चाई; राजा रघुवंशी हत्याकांड में गुमराह करने की कोशिश का आरोप

इंदौर में पुलिस की मीडिया से आंखमिचौली! 20KM तक घूमाया, फिर भी छिपाई सच्चाई; राजा रघुवंशी हत्याकांड में गुमराह करने की कोशिश का आरोप
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में राजा रघुवंशी हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस का रवैया सवालों के घेरे में आ गया है। बुधवार को क्राइम ब्रांच ने पूरे दिन मीडिया को उलझाए रखा। पत्रकार केवल यही जानना चाहते थे कि सोनम द्वारा कराए गए इस हत्या कांड में किन आरोपियों से पूछताछ हो रही है, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट जानकारी देने के बजाय घंटों शहर में घुमाकर गुमराह किया।

    भरत जाधव से पूछताछ, पर मीडिया से दूरी

    जानकारी के अनुसार, राजा के दोस्तों विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी के घर के आसपास रहने वाले भरत जाधव को पुलिस ने बुधवार को हिरासत में लेकर क्राइम ब्रांच बुलाया। शिलांग से भी एसआईटी की टीम इंदौर पहुंची थी और पूछताछ में शामिल हुई। इसके बावजूद पुलिस ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और किसी भी सवाल का जवाब देने से इंकार कर दिया।

    सुबह से रात तक चला ड्रामा

    20 अगस्त की सुबह से ही क्राइम ब्रांच और शिलांग पुलिस की टीम ने मीडिया को चकमा देने का खेल शुरू कर दिया। पहले अधिकारियों को नाश्ते पर ले जाया गया, फिर किसी व्यक्ति से पूछताछ होती और उसके बाद फिर शहर में गाड़ियों का काफिला दौड़ाया जाता। दोपहर बाद पुलिस ने भरत जाधव को निजी वाहन से शहर के कई इलाकों में घुमाया- रीगल चौराहा, तुकोगंज, परदेशीपुरा होते हुए गोरी नगर तक। इस दौरान कई बार ऐसा लगा जैसे पुलिस खुद भी तय नहीं कर पा रही कि गंतव्य क्या है।

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    मीडिया के वाहनों को चकमा देने की कोशिश

    शाम के समय जब पुलिस की गाड़ियां एमआर-10 की ओर बढ़ीं तो मीडिया के वाहनों को चकमा देने के लिए ड्राइवर ने गाड़ी की रफ्तार तेज कर दी। इससे सड़कों पर हादसे की आशंका भी बनी रही। आखिरकार शाम 6 बजे काफिला वापस क्राइम ब्रांच पहुंच गया, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने अब भी मीडिया को कोई ठोस जानकारी नहीं दी।

    देर रात तक जारी रही पूछताछ

    रात करीब 11 बजे तक पूछताछ का सिलसिला चलता रहा। भरत जाधव को थाने से छोड़ दिया गया, जबकि उसके एक अन्य साथी अभिषेक को पूछताछ के लिए बुलाया गया। दोनों पर शक है कि उन्होंने हत्या के समय राज के अन्य सहयोगियों से लगातार फोन पर संपर्क किया था। हालांकि पुलिस ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया।

    सवालों के घेरे में पुलिस की रणनीति

    पुलिस का यह रवैया कई सवाल खड़े करता है। आखिर मीडिया से सूचना क्यों छुपाई गई? बार-बार गाड़ी घुमाने और भ्रम फैलाने का मकसद क्या था? हत्याकांड से जुड़े अहम बिंदुओं पर चुप्पी साधकर पुलिस ने खुद अपनी जांच पर संदेह खड़ा कर दिया है।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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