Raipur:कोसा साड़ी में रैंप पर उतरीं सरेंडर महिला नक्सली, बदली पहचान की दिखी नई तस्वीर

प्रेम कुमार,रायपुर: राजधानी रायपुर में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन और स्वदेशी एक्सपो में बदलाव की एक प्रेरक तस्वीर देखने को मिली। आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों ने कोसा साड़ी और हथकरघा परिधानों में रैंप वॉक कर अपनी नई पहचान और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। यह आयोजन उनके लिए सिर्फ फैशन शो नहीं, बल्कि हिंसा से बाहर निकलकर सम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का संदेश भी बना।
रायपुर के रैंप पर बदली तस्वीर
रायपुर में आयोजित स्वदेशी फैशन शो में आत्मसमर्पित महिलाओं ने पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक किया। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक बुनाई और कोसा सिल्क से तैयार आकर्षक परिधानों में नजर आईं महिलाओं ने प्रदेश की समृद्ध हथकरघा परंपरा को सामने रखा।
बंदूक की जगह अब हुनर
कभी हिंसा और बंदूक के साए में जीवन बिताने वाली इन महिलाओं ने अब नई राह चुनी है। रैंप पर उनका आत्मविश्वास इस बदलाव की कहानी कहता नजर आया। महिलाओं ने संदेश दिया कि मुख्यधारा में लौटने के बाद सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की शुरुआत की जा सकती है।

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पहली बार पहुंचीं रायपुर
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि रैंप वॉक में शामिल लगभग सभी आत्मसमर्पित महिलाएं पहली बार रायपुर पहुंची थीं। उनके लिए राजधानी में आयोजित यह कार्यक्रम बेहद खास और यादगार रहा। पारंपरिक परिधानों में रैंप पर कदम रखते समय उनके चेहरे पर उत्साह और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया।
CM साय ने बढ़ाया हौसला
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी शामिल हुए। उन्होंने आत्मसमर्पित महिलाओं से आत्मीय संवाद किया और उनके प्रयासों का उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने महिलाओं को बेहतर और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
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पुनर्वास से आत्मनिर्भरता तक
यह फैशन शो सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौट रहे लोगों के लिए सम्मान, अवसर और आत्मनिर्भरता का सकारात्मक संदेश लेकर आया। महिलाओं की भागीदारी ने यह दिखाया कि पुनर्वास केवल हिंसा से बाहर आने तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पहचान और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने से भी जुड़ा है।

कोशल फैब’ की नई शुरुआत
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के कोसा और पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ किया।
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कोसा की चमक, बदले बस्तर की तस्वीर
रैंप पर कोसा सिल्क पहनकर उतरीं आत्मसमर्पित महिलाओं ने एक ओर छत्तीसगढ़ की हथकरघा विरासत की झलक दिखाई, तो दूसरी ओर बदलते बस्तर की नई तस्वीर पेश की। यहां बंदूक की जगह हुनर, हिंसा की जगह आत्मनिर्भरता और डर की जगह आत्मविश्वास नजर आया।

लोकल से ग्लोबल की ओर
छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ पहचान दिलाने की कोशिशों के बीच आत्मसमर्पित महिलाओं की मौजूदगी खास संदेश लेकर आई। अवसर और सही दिशा मिलने पर ये महिलाएं अपने अतीत से निकलकर हुनर के जरिए ।सम्मानजनक भविष्य गढ़ सकती हैं।













