Garima Vishwakarma
4 Feb 2026
विजय एस. गौर, भोपाल। हमारी अफीम की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। फूल लगने के बाद डोडा लग गए थे, लेकिन आंधी और ओलों की मार से डोडा टूटकर गिर गए। वहीं फसल खेतों में आड़ी हो गई है। इससे किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। एक तो खेती में खर्च हुए लाखों रुपए बर्बाद हो गए। दूसरे, अब पट्टे का रीन्युअल होना मुश्किल है। यह पीड़ा है नीमच जिले की जीरन तहसील के भौंरासा गांव के अफीम किसान मुकेश पाटीदार की। इस गांव में 85 किसानों को केंद्र सरकार ने अफीम की खेती के लिए पट्टे दिए थे। सभी की फसल बारिश और ओलावृष्टि से खराब हो गई है।
इसके अलावा मंदसौर और रतलाम जिलों में भी अफीम की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। डोडे टूटकर गिर गए हैं या फसल के साथ ही मिट्टी में मिल गए हैं। केंद्रीय नारकोटिक्स के अनुसार, नीमच जिले की 6, मंदसौर की 8, रतलाम की 6 तहसीलों में करीब 52 हजार किसानों को अफीम के पट्टे दिए गए हैं।
अफीम फसल के लिए पट्टे स्वीकृत करने के तीन बिंदु निर्धारित हैं। पहला, प्रति हेक्टेयर मार्फीन 4.2 प्रतिशत होना चाहिए। दूसरा, प्रति हेक्टेयर औसत अफीम उत्पादन 58 किलो और तीसरा मानदंड गाढ़ता (कंसीस्टेंसी) होती है। फसल खराब होने से इन तीनों पैमानों की पूर्ति नहीं होने से पट्टे रिन्युअल नहीं होने की आशंका बढ़ गई है।
हैरानी की बात है कि अफीम औषधि खेती की श्रेणी में आती है, लेकिन यह फसल बीमा के दायरे से बाहर है। यही कारण है कि अफीम उत्पादक किसानों को पूर्व में भी फसल बर्बाद होने पर मुआवजा नहीं मिला। मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता ने सेंट्रल नारकोटिक्स ऑफिस नीमच को सर्वे कर अफीम उत्पादन के पट्टे रिन्युअल करने के बारे में लिखा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट से पहले मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं, जहां-जहां भी ओला-पाला से फसलें प्रभावित हुई हैं, उन जिलों के कलेक्टर सर्वे कराकर तत्काल सहायता राशि किसानों को उपलब्ध कराएं।
जवाब : सर्वे शुरू हो चुका है, जो हफ्तेभर में पूरा हो जाएगा। इसके बाद ही तय हो सकेगा कि फलावरिंग के लिए फसल को ऐसे ही रहने देकर इंतजार किया जाए या फसल को डिस्ट्राय कर दिया जाए।
जवाब : जहां भी फसलें आंशिक या पूरी तरह नष्ट हुई हैं, वहां के ग्राम लंबरदार से लेकर किसानों तक से संपर्क बना हुआ है। पूरी कोशिश है कि किसानों को पट्टे के रीन्युअल में परेशानी नहीं आए।
ओला-बारिश से अफीम फसल को भारी नुकसान हुआ है। पट्टे देने से लेकर फसल उत्पादन तक सेंट्रल नारकोटिक्स का ही अधिकार क्षेत्र है, इसलिए उन्हें रिपोर्ट भेजी गई है। अब नारकोटिक्स की टीम सर्वे कर पटूटे रिन्युअल के बारे में कार्यवाही करेगी।
अदिति गर्ग, कलेक्टर, मंदसौर