इंदौर। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्र की आत्महत्या के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। परिजनों ने इस घटना के पीछे रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना को कारण बताते हुए कॉलेज प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं। मृत छात्र के पिता का कहना है कि उनका बेटा पढ़ाई के दबाव से नहीं, बल्कि लगातार हो रही प्रताड़ना से टूट चुका था।
गौरतलब है कि सोमवार शाम एमजीएम मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में एमबीबीएस छात्र अंतरिक्ष अग्रवाल ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के अगले दिन ग्वालियर से इंदौर पहुंचे पिता पंकज अग्रवाल गहरे शोक और आक्रोश में नजर आए। उन्होंने पुलिस को बताया कि करीब एक माह पहले अंतरिक्ष ने अपनी मां को हॉस्टल में रैगिंग की जानकारी दी थी, लेकिन बाद में खुद ही इसे सीनियर्स का अनुशासन बताकर नजरअंदाज कर दिया।
पिता के अनुसार, मौत से दो दिन पहले भी अंतरिक्ष ने किसी छात्र द्वारा लगातार परेशान किए जाने की बात कही थी। उस समय परिवार को यह अंदेशा नहीं था कि हालात इस हद तक बिगड़ चुके हैं। परिजनों का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन को कई बार शिकायतें दी गईं। इसके बाद जांच समिति गठित किए जाने की बात तो कही गई, लेकिन कार्रवाई को लेकर कॉलेज प्रशासन के बयान बदलते रहे। पहले दोषियों पर सख्त कदम उठाने की बात कही गई, फिर कॉलेज डीन ने रैगिंग से ही इनकार कर दिया। यही विरोधाभास अब जांच के घेरे में है।
परिजनों ने बताया कि अंतरिक्ष परिवार का इकलौता बेटा था। उसने डॉक्टर बनने के सपने के साथ नीट परीक्षा पास की थी और कभी भी पढ़ाई को लेकर तनाव की शिकायत नहीं की। ऐसे में उसकी आत्महत्या पढ़ाई के दबाव की नहीं, बल्कि मानसिक उत्पीड़न की ओर इशारा करती है।